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Charkhi Dadri News: जंगली जानवरों के लिए की पानी की व्यवस्था
Tue, 10 Jun 2025 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 10 Jun 2025 12:46 AM IST
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कादमा में जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था दिखाते हुए ग्रामीण। संवाद :
संवाद न्यूज एजेंसी
कादमा। कादमा के युवा क्लब व ग्रामीणों ने सोमवार को पहाड़ी क्षेत्र में जंगली जानवरों के लिए गर्मी के मौसम में पीने के पानी की व्यवस्था की। ग्रामीणों ने जन सहयोग से पहाड़ी क्षेत्र में एक तालाब का निर्माण करवाया है। ताकि, जंगली जानवर गर्मी में पानी पीकर अपनी प्यास बुझा सकेंगे।
कादमा गांव अरावली पर्वत क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पहाड़ी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवरों का बसेरा है। अधिकतर सियार, लोमड़ी, जंगली सूअर, हिरण व नीलगाय हैं। ग्रामीणों ने पहाड़ी क्षेत्र में जंगली जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था के साथ-साथ वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किया है। इस बरसात में गांव के ग्रामीणों ने अधिक से अधिक मात्रा में पेड़-पौधे लगाने का भी संकल्प लिया।
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि पहाड़ी क्षेत्र में जगह-जगह तालाबों का निर्माण करवाया जाए और वन विभाग के माध्यम से बरसात के मौसम में पौधरोपण करवाया जाए। ताकि, संसार की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखला अरावली को बचाया जा सके।
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ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए अरावली ग्रीन वॉल अभियान चलाया है। इसे भी ग्रामीणों के सहयोग से जल्द लागू किया जाए। इस दौरान अशोक, महेश, कर्ण सिंह, रणवीर सिंह, इंद्र सिंह, विकास कलकल, सतबीर सिंह, प्रतीक, रामफल, अनूप सोनी समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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कादमा। कादमा के युवा क्लब व ग्रामीणों ने सोमवार को पहाड़ी क्षेत्र में जंगली जानवरों के लिए गर्मी के मौसम में पीने के पानी की व्यवस्था की। ग्रामीणों ने जन सहयोग से पहाड़ी क्षेत्र में एक तालाब का निर्माण करवाया है। ताकि, जंगली जानवर गर्मी में पानी पीकर अपनी प्यास बुझा सकेंगे।
कादमा गांव अरावली पर्वत क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पहाड़ी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवरों का बसेरा है। अधिकतर सियार, लोमड़ी, जंगली सूअर, हिरण व नीलगाय हैं। ग्रामीणों ने पहाड़ी क्षेत्र में जंगली जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था के साथ-साथ वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किया है। इस बरसात में गांव के ग्रामीणों ने अधिक से अधिक मात्रा में पेड़-पौधे लगाने का भी संकल्प लिया।
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ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि पहाड़ी क्षेत्र में जगह-जगह तालाबों का निर्माण करवाया जाए और वन विभाग के माध्यम से बरसात के मौसम में पौधरोपण करवाया जाए। ताकि, संसार की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखला अरावली को बचाया जा सके।
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ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए अरावली ग्रीन वॉल अभियान चलाया है। इसे भी ग्रामीणों के सहयोग से जल्द लागू किया जाए। इस दौरान अशोक, महेश, कर्ण सिंह, रणवीर सिंह, इंद्र सिंह, विकास कलकल, सतबीर सिंह, प्रतीक, रामफल, अनूप सोनी समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।