धर्मपाल की फांसी पर दस अप्रैल तक रोक
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेंट्रल जेल अंबाला में बंद धर्मपाल की फांसी की सजा पर दस अप्रैल तक रोक लगा दी है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा 14 साल बाद रिजेक्ट की गई माफी याचिका के बाद धर्मपाल ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है।
याचिका में आग्रह किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल चंदन तस्करी और दविंदर पाल सिंह भुल्लर के मामले में जब तक कोई फैसला नहीं हो जाता, तब तक उसकी फांसी की सजा पर रोक लगाई जाए।
जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस जेएस संधावालिया पर आधारित विशेष बेंच ने याचिका को गंभीरता से लेकर हरियाणा सरकार और डीजीपी जेल को नोटिस जारी कर दिया है। अगली सुनवाई दस अप्रैल को होगी।
दाखिल याचिका में कहा गया है कि उसके खिलाफ सोनीपत पुलिस स्टेशन में 10 जून 1993 को हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। 5 मई 1997 को सोनीपत के सेशन जज ने फांसी की सजा सुनाई।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में फैसला बरकरार रहा। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 1999 में राष्ट्रपति के पास माफी याचिका दाखिल की, जिसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे दविंदर पाल सिंह भुल्लर और एक जनहित याचिका का हवाला दिया है, जिसमें वीरप्पन के साथ चंदन तस्करी के मामले में चार लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अंतरिम राहत देकर तीन की सजा पर रोक लगा दी है। इस मामले पर छह हफ्तों में सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट में कहा कि सेंट्रल जेल अंबाला से टेलीफोन पर संपर्क साधने पर बताया गया कि धर्मपाल को 15 अप्रैल 2013 को फांसी की सजा होगी।
वहीं, जबकि डीजीपी जेल ने बताया कि धर्मपाल को कभी भी सजा हो सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और डीजीपी जेल को नोटिस जारी कर दिया है।