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सहकारी बैंक के अफसरों ने मिलीभगत करके बैंक में किया 55 हजार का गोलमाल
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:02 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। भूना के सहकारी बैंक में तत्कालीन बैंक मैनेजर, क्लर्क और जांडलीकलां बैंक के पूर्व सचिव द्वारा 55 हजार रुपये के गबन का मामला सामने आया है। भूना थाना पुलिस ने सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां की शिकायत पर तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में श्योनारायण वर्मा, सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां ने बताया कि उनके पास रामसिंह निवासी अलीपुर बरोटा ने 5 जुलाई 2017 को शिकायत दी थी। उसने बताया था कि सहकारी बैंक के सचिव धूप सिंह जोकि पहले भूना सहकारी बैंक में क्लर्क थे, ने पैक्स के उपनियम 6 की उल्लंघना करके समिति से अनुचित लाभ लिया है। इस मामले में सहकारी समितियों के निरीक्षक को जांच सौंपी गई थी। जांच में पाया गया कि धूप सिंह ने सहकारी बैंक भूना में अपने कार्यकाल के दौरान दि जांडलीकलां व दि जांडलीखुर्द ऋण व सेवा समिति के हदकर्जा रजिस्टर में वर्ष 2004 से 2007 तक में सदस्य संख्या 22 पर हरिकिशन का खाता काटकर अपनी पत्नी बिमला देवी का नाम दर्ज कर दिया। इसके बाद उसने 15 फरवरी 2005 को अपनी पत्नी के नाम 55 हजार रुपये बैंक से निकलवा लिए और इस पर अपने हस्ताक्षर किए। बाद में इस रिकार्ड को खुर्द बुर्द कर दिया गया।
जांच में पाया गया कि बैंक में 16 फरवरी 2005 के सभी बाउचर व चेक रिकार्ड में नहीं थी, जबकि इसके आगे व पीछे की सभी तिथियों का रिकार्ड था। धूप सिंह ने यह रुपये अपने स्वयं के हस्ताक्षर करके निकलवाए और इस काम में तत्कालीन भूना शाखा के मैनेजर वेदप्रकाश व जांडलीकलां बैंक के सचिव हंसराज ने मिलीभगत की। इन सभी ने मिलकर इन रुपयों का गोलमाल कर दिया।
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फतेहाबाद। भूना के सहकारी बैंक में तत्कालीन बैंक मैनेजर, क्लर्क और जांडलीकलां बैंक के पूर्व सचिव द्वारा 55 हजार रुपये के गबन का मामला सामने आया है। भूना थाना पुलिस ने सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां की शिकायत पर तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में श्योनारायण वर्मा, सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां ने बताया कि उनके पास रामसिंह निवासी अलीपुर बरोटा ने 5 जुलाई 2017 को शिकायत दी थी। उसने बताया था कि सहकारी बैंक के सचिव धूप सिंह जोकि पहले भूना सहकारी बैंक में क्लर्क थे, ने पैक्स के उपनियम 6 की उल्लंघना करके समिति से अनुचित लाभ लिया है। इस मामले में सहकारी समितियों के निरीक्षक को जांच सौंपी गई थी। जांच में पाया गया कि धूप सिंह ने सहकारी बैंक भूना में अपने कार्यकाल के दौरान दि जांडलीकलां व दि जांडलीखुर्द ऋण व सेवा समिति के हदकर्जा रजिस्टर में वर्ष 2004 से 2007 तक में सदस्य संख्या 22 पर हरिकिशन का खाता काटकर अपनी पत्नी बिमला देवी का नाम दर्ज कर दिया। इसके बाद उसने 15 फरवरी 2005 को अपनी पत्नी के नाम 55 हजार रुपये बैंक से निकलवा लिए और इस पर अपने हस्ताक्षर किए। बाद में इस रिकार्ड को खुर्द बुर्द कर दिया गया।
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जांच में पाया गया कि बैंक में 16 फरवरी 2005 के सभी बाउचर व चेक रिकार्ड में नहीं थी, जबकि इसके आगे व पीछे की सभी तिथियों का रिकार्ड था। धूप सिंह ने यह रुपये अपने स्वयं के हस्ताक्षर करके निकलवाए और इस काम में तत्कालीन भूना शाखा के मैनेजर वेदप्रकाश व जांडलीकलां बैंक के सचिव हंसराज ने मिलीभगत की। इन सभी ने मिलकर इन रुपयों का गोलमाल कर दिया।
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