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Charkhi Dadri News: शहर को जलभराव से बचाने के लिए सीसीआई परिसर में फिर शुरू की गई पानी की निकासी
Fri, 30 Jun 2023 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 30 Jun 2023 11:23 PM IST
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सीसीआई परिसर में निकाला जा रहा शहर का पानी।
चरखी दादरी। मानसून की पहली ही बारिश ने शहर में जनस्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और सरकार की किरकरी करवा दी। ऐसा होना लाजिमी भी है, क्योंकि तीनों ही इसके जिम्मेदार हैं। जिला अधिकारी और जनप्रतिनिधि समय रहते शहर की सीवर संबंधी परियोजनाओं को स्वीकृति नहीं दिला पाए और यही कारण रहा कि रविवार को हुई 80 एमएम बारिश भी शहर नहीं झेल पाया। आलम ये है कि छठे दिन भी पुरानी सब्जी मंडी रोड पर घुटनों तक पानी भरा है। प्रशासन मोटर और पंप सेट के जरिये पानी की निकासी तो करवा रहा है, लेकिन शहर जल चक्रवात के भंवर में फंसा है। मतलब शहर के पानी को शहर में ही स्थित सीसीआई और अन्य खाली जगहों पर डाला जा रहा है।
दरअसल, सीवर परियोजनाओं पर समय रहते गंभीरता से काम करने की दरकार थी। लेकिन हर स्तर पर ढिलाई बरती गई। फिर चाहे अफसर हो या जनप्रतिनिधि और सरकार, हर कोई इस मोर्चे पर विफल रहा। जनस्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी फाइल ऊपर भेजते रहे जबकि उच्चाधिकारी ऑब्जेक्शन लगाकर इन्हें लटकाते रहे। जनप्रतिनिधि भी इन अफसरों के इस रवैये का तोड़ नहीं निकाल पाए। अब वो जलभराव से त्रस्त लोगों के बीच आकर अपना पल्ला झाड़ते हुए अधिकारियों पर ही दोष मढ़ रहे हैं।
बता दें कि रविवार की बारिश के बाद शहर के बाजारों में खबर लिखे जाने तक जलभराव है। इस स्थिति के 5वें दिन यानि वीरवार को सरकार ने करीब साढ़े चालीस करोड़ की सीवर परियोजना का बजट मंजूर किया है। अगर यह स्वीकृति 6 माह पहले दी जाती और अधिकारियों के मनमाने रवैये पर नकेल कसकर फाइल को मुख्यालय से मंजूरी दिलाई जाती तो शायद शहर में 1995 की बाढ़ जैसे हालात नहीं बनते। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से बार-बार फाइल पर ऑब्जेक्शन लगाने से न ठप सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट वर्किंग में आ पाया और न ही शहर में क्षतिग्रस्त व धंसी सीवर की मुख्य लाइनें बदली जा सकीं। तमाम स्तर पर हुई देरी के चलते शहर की जनता परेशान है और अब अधिकारियों और सरकार के नुमाइंदों को कोस रही है।
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- विपक्ष को हाथ लगा बड़ा मुद्दा, नेता अब लोगों के बीच
शहर में जलभराव होने से विपक्ष को बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। जब भी व्यापारी धरना देते हैं विपक्षी पार्टियों के नेता वहां जरूर पहुंचते हैं। दो दिन पहले आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने तो मौके को भुनाते हुए बारिश के पानी में बैठकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया था। वहीं, व्यापारियों के बीच पहुंचे नेता एक-दूसरे के मुंह पर ही छींटाकशी कर अपना स्वार्थ साधने में लगे हैं।
- विभाग की ओर से बरती गई ढिलाई से प्रशासन लाचार, सीएम के आदेश तक करने पड़ दरकिनार
जनस्वास्थ्य विभाग ने समय रहते अपने संसाधनों को दुरुस्त नहीं किया जबकि सीवर संबंधी परियोजनाओं के फॉलोअप में भी ढिलाई बरती। यही कारण रहा कि मानसून आ गया लेकिन व्यवस्थाएं चौपट रहीं। जनस्वास्थ्य विभाग की ढिलाई ने प्रशासन को लाचार कर दिया क्योंकि शहर से बाहर पानी निकासी और उसके निस्तारण का कोई विकल्प नहीं है। प्रशासन को मजबूरीवश पानी सीसीआई परिसर में निकलवाना पड़ रहा है। जबकि गत मार्च माह में मुख्यमंत्री सीसीआई परिसर में पानी की निकासी बंद करने के आदेश दे चुके हैं। यहां भरे पानी में डूबने से एक युवक की मौत भी हो चुकी है। उस दौरान लोगों के बीच पहुंचकर उपायुक्त प्रीति ने सीसीआई परिसर में पानी निकासी बंद करने का आश्वासन दिया था। अब शहर को डूबने से बचाने के लिए प्रशासन को अपने फैसले पर यू-टर्न लेना पड़ रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग का एसई जनस्वास्थ्य विभाग की फाइलों पर ऑब्जेक्शन लगाता रहा, जिसकी वजह से परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में देरी हुई। साढ़े 22 इंची पाइपलाइन बिछाने की परियोजना पर तीन माह में काम पूरा होना था, लेकिन लोगों की परेशानियों को देखते हुए 10 दिन में यह काम करवाया जाएगा। जल्द ही पानी की निकासी हो जाएगी।
-सोमबीर सांगवान, विधायक, चरखी दादरी
अधिकारियों और सरकार का उदासीन रवैया मानसून में व्यापारियों, दुकानदारों और शहरवासियों पर भारी पड़ा। अफसरों को पता था कि बारिश होने पर शहर डूबेगा, लेकिन कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए। अब नतीजा सबके सामने है। व्यापारियों को जलभराव से मोटा नुकसान हुआ है।
