फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Those who served Karsevaks were poor in money and rich in heart...

Charkhi Dadri News: धन से गरीब और दिल के अमीर थे कारसेवकों की सेवा करने वाले...

Sat, 20 Jan 2024 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 20 Jan 2024 12:28 AM IST
विज्ञापन
Those who served Karsevaks were poor in money and rich in heart...
 सुरेश।
चरखी दादरी। जिले से वर्ष 1990 व 1992 में अयोध्या गए कारसेवकों ने शुक्रवार को अपने उस समय के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे पल तो ऐतिहासिक हैं और हमारे लिए आजीवन अविस्मरणीय रहेंगे। कारसेवक सुरेश, विरेंद्र, जगदीश लाल जुनेजा और वरुण सिंह ने बताया कि आंदोलन के समय वहां स्थानीय लोगों ने कारसेवकों की खूब सेवा की। वे स्वयं गरीब तबके से थे, फिर भी कारसेवकों के लिए भोजन की व्यवस्था जरूर करते थे। यहां तक पानी के साथ चने, पताशे और मखाने आदि भी देते थे। वे धन से जरूर गरीब थे, लेकिन दिल के बड़े अमीर थे।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल आस्था का ही नहीं हिंदुत्व का स्वाभिमान भी है। उन्होंने बताया कि बताया कि उस समय कुछ लोग आस्था के वशीभूत होकर अयोध्या पहुंचे थे और कुछ लोग स्वाभिमान बचाने के लिए आंदोलन कर रहे थे।
विज्ञापन




सरयू के किनारे भूखे रहकर बिताए थे तीन दिन

1990 में अयोध्या के लिए रवाना हुआ था। सरयू नदी के किनारे पर जब पहुंचे तो पुलिस ने वहां रोक लिया और उससे आगे नहीं बढ़ पाए। भूखे रहकर वहीं तीन दिन बिताए और रातें पराली व कंबल में काटी। बाद में वहां से वापस आ गए। अब 9 फरवरी को राम दर्शन करूंगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

-सुरेश कुमार, कारसेवक





ग्रामीणों का भरपूर मिला सहयोग

चारों आंदोलनों में शामिल हुआ था। जब भी गया ग्रामीणों ने भरपूर सेवा की। पानी के साथ भी खाने की चीजें देते थे। साल 1990 में रास्ते में जाते समय दूसरे संप्रदाय के लोगों ने डंडों से गाड़ी पर धावा बोला था और इसमें गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। बाद में धीरे-धीरे दादरी तक पहुंचे। हमारे उस संघर्ष का फल अब मिलने जा रहा है।

-विरेंद्र सिंह, कारसेवक




पुलिस ने किया गिरफ्तार, नहीं पहुंच पाए अयोध्या

वर्ष 1992 में अयोध्या गया था। उस समय जब पहुंचा तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और मंदिर तक नहीं पