{"_id":"65661f4135496bbb70009df7","slug":"three-generations-of-the-family-drank-milk-after-the-death-feast-the-owner-returned-the-buffalos-interest-charkhidadri-news-c-126-1-cdr1001-9941-2023-11-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri: परिवार की तीन पीढ़ियों ने पीया दूध, मृत्युभोज कर मालिक ने भैंस का लौटाया सूद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri: परिवार की तीन पीढ़ियों ने पीया दूध, मृत्युभोज कर मालिक ने भैंस का लौटाया सूद
Wed, 29 Nov 2023 04:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
हनी सोनी, चरखी दादरी (हरियाणा)
हनी सोनी, चरखी दादरी (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Nov 2023 04:25 PM IST
सार
चरखी गांव निवासी पशुपालक सुखबीर का अपने पशु के प्रति इस तरह का अनोखा प्रेम चर्चा का विषय बना है। दरअसल, राजबीर ने बताया कि उनके पिता रिसाल सिंह के समय यह भैंस उनके घर जन्मी थी। अब करीब 29 साल बाद भैंस मर गई।
विज्ञापन
चरखी गांव में पशुपालक द्वारा मृत भैंस की फोटो पर चढ़ाई गई माला।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
परिवार के किसी बुजुर्ग सदस्य की तरह एक पशुपालक ने अपनी भैंस का मरने के उपरांत काज (मृत्युभोज) किया है। पशुपालक सुखबीर का कहना है कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियों ने इस भैंस का दूध पीया है और इसके घर आने के बाद से ही परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई। भैंस का काज करने का यह अनोखा मामला चरखी दादरी जिले के चरखी गांव का है।
विज्ञापन
चरखी गांव निवासी पशुपालक सुखबीर का अपने पशु के प्रति इस तरह का अनोखा प्रेम चर्चा का विषय बना है। दरअसल, सुखबीर ने बताया कि उनके पिता रिसाल सिंह के समय यह भैंस उनके घर जन्मी थी। अब करीब 29 साल बाद भैंस मर गई। ये भैंस उनके परिवार के लिए शुभ थी और वे इसे परिवार का सदस्य ही समझते थे। राजबीर के अनुसार भैंस ने परिवार को मालामाल कर दिया और अब उसके दम तोड़ने के बाद परिवार ने काज कर उसका सूद चुकाया है।
विज्ञापन
24 ब्यांत में सभी कटिया जन्मीं
पशुपालक सुखबीर ने बताया कि उनकी भैंस की 24 ब्यांत हुईं और सभी में कटिया को ही जन्म दिया। भैंस की ज्यादातर कटिया उन्होंने पालीं। खास बात ये है कि आज भी इस भैंस की सभी कटिया चरखी गांव में ही अलग-अलग पशुपालकों के पास हैं।
विज्ञापन
टेंट के प्रवेश द्वार पर रखी भैंस की फोटो
पशुपालक ने मृत्युभोज कार्यक्रम में सभी रिश्तेदारों, बहन-बेटियों और ग्रामीणों को बुलाया। टेंट में प्रवेश करते ही भैंस की माला डाली हुई एक फोटो रखी गई। इसके बाद भोजन की स्टालें लगवाई गई। इन तमाम व्यवस्थाओं से राजबीर के परिवार का भैंस के प्रति लगाव पता चलता है।
ये बनवाए पकवान
भैंस के मृत्युभोज कार्यक्रम में राजबीर ने लड्डू, जलेबी, गुलाब जामुन, गोल-गप्पे, पूरी-सब्जी, सलाद और रायता आदि खाद्य पदार्थ तैयार करवाए।