रविंद्र गुप्ता, संरक्षक, नगर व्यापार मंडल
शहर की लचर सीवर व्यवस्था के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को 20 से अधिक पत्र लिख चुका है। किसी ने दादरी शहर की तरफ ध्यान नहीं दिया और राम ही शहर की रखवाला है। जनता भारी परेशान है और जलभराव से विभाग व प्रशासन की नाकामी उजागर हुई है।
सतपाल सांगवान, पूर्व मंत्री
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दरअसल, सीवर परियोजनाओं पर समय रहते गंभीरता से काम करने की दरकार थी। लेकिन हर स्तर पर ढिलाई बरती गई। फिर चाहे अफसर हो या जनप्रतिनिधि और सरकार, हर कोई इस मोर्चे पर विफल रहा। जनस्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी फाइल ऊपर भेजते रहे जबकि उच्चाधिकारी ऑब्जेक्शन लगाकर इन्हें लटकाते रहे। जनप्रतिनिधि भी इन अफसरों के इस रवैये का तोड़ नहीं निकाल पाए। अब वो जलभराव से त्रस्त लोगों के बीच आकर अपना पल्ला झाड़ते हुए अधिकारियों पर ही दोष मढ़ रहे हैं।
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बता दें कि रविवार की बारिश के बाद शहर के बाजारों में खबर लिखे जाने तक जलभराव है। इस स्थिति के 5वें दिन यानि वीरवार को सरकार ने करीब साढ़े चालीस करोड़ की सीवर परियोजना का बजट मंजूर किया है। अगर यह स्वीकृति 6 माह पहले दी जाती और अधिकारियों के मनमाने रवैये पर नकेल कसकर फाइल को मुख्यालय से मंजूरी दिलाई जाती तो शायद शहर में 1995 की बाढ़ जैसे हालात नहीं बनते। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से बार-बार फाइल पर ऑब्जेक्शन लगाने से न ठप सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट वर्किंग में आ पाया और न ही शहर में क्षतिग्रस्त व धंसी सीवर की मुख्य लाइनें बदली जा सकीं। तमाम स्तर पर हुई देरी के चलते शहर की जनता परेशान है और अब अधिकारियों और सरकार के नुमाइंदों को कोस रही है।
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- विपक्ष को हाथ लगा बड़ा मुद्दा, नेता अब लोगों के बीच
शहर में जलभराव होने से विपक्ष को बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। जब भी व्यापारी धरना देते हैं विपक्षी पार्टियों के नेता वहां जरूर पहुंचते हैं। दो दिन पहले आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने तो मौके को भुनाते हुए बारिश के पानी में बैठकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया था। वहीं, व्यापारियों के बीच पहुंचे नेता एक-दूसरे के मुंह पर ही छींटाकशी कर अपना स्वार्थ साधने में लगे हैं।
- विभाग की ओर से बरती गई ढिलाई से प्रशासन लाचार, सीएम के आदेश तक करने पड़ दरकिनार
जनस्वास्थ्य विभाग ने समय रहते अपने संसाधनों को दुरुस्त नहीं किया जबकि सीवर संबंधी परियोजनाओं के फॉलोअप में भी ढिलाई बरती। यही कारण रहा कि मानसून आ गया लेकिन व्यवस्थाएं चौपट रहीं। जनस्वास्थ्य विभाग की ढिलाई ने प्रशासन को लाचार कर दिया क्योंकि शहर से बाहर पानी निकासी और उसके निस्तारण का कोई विकल्प नहीं है। प्रशासन को मजबूरीवश पानी सीसीआई परिसर में निकलवाना पड़ रहा है। जबकि गत मार्च माह में मुख्यमंत्री सीसीआई परिसर में पानी की निकासी बंद करने के आदेश दे चुके हैं। यहां भरे पानी में डूबने से एक युवक की मौत भी हो चुकी है। उस दौरान लोगों के बीच पहुंचकर उपायुक्त प्रीति ने सीसीआई परिसर में पानी निकासी बंद करने का आश्वासन दिया था। अब शहर को डूबने से बचाने के लिए प्रशासन को अपने फैसले पर यू-टर्न लेना पड़ रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग का एसई जनस्वास्थ्य विभाग की फाइलों पर ऑब्जेक्शन लगाता रहा, जिसकी वजह से परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में देरी हुई। साढ़े 22 इंची पाइपलाइन बिछाने की परियोजना पर तीन माह में काम पूरा होना था, लेकिन लोगों की परेशानियों को देखते हुए 10 दिन में यह काम करवाया जाएगा। जल्द ही पानी की निकासी हो जाएगी।
-सोमबीर सांगवान, विधायक, चरखी दादरी
अधिकारियों और सरकार का उदासीन रवैया मानसून में व्यापारियों, दुकानदारों और शहरवासियों पर भारी पड़ा। अफसरों को पता था कि बारिश होने पर शहर डूबेगा, लेकिन कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए। अब नतीजा सबके सामने है। व्यापारियों को जलभराव से मोटा नुकसान हुआ है।
रविंद्र गुप्ता, संरक्षक, नगर व्यापार मंडल
शहर की लचर सीवर व्यवस्था के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को 20 से अधिक पत्र लिख चुका है। किसी ने दादरी शहर की तरफ ध्यान नहीं दिया और राम ही शहर की रखवाला है। जनता भारी परेशान है और जलभराव से विभाग व प्रशासन की नाकामी उजागर हुई है।
सतपाल सांगवान, पूर्व मंत्री