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जानकी को दे आओ, जपो हरि के नाम को...
अमर उजाला फरीदाबाद
Updated Fri, 11 Oct 2013 10:18 PM IST
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करना चाहिए सोचकर पहले हर एक काम को/ वरना पछताना पड़े हर काम के अंजाम को/पहले ही तुमने क्यों जगाया ना मुझे/जानकी को दे आओ, जपो हरि के नाम को...।।
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श्रीराम द्वारा लंका पर युद्ध के लिए चढ़ाई करने की खबर पाकर लंकेश जब अपने भाई कुंभकर्ण को जगाने आता है तो उठने के बाद वह इन्हीं शब्दों से रावण को समझाता है।
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इससे पहले एनएच-एक स्थित विजय रामलीला कमेटी द्वारा मंचित की जा रही इस रामलीला में विभीषण (कमल शर्मा) द्वारा रावण (टेकचंद नागपाल) को समझाने पर वह उन्हें लंका से निकाल देता है। दूसरी ओर श्रीराम की सेना समुद्र पर सेतु बांधती है। श्रीराम जी (अनुराग कुमार) रावण को समझाने के लिए अंगद (वैभव) को भेजते हैं।
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अंगद ने रावण को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह अपने इरादे से टस से मस नहीं हुआ। अपनी ताकत का करिश्मा दिखाने के लिए सरे दरबार में अंगद ने अपना पांव जमीन पर जमाया और रावण को ललकारा कि यदि कोई तेरा योद्धा जमीन से मेरा पांव हिला दे तो हमारी हार।
मेघनाद और कुंभकर्ण सहित कई ने प्रयत्न किए लेकिन अंगद का पांव जमीन से कोई नहीं हिला पाया। इस पर अंगद कहते हैं कि ये तो प्रभु श्रीराम के एक दूत का काम है। सोचो तुम्हारा श्रीराम क्या हश्र करेंगे। टेकचंद नागपाल ने रावण की दमदार भूमिका निभाई।
इससे पहले, सीता हरण के बाद उनके लिए श्रीराम की व्याकुलता देख अनुज लक्ष्मण (सौरभ कुमार) खुद को कोसते हुए कहते हैं कि-विधना तुझसे पूछ रहा हूं देखो ये क्या खेल किया है/ जग के संकट काटने वाले को, संकट में डाल दिया है...।। मुझे बनाके मोहरा मुझसे क्यूं लक्ष्मण रेखा खिंचवाई/ जग का भाग्य बनाने वाले के भाग्य में लिख दी रुसवाई/क्षमा योग्य जो कभी न होगा मैने वो अपराध किया है/ जग के संकट...।।निर्देशन विश्वबंधु शर्मा ने किया।