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Charkhi Dadri News: जेल में गीले वस्त्र पहनाए जाते थे, समय पर नहीं मिलता था खाना
Thu, 14 Aug 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 14 Aug 2025 01:06 AM IST
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स्वतंत्रता सेनानी भाइयों को मिला ताम्रपत्र।
चरखी दादरी। गांव फतेहगढ़ निवासी स्वतंत्रता सेनानी सगे भाई जुगलाल व जगराम ने आजाद हिंद फौज में शामिल होकर अंग्रेजी हुकूमत को भारत देश को आजाद करने के लिए लाचार कर दिया। दोनों भाइयों ने पांच साल जेल में बिताए। जेल में उनको गीले वस्त्र पहनने को दिए जाते थे और गीली बोरी में डालकर यातनाएं दी जाती थीं। उनसे कोल्हू चलवाकर तेल निकलवाते थे और खाना समय पर नहीं दिया जाता था।
जुगलाल व जगराम बेगराज के पुत्र थे। जगराम का जन्म सात मार्च 1913 को हुआ था। जगराम से जुगलाल दो साल बड़ा था। 1931 में जगराम बरेली जाट रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। दो साल बाद जुगलाल भर्ती हुए थे। बाद में दोनों नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। नेताजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दो भाइयों ने अंग्रेजी सेना से लोहा लिया। अंग्रेजों की यातनाएं झेलते हुए उनका साहस नहीं टूटा और देश को आजाद करवाने में सफल हुए। उन्होंने बर्मा, सिंगापुर, कोहिमा में नेताजी के साथ आजादी की लड़ाई लड़ी।
जगराम के पौत्र सोमवीर ने बताया कि उनके दादा जुगलाल व जगराम छह साल बाद घर लौटे थे। परिजनों ने समझ लिया था कि वे जिंदा नहीं हैं। 1972 को इन स्वतंत्रता सेनानियों को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
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जगराम के 5 और जुगलाल के दो पुत्र
जगराम के पांच पुत्र हैं। जुगलाल के दो पुत्र व पुत्रियां हैं। जगराम दसवीं कक्षा पास थे। जगराम अंग्रेजी व उर्दू भाषाओं के जानकार थे। 24 जनवरी 1949 को जगराम सेना से घर लौटे थे। बाद में जगराम रेलवे पुलिस में भर्ती हुए। रेलवे से वे 1973 में रिटायर हो गए। जगराम का निधन 31 जनवरी 1991 को हुआ था।
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जुगलाल व जगराम बेगराज के पुत्र थे। जगराम का जन्म सात मार्च 1913 को हुआ था। जगराम से जुगलाल दो साल बड़ा था। 1931 में जगराम बरेली जाट रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। दो साल बाद जुगलाल भर्ती हुए थे। बाद में दोनों नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। नेताजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दो भाइयों ने अंग्रेजी सेना से लोहा लिया। अंग्रेजों की यातनाएं झेलते हुए उनका साहस नहीं टूटा और देश को आजाद करवाने में सफल हुए। उन्होंने बर्मा, सिंगापुर, कोहिमा में नेताजी के साथ आजादी की लड़ाई लड़ी।
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जगराम के पौत्र सोमवीर ने बताया कि उनके दादा जुगलाल व जगराम छह साल बाद घर लौटे थे। परिजनों ने समझ लिया था कि वे जिंदा नहीं हैं। 1972 को इन स्वतंत्रता सेनानियों को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
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जगराम के 5 और जुगलाल के दो पुत्र
जगराम के पांच पुत्र हैं। जुगलाल के दो पुत्र व पुत्रियां हैं। जगराम दसवीं कक्षा पास थे। जगराम अंग्रेजी व उर्दू भाषाओं के जानकार थे। 24 जनवरी 1949 को जगराम सेना से घर लौटे थे। बाद में जगराम रेलवे पुलिस में भर्ती हुए। रेलवे से वे 1973 में रिटायर हो गए। जगराम का निधन 31 जनवरी 1991 को हुआ था।