{"_id":"70e6209c79490fbff45144857d6fbbac","slug":"election-prior-reservation-another-congress-boycott","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव पूर्व आरक्षण, नहीं तो कांग्रेस का बहिष्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनाव पूर्व आरक्षण, नहीं तो कांग्रेस का बहिष्कार
हिसार/ब्यूरो
Updated Fri, 13 Sep 2013 10:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने चेताया कि यदि पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पूर्व केंद्रीय सेवाओं में जाटों को आरक्षण नहीं दिया गया तो कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों का विरोध किया जाएगा।
हिसार जिले के मय्यड़ गांव में शहीदी दिवस पर शुक्रवार को जाट खाप के प्रधान सूबेदार राजमल धनाना की अध्यक्षता में हुई रैली में साफ कर दिया कि चुनाव से पहले राज्य में मिले आरक्षण बिल को यदि विधानसभा में पारित करवाकर केंद्र में नहीं भेजा गया तो जाट आरक्षण संघर्ष समिति कांग्रेस का चुनावों में बहिष्कार करेगी।
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक, प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल छौत, प्रवक्ता रामभगत मलिक, प्रदेश सचिव महेंद्र पूनिया ने मांग की कि प्रदेश सरकार चुनाव से पहले आरक्षण के बिल को संवैधानिक दर्जा दे। जाट नेताओं ने कहा कि जानबूझ कर सरकार जाटों को आरक्षण देने में देरी कर रही है।
विज्ञापन
पंजाब में 28 से जनजागरण यात्रा
यशपाल मलिक ने कहा कि संघर्ष समिति शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिवस पर 28 सितंबर से पंजाब में हुसैनीवाला से जाट संदेश यात्रा के माध्यम से जनजागरण अभियान की शुरुआत करेगी।
यह यात्रा लगभग 12 राज्यों से होती हुई लोगों को जाट आरक्षण के बारे में जागृत करने का कार्य करेगी। यात्रा राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली में निकाली जाएगी। वहीं, मेरठ में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
शहीदों के गांवों में बने स्टेडियम
यशपाल मलिक ने कहा कि जाट आरक्षण पर जो कमियां रह गई हैं, उन्हें दूर किया जाए। जाट आरक्षण के दौरान जो तीन लोग शहीद हुए थे, उनके गांवों में खेल स्टेडियमों का निर्माण किया जाए।
मलिक ने कहा कि शहीद सुनील, संदीप और विजय सिंह के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
इन्होंने 2010 में जाट आरक्षण के दौरान चले आंदोलन में शहादत पाई थी। जाट आरक्षण शहीदी दिवस पर हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड सहित आठ राज्यों के जाट समुदाय ने भाग लिया।
इस मौके पर मांगे राम तेवतिया, करनैल सिंह भावड़ा, रोहताश हुड्डा, विजय मान, राकेश फौजदार, बीएस अहलावत, जोगेंद्र, पूर्व सरपंच हिम्मत सिंह, सूबेदार ओमप्रकाश और बलदेव सिंह भाकर आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
हिसार जिले के मय्यड़ गांव में शहीदी दिवस पर शुक्रवार को जाट खाप के प्रधान सूबेदार राजमल धनाना की अध्यक्षता में हुई रैली में साफ कर दिया कि चुनाव से पहले राज्य में मिले आरक्षण बिल को यदि विधानसभा में पारित करवाकर केंद्र में नहीं भेजा गया तो जाट आरक्षण संघर्ष समिति कांग्रेस का चुनावों में बहिष्कार करेगी।
विज्ञापन
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक, प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल छौत, प्रवक्ता रामभगत मलिक, प्रदेश सचिव महेंद्र पूनिया ने मांग की कि प्रदेश सरकार चुनाव से पहले आरक्षण के बिल को संवैधानिक दर्जा दे। जाट नेताओं ने कहा कि जानबूझ कर सरकार जाटों को आरक्षण देने में देरी कर रही है।
विज्ञापन
पंजाब में 28 से जनजागरण यात्रा
यशपाल मलिक ने कहा कि संघर्ष समिति शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिवस पर 28 सितंबर से पंजाब में हुसैनीवाला से जाट संदेश यात्रा के माध्यम से जनजागरण अभियान की शुरुआत करेगी।
यह यात्रा लगभग 12 राज्यों से होती हुई लोगों को जाट आरक्षण के बारे में जागृत करने का कार्य करेगी। यात्रा राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली में निकाली जाएगी। वहीं, मेरठ में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
शहीदों के गांवों में बने स्टेडियम
यशपाल मलिक ने कहा कि जाट आरक्षण पर जो कमियां रह गई हैं, उन्हें दूर किया जाए। जाट आरक्षण के दौरान जो तीन लोग शहीद हुए थे, उनके गांवों में खेल स्टेडियमों का निर्माण किया जाए।
मलिक ने कहा कि शहीद सुनील, संदीप और विजय सिंह के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
इन्होंने 2010 में जाट आरक्षण के दौरान चले आंदोलन में शहादत पाई थी। जाट आरक्षण शहीदी दिवस पर हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड सहित आठ राज्यों के जाट समुदाय ने भाग लिया।
इस मौके पर मांगे राम तेवतिया, करनैल सिंह भावड़ा, रोहताश हुड्डा, विजय मान, राकेश फौजदार, बीएस अहलावत, जोगेंद्र, पूर्व सरपंच हिम्मत सिंह, सूबेदार ओमप्रकाश और बलदेव सिंह भाकर आदि मौजूद थे।