Haryana Election: कांग्रेस गठबंधन को तैयार; वेणुगोपाल और राघव चड्ढा की दो दौर की वार्ता, आप ने मांगी 10 सीटें
Haryana Assembly Election 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन हो सकता है। कांग्रेस इसके लिए तैयार है। वहीं आप ने चुनाव के लिए 10 सीटों की मांग की है।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आम आदमी पार्टी (आप) से गठबंधन को तैयार है। कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में राहुल गांधी ने इस पर चर्चा की और साथ लड़ने की संभावना तलाशने को कहा। राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में दीपक बाबरिया, अजय माकन और भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चार सदस्यीय कमेटी बनाई है। यही कमेटी आप के अलावा समाजवादी पार्टी से भी गठबंधन पर बात करेगी।
उधर, आप नेता व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि भाजपा को हराना हमारी प्राथमिकता है, मगर इस पर फैसला अरविंद केजरीवाल की सहमति के बाद ही लिया जा जाएगा। आप ने कांग्रेस से दिल्ली और पंजाब से लगती 10 सीटें मांगी हैं, लेकिन सात सीटों से आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।
#WATCH | Haryana elections | When asked if state unit of Congress is in favour of alliance, AICC in-charge of Haryana Deepak Babaria says, "Nobody is opposing, all decisions are taken unanimously." pic.twitter.com/p8c6PbGA8j
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 3, 2024
नई दिल्ली में सोमवार को हुई कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं से पूछा कि क्या अकेले चुनाव लड़ने से नुकसान नहीं होगा। गठबंधन की कोई संभावना बन सकती है। इस पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आप हरियाणा में ज्यादा सीटें मांग रही है। उन्हें सिर्फ तीन से चार सीटें दी जा सकती हैं। इस पर राहुल ने कहा कि वोटों के बिखराव को रोकने के लिए मिलकर लड़ना चाहिए। उन्होंने हुड्डा से कहा कि इस पर विचार करना चाहिए और संभावनाएं भी देखनी होंगी।
गठबंधन को लेकर कांग्रेस की कमेटी के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल और आप की ओर से राघव चड्ढा के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी है। तीसरे दौर की वार्ता आज देर रात या फिर कल सुबह होगी। 10 सीटें मांगने के पीछे आप नेताओं का तर्क है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को एक सीट मिली थी। एक लोकसभा सीट में 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस हिसाब से उसे 10 विधानसभा सीटें मिलनी चाहिए।
गुजरात के परिणाम ने कांग्रेस को सोचने पर मजबूर किया
राहुल गांधी ने गठबंधन की चर्चा ऐसे ही नहीं की है। वह समझते हैं कि अलग-अलग लड़े तो इसका सीधा फायदा भाजपा को ही मिलेगा। साल 2022 में गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ काफी सत्ता विरोधी लहर थी। इसके बावजूद भाजपा ने सत्ता हासिल कर ली। इसकी बड़ी वजह आम आदमी पार्टी थी। पार्टी ने सिर्फ पांच सीटों पर जीत दर्ज की, मगर 35 सीटें ऐसी थीं, जहां वह दूसरे नंबर पर रही। आप की एंट्री से कांग्रेस को सबसे बड़ा नुकसान हुआ। 77 से वह 17 सीटों पर सिमट गई।
सत्ता विरोधी हवा से मिलने वाले वोटों का बिखराव रोकना
हरियाणा में दस साल से भाजपा सत्ता में है। उसके खिलाफ सत्ता विरोधी हवा है। भाजपा के एंटी वोट के लिए मतदाताओं के पास कांग्रेस, जजपा, इनेलो और आप विकल्प के तौर पर है। ऐसे में चार तरफ वोटों का बिखराव होना तय है। कांग्रेस इनेलो व जजपा के साथ नहीं जा सकती। ऐसे में आप ही उसके सामने विकल्प बचता है। इस गठबंधन के साथ वह नॉन जाट वोटों को भी अपनी तरफ खींच सकती है।
हरियाणा कांग्रेस को गठबंधन से नुकसान का अंदेशा
हरियाणा कांग्रेस के नेताओं ने बताया कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली व पंजाब में जो स्थिति है, वह हरियाणा में नहीं है। पार्टी के पास राज्य में कोई बड़ा चेहरा नहीं है। गठबंधन की स्थिति में आप कम से कम 10 से 12 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और यदि परिणाम विपरीत हुए तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यदि लोकसभा चुनाव में कुरुक्षेत्र सीट कांग्रेस के पास रहती तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। मौजूदा समय में कांग्रेस की स्थिति मजबूत है। वह अकेले बहुमत हासिल कर सकती है। उधर, कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा व कुमारी सैलजा अलग-अलग इंटरव्यू में बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने का दावा करते रहे हैं। बीते लोकसभा चुनाव में 90 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने 44, कांग्रेस ने 42 और आप ने चार पर जीत दर्ज की थी।
कांग्रेस को फायदा कम नुकसान ज्यादा
चुनाव विश्लेषक प्रमोद शर्मा ने बताया कि यदि कांग्रेस आप को चार से पांच सीटें देती है तो फायदे में रह सकती है। एक तो सत्ता विरोधी मत विभाजित नहीं होगा और पार्टी चार से पांच सीटें मैनेज कर सकती है। यदि दस से 15 सीटों पर समझौता होता है तो कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। क्योंकि आम आदमी पार्टी के पास इतनी सीटों पर जिताऊ उम्मीदवार नहीं हैं। वहीं, ज्यादा सीटें देने पर कांग्रेस के टिकट दावेदार भी बगावत कर सकते हैं। उधर, आम आदमी पार्टी को गठबंधन से फायदा है। एक भी सीट जीतने पर उसकी हरियाणा विधानसभा में एंट्री हो जाएगी।
कांग्रेस अब तक हरियाणा में विधानसभा चुनाव अकेले लड़ते आई है। आज तक उसने गठबंधन नहीं किया है। हालांकि बीते लोकसभा चुनाव में पार्टी ने आप के साथ गठबंधन किया था। गठबंधन के तहत कुरुक्षेत्र की सीट आप के खाते में गई, मगर आप उम्मीदवार को हार झेलनी पड़ी।