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नहरों का नवीनीकरण नहीं होने से साढ़े 31 करोड़ रुपये खर्च कर लगवाए नए पंप सेट बने सफेद हाथी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Apr 2022 11:39 PM IST
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White elephants made new pump sets by spending 31 and a half crore rupees due to non-renewal of canals
चरखी दादरी। जिले की नहरों का नवीनीकरण नहीं होने से एक तो जिलावासियों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा रहा है। ऊपर से उन नहरों में साढ़े 31 करोड़ रुपये खर्च कर लगवाए गए पंप सेट सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। इस समय जिले की जो नहरें हैं वे मांग के अनुरूप 1000 क्यूसेक पानी का दबाव झेलने की स्थिति में नहीं है। यही कारण है कि सिंचाई विभाग को हर टर्म पर 250 से 300 क्यूसेक पानी की कटौती करनी पड़ रही है। जिसका सीधे तौर पर असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा है।
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अधिकारियों का कहना है कि नहरों के नवीनीकरण के लिए कागजी प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने जिले की नहरी पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब डेढ़ साल पहले 31.53 करोड़ का बजट खर्च किया था। इतनी राशि खर्च करने के बाद पंप सेट और मोटरें तो अपग्रेड हो गईं, लेकिन इसके बाद भी नहरों में पानी का मात्रा नहीं बढ़ पाई। आलम यह है कि साढ़े 31 करोड़ खर्च करने के बाद जिले के लोग और धरती प्यासी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि पंप सिस्टम तो आधुनिक हैं, लेकिन नहरों का नवीनीकरण नहीं होने से हेड से ज्यादा मात्रा में पानी नहीं मंगवा रहे। जिले को गर्मियों में करीब एक हजार क्यूसेक पानी की जरूरत होती है, लेकिन नहरों के टूटने के अंदेशे पर 700 से 750 क्यूसेक पानी ही मंगवाया जा रहा है।
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डेढ़ साल पहले पूरा हुआ था नई पंप व मोटर लगाने का काम
जिले की नहरों के पंप हाउसों पर पंप व मोटरें 1970 के दशक में लगे थे, जिसकी उठान क्षमता कम थी। इसके बाद डेढ़ साल पहले लोहारु कैनाल, लोहारु फीडर व बधवाना नहरों के पंप व मोटरें नई लगाने का काम पूरा हो चुका है। इसके तहत घिकाड़ा पंप हाउस पर 26 मोटरें व पंप 35 क्यूसेक क्षमता के लगाए गए हैं। इसी प्रकार यहां दो पंप 20 क्यूसेक क्षमता के लगे हैं। इसी प्रकार पंप हाउस नंबर दो बरसाना के समीप 17 पंप 60 क्यूसेक क्षमता के और पांच पंप 30 क्यूसेक क्षमता के लगाए जा चुके हैं। बधवाना नहर पर भी पंप व मोटरें लगाने का काम पूरा हो चुका है।
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एक सेकंड में 35 क्यूसेक से अधिक पानी का उठान करते हैं नए पंप
आधुनिक तकनीक के ये पंप एक सेकंड में 35 से 60 क्यूसेक तक पानी का उठान करते हैं। कुछ पंप की क्षमता 60 क्यूसेक भी है तो कुछ की 35 क्यूसेक पानी उठान की क्षमता है। पुराने पंपों की क्षमता 15 से 17 क्यूसेक ही थी। इन पंप व मोटरों पर 31.53 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
नहरों से भरे जाते हैं सभी 58 जलघर
नहरों से ही जिले के सभी 58 जलघरों में पानी डाला जाता है। अधिकारियों का इसके पीछे तर्क है कि पंप सिस्टम तो नए लगा दिए गए, लेकिन नहरों का नवीनीकरण नहीं किया जा सका है। जब भी पीछे हेड से ज्यादा पानी मंगवा लिया जाता है, तो नहरें टूट जाती हैं। फरवरी में लोहारू कैनाल टूटने से गांव अचीना में 300 एकड़ में खड़ी फसल में पानी भर गया था।

नहरों पर नए पंप सिस्टम लगाए जा चुके हैं। ज्यादा पानी मंगवाने पर नहरों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। नहरों के नवीनीकरण के लिए कागजी प्रक्रिया चल रही है।
-सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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