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आओ चलें करें सुल्तानपुर की सैर
यशलोक सिंह
Updated Sun, 24 Nov 2013 08:21 PM IST
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इन दिनों सुल्तानपुर राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में हजारों विदेशी परिंदों की मौजूदगी हर किसी को लुभा रही है। रविवार को झील में पक्षियों की गणना की गई तो पता कि यहां पर इस समय 61 प्रजातियों के साइबेरियन और यूरोपी पक्षी कलरव कर रहे हैं। पहली बार यहां एक साथ इतनी प्रजाति के पक्षियों का जमावड़ा लगा हुआ है। पिछले तीन दिन से यहां विदेशी सैलानियों के आने का सिलसिला भी जोर पकड़ रहा है।
फर्रूखनगर स्थित राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में मेहमान पक्षी सिर्फ आसपास के लोगों को ही नहीं बल्कि देश-विदेश के लोगों को भी आकर्षित कर रहे हैं। विदेशी सैलानी यहां सुबह 6:00 बजे आना पसंद कर रहे हैं। क्योंकि यह वही समय है जब विभिन्न प्रजाति के पक्षी फीडिंग करना पसंद करते हैं। इस दृश्य को अपने कैमरे में उतारने के लिए पक्षी प्रेमी काफी आतुर रहते हैं।
राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में जो सुबह छह बजे आना चाहते हैं उन्हें विशेष अनुमति लेनी होती है। उद्यान के इंचार्ज व पक्षी विशेषज्ञ सुरेश ने बताया कि सुबह छह बजे उद्यान में आने के लिए रोजाना 10 लोगों को ही अनुमति मिलती है। उन्हें यह अनुमति मंडलीय वन्यजीव प्राणी अधिकारी की ओर से प्रदान किया जाता है। जिन्हें अनुमति दी जाती है उन्हें अपनी आईडी की फोटो कॉफी, पता और एक फोटो जमा करवाना होता है। विदेशी से उद्यान में प्रवेश के लिए 40 रुपये लिए जाते हैं। वहीं स्वदेशियों के लिए पांच रुपये का टिकट है।
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सुबह नौ बजे खुलता है उद्यान
राष्ट्रीय पक्षी उद्यान रोजाना सुबह 9:00 बजे खुलता है। कोई यहां शाम 4:30 बजे तक अपना समय व्यतीत कर सकता है। साढ़े चार के बाद झील कर्मी सभी को बाहर निकालना शुरू कर देते हैं।
उद्यान में 25 हजार विदेशी पक्षी
राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में इस समय 25 हजार विदेशी पक्षी मौजूद हैं। कई पक्षी ऐसे हैं जो पहली बार आए हैं। इसमें रेड रोजी पेलिकन और अल्ट्रा मेरिन के नाम प्रमुख हैं। सुबह-शाम पक्षियों के कलरव से पूरा वातावरण गूंज जाता है। वहीं 10 हजार भारतीय पक्षी भी झील में मौजूद हैं। आसपास के ग्रामीण इस नजारे को अपने लिए बड़ा अवसर मानते हैं।
पिकनिक और गंदगी पर देना होगा जुर्माना
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन अधिनियम 1972 के तहत राष्ट्रीय पक्षी उद्यान सुलतानपुर को नो पिकनिक जोन बना दिया गया है। अगर किसी ने यहां पर पिकनिक मनाया या किसी प्रकार की गंदगी फैलाई तो उसे उद्यान से बाहर निकाला दिया जाएगा या जुर्माना लगाया जाएगा। झील से अक्सर प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन, नमकीन के पैकेट और खाने की प्लेटें रोजाना बड़ी मात्रा में निकलती थीं। यह पक्षियों और पर्यावरण के लिए खतरा बन रही थीं।
