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Charkhi Dadri News: तीन एमएम बारिश से गेहूं, सरसों सहित रबी की सभी फसलों को पहुंचा फायदा
Thu, 19 Feb 2026 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 19 Feb 2026 12:47 AM IST
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गांव बेरला के खेत में खड़ी गेहूं की फसल।
चरखी दादरी। क्षेत्र में मंगलवार देर रात और बुधवार को बूंदाबांदी हुई। करीब तीन एमएम बारिश से खासकर गेहूं की फसल में फायदा पहुंचा है। सरसों, जौ, चना, मेथी आदि की फसलों में इससे फायदा पहुंचा है। जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं व 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की फसल है। जौ का रकबा करीब तीन हजार एकड़ है। जिले में रबी सीजन में गेहूं व सरसों की फसलों की ही ज्यादा खेती होती है।
बता दें कि दादरी जिले का 55 प्रतिशत क्षेत्र रेतीला भी है। रेतीले क्षेत्र में फसलों में सिंचाई की बार-बार जरूरत होती है। रेतीले भागों में बिजली चालित नलकूप से सिंचाई की जाती है जिससे बिजली की खासी खपत होती है। यहां गेहूं में चार से पांच सिंचाई करनी पड़ती है जबकि तराई युक्त भागों में दो से तीन सिंचाई में फसल पककर तैयार हो जाती है। ऐसे में रेतीले भागों में किसानों पर प्रति एकड़ लागत खर्च भी ज्यादा आता है।
जिले में मौजूदा रबी सीजन में 31 दिसंबर को दादरी खंड में 4 व बाढड़ा खंड में 14 एमएम बारिश हुई थी जिससे फसलों को फायदा पहुंचा। उसके बाद 22 व 23 जनवरी को दादरी में 4, बाढड़ा में पांच व बौंद कलां खंड में 3 एमएम बारिश हुई थी, इस बारिश से भी फसलों में फायदा हुआ था। इस दौरान करीब 10 गांवों में ओलावृष्टि भी हुई थी।
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बुधवार को क्षेत्र में करीब तीन एमएम बारिश हुई है, इससे भी फसलों में फायदा पहुंचा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है बूंदाबांदी एवं हल्की बारिश से फसलों में छोटे स्तर के रोग भी खत्म होते हैं। सरसों तो अब पकाव की अवस्था में है ऐसे में बूंदाबांदी से दाना का पकाव और बढि़या हो सकेगा। बारिश के पानी में तो प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं जो फसल के लिए खुराक का काम करते हैं।
किसान नरेश फोगाट, चंद्र सिंह, रमेश कुमार व भीम सिंह का कहना है कि बारिश से फसलों में फायदा हुआ है। किसानों का कहना है कि इस मौसम में ओलावृष्टि होने का ज्यादा डर बना रहता है। अगर सही ढंग से बारिश होती है तो फसलों में फायदा पहुंचता है।
किसान बोले
दिन के समय तापमान ज्यादा हो गया था, जिसके कारण फसलों में नुकसान की संभावना थी। ऐसे में किसानों को सिंचाई का सहारा लेना पड़ रहा था। अब बारिश के कारण तापमान कम हुआ है, जिससे फसलों को फायदा होगा। अब आगामी दिनों में बारिश न हो तो फसलों के बेहतर पैदावार की संभावना है।
- किसान उमराव सिंह, गांव बेरला।
बारिश के कारण फसलों में सिंचाई की आपूर्ति हो गई है। क्षेत्र में ओलावृष्टि नहीं हुई है, अब तक फसलों हालत काफी अच्छी बनी हुई है। बारिश के बाद किसानों के चेहरे पर रौनक आई है। सिंचाई में लगने वाली बिजली व समय की बचत हुई है।
- किसान संदीप मोठसरा, गांव कान्हड़ा।
सरसों की फसल पकाव की अवस्था में है, ऐसे में बूंदाबांदी से फायदा पहुंचा है। गेहूं, जौ व चना की खेती में फायदा पहुंचा है। बूंदाबांदी से फसलों में छोटे स्तर के रोग भी दूर हो जाते हैं।
-एसडीओ कृष्ण कुमार, कृषि विभाग, दादरी।
बूंदाबांदी के बाद पांच डिग्री तक कम हुआ अधिकतम तापमान
