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Hindi News ›   Haryana ›   Decline in stubble burning cases recorded in Haryana

Haryana: पांच वर्षों में पराली जलाने के सबसे कम मामले, 90 फीसदी दर्ज की गई गिरावट

Sat, 25 Oct 2025 10:03 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Sat, 25 Oct 2025 10:03 PM IST
सार

हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में बीते पांच वर्षों की अपेक्षा इस बार काफी कमी आई है।  हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। 

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Decline in stubble burning cases recorded in Haryana
हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में आई कमी - फोटो : ANI

विस्तार

हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में काफी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले पांच वर्षों में सबसे कम पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य में पराली जलाने के अभी तक सिर्फ 63 मामले सामने आए हैं जबकि इसी अवधि में पिछले साल 689 मामले सामने आ चुके थे। पराली जलाने की घटनाओं में 90 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 
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कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अब मामले ज्यादा नहीं बढ़ेंगे क्योंकि पीआर ग्रुप का धान जिसकी पराली जलाई जाती है उसकी 80 से 90 फीसदी कटाई हो चुकी है। अब मंडी में बासमती धान आ रहा है। किसान इसकी पराली जलाते नहीं बल्कि इसका इस्तेमाल करते हैं।
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हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी मामले नियंत्रण में हैं। अगले दो हफ्ते काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं क्योंकि कुछ इलाकों में कटाई चल रही है। हालांकि धान का लगभग 80 फीसदी क्षेत्र अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत आ चुका है। आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए टीमें ड्रोन और उपग्रह डाटा के माध्यम से जमीनी स्तर पर निगरानी कर रही हैं।
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हर गांव पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। कड़ी निगरानी और सख्ती का नतीजा है कि राज्य के प्रमुख धान उत्पादक करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में इस वर्ष कुल आठ ही मामले सामने आए हैं। करनाल में 3, कुरुक्षेत्र में एक और कैथल में चार मामले दर्ज किए गए हैं। हरियाणा में अब तक सबसे ज्यादा मामले जींद में 16 दर्ज किए गए हैं। कृषि विभाग के मुताबिक हरियाणा में 15 सितंबर से 25 अक्तूबर तक 2020 में 1772, 2021 में 1835, 2022 में 1372, 2023 में 871, 2024 में 689 मामले दर्ज किए गए थे।



 
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