इन विदेशी पक्षियों से है रौनक
सर्वियन क्रेन, ग्रेटर फ्लैमिंगो, रफ, ब्लैक-विंक्ड स्टिल्ट, कॉमन टील, कलहंस, पिंटेल, यलो वैग्टल, ब्लैक टेल गॉडविन, रोजी पेलिकन, अल्ट्रा मेरिन, स्टारलिंग, ब्लू थ्रोट, लांग बिल्ड पिपिट, ब्लू चेक्ड बी-ईटर व ब्लू बुल।
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फर्रूखनगर स्थित राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में मेहमान पक्षी सिर्फ आसपास के लोगों को ही नहीं बल्कि देश-विदेश के लोगों को भी आकर्षित कर रहे हैं। विदेशी सैलानी यहां सुबह 6:00 बजे आना पसंद कर रहे हैं। क्योंकि यह वही समय है जब विभिन्न प्रजाति के पक्षी फीडिंग करना पसंद करते हैं। इस दृश्य को अपने कैमरे में उतारने के लिए पक्षी प्रेमी काफी आतुर रहते हैं।
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राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में जो सुबह छह बजे आना चाहते हैं उन्हें विशेष अनुमति लेनी होती है। उद्यान के इंचार्ज व पक्षी विशेषज्ञ सुरेश ने बताया कि सुबह छह बजे उद्यान में आने के लिए रोजाना 10 लोगों को ही अनुमति मिलती है। उन्हें यह अनुमति मंडलीय वन्यजीव प्राणी अधिकारी की ओर से प्रदान किया जाता है। जिन्हें अनुमति दी जाती है उन्हें अपनी आईडी की फोटो कॉफी, पता और एक फोटो जमा करवाना होता है। विदेशी से उद्यान में प्रवेश के लिए 40 रुपये लिए जाते हैं। वहीं स्वदेशियों के लिए पांच रुपये का टिकट है।
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सुबह नौ बजे खुलता है उद्यान
राष्ट्रीय पक्षी उद्यान रोजाना सुबह 9:00 बजे खुलता है। कोई यहां शाम 4:30 बजे तक अपना समय व्यतीत कर सकता है। साढ़े चार के बाद झील कर्मी सभी को बाहर निकालना शुरू कर देते हैं।
उद्यान में 25 हजार विदेशी पक्षी
राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में इस समय 25 हजार विदेशी पक्षी मौजूद हैं। कई पक्षी ऐसे हैं जो पहली बार आए हैं। इसमें रेड रोजी पेलिकन और अल्ट्रा मेरिन के नाम प्रमुख हैं। सुबह-शाम पक्षियों के कलरव से पूरा वातावरण गूंज जाता है। वहीं 10 हजार भारतीय पक्षी भी झील में मौजूद हैं। आसपास के ग्रामीण इस नजारे को अपने लिए बड़ा अवसर मानते हैं।
पिकनिक और गंदगी पर देना होगा जुर्माना
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन अधिनियम 1972 के तहत राष्ट्रीय पक्षी उद्यान सुलतानपुर को नो पिकनिक जोन बना दिया गया है। अगर किसी ने यहां पर पिकनिक मनाया या किसी प्रकार की गंदगी फैलाई तो उसे उद्यान से बाहर निकाला दिया जाएगा या जुर्माना लगाया जाएगा। झील से अक्सर प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन, नमकीन के पैकेट और खाने की प्लेटें रोजाना बड़ी मात्रा में निकलती थीं। यह पक्षियों और पर्यावरण के लिए खतरा बन रही थीं।
इन विदेशी पक्षियों से है रौनक
सर्वियन क्रेन, ग्रेटर फ्लैमिंगो, रफ, ब्लैक-विंक्ड स्टिल्ट, कॉमन टील, कलहंस, पिंटेल, यलो वैग्टल, ब्लैक टेल गॉडविन, रोजी पेलिकन, अल्ट्रा मेरिन, स्टारलिंग, ब्लू थ्रोट, लांग बिल्ड पिपिट, ब्लू चेक्ड बी-ईटर व ब्लू बुल।