चरखी दादरी। जिले में करीब तीन एमएम बारिश के बाद मौसम में 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को जहां तापमान अधिकतम 28 डिग्री और न्यूनतम पारा 14 डिग्री पर पहुंच गया था। वहीं बुधवार को अधिकतम तापमान 23 व न्यूनतम पारा 12 डिग्री पर आ गया। तापमान घटने के कारण दिनभर हल्की ठंड का अहसास हुआ। दिनभर बादलवाही छाई रही। पिछले कुछ दिनों से दिनभर तेज धूप निकलने और मंगलवार देर रात व बुधवार को बूंदाबांदी के बाद बढ़ी ठंड का लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में बुधवार को एक हजार से अधिक मरीज उपचार करवाने पहुंचे। अधिकांश मरीज खांसी, जुकाम, गले में खराश और बुखार से ग्रस्त थे।
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बता दें कि दादरी जिले का 55 प्रतिशत क्षेत्र रेतीला भी है। रेतीले क्षेत्र में फसलों में सिंचाई की बार-बार जरूरत होती है। रेतीले भागों में बिजली चालित नलकूप से सिंचाई की जाती है जिससे बिजली की खासी खपत होती है। यहां गेहूं में चार से पांच सिंचाई करनी पड़ती है जबकि तराई युक्त भागों में दो से तीन सिंचाई में फसल पककर तैयार हो जाती है। ऐसे में रेतीले भागों में किसानों पर प्रति एकड़ लागत खर्च भी ज्यादा आता है।
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जिले में मौजूदा रबी सीजन में 31 दिसंबर को दादरी खंड में 4 व बाढड़ा खंड में 14 एमएम बारिश हुई थी जिससे फसलों को फायदा पहुंचा। उसके बाद 22 व 23 जनवरी को दादरी में 4, बाढड़ा में पांच व बौंद कलां खंड में 3 एमएम बारिश हुई थी, इस बारिश से भी फसलों में फायदा हुआ था। इस दौरान करीब 10 गांवों में ओलावृष्टि भी हुई थी।
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बुधवार को क्षेत्र में करीब तीन एमएम बारिश हुई है, इससे भी फसलों में फायदा पहुंचा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है बूंदाबांदी एवं हल्की बारिश से फसलों में छोटे स्तर के रोग भी खत्म होते हैं। सरसों तो अब पकाव की अवस्था में है ऐसे में बूंदाबांदी से दाना का पकाव और बढि़या हो सकेगा। बारिश के पानी में तो प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं जो फसल के लिए खुराक का काम करते हैं।
किसान नरेश फोगाट, चंद्र सिंह, रमेश कुमार व भीम सिंह का कहना है कि बारिश से फसलों में फायदा हुआ है। किसानों का कहना है कि इस मौसम में ओलावृष्टि होने का ज्यादा डर बना रहता है। अगर सही ढंग से बारिश होती है तो फसलों में फायदा पहुंचता है।
किसान बोले
दिन के समय तापमान ज्यादा हो गया था, जिसके कारण फसलों में नुकसान की संभावना थी। ऐसे में किसानों को सिंचाई का सहारा लेना पड़ रहा था। अब बारिश के कारण तापमान कम हुआ है, जिससे फसलों को फायदा होगा। अब आगामी दिनों में बारिश न हो तो फसलों के बेहतर पैदावार की संभावना है।
- किसान उमराव सिंह, गांव बेरला।
बारिश के कारण फसलों में सिंचाई की आपूर्ति हो गई है। क्षेत्र में ओलावृष्टि नहीं हुई है, अब तक फसलों हालत काफी अच्छी बनी हुई है। बारिश के बाद किसानों के चेहरे पर रौनक आई है। सिंचाई में लगने वाली बिजली व समय की बचत हुई है।
- किसान संदीप मोठसरा, गांव कान्हड़ा।
सरसों की फसल पकाव की अवस्था में है, ऐसे में बूंदाबांदी से फायदा पहुंचा है। गेहूं, जौ व चना की खेती में फायदा पहुंचा है। बूंदाबांदी से फसलों में छोटे स्तर के रोग भी दूर हो जाते हैं।
-एसडीओ कृष्ण कुमार, कृषि विभाग, दादरी।
बूंदाबांदी के बाद पांच डिग्री तक कम हुआ अधिकतम तापमान
चरखी दादरी। जिले में करीब तीन एमएम बारिश के बाद मौसम में 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को जहां तापमान अधिकतम 28 डिग्री और न्यूनतम पारा 14 डिग्री पर पहुंच गया था। वहीं बुधवार को अधिकतम तापमान 23 व न्यूनतम पारा 12 डिग्री पर आ गया। तापमान घटने के कारण दिनभर हल्की ठंड का अहसास हुआ। दिनभर बादलवाही छाई रही। पिछले कुछ दिनों से दिनभर तेज धूप निकलने और मंगलवार देर रात व बुधवार को बूंदाबांदी के बाद बढ़ी ठंड का लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में बुधवार को एक हजार से अधिक मरीज उपचार करवाने पहुंचे। अधिकांश मरीज खांसी, जुकाम, गले में खराश और बुखार से ग्रस्त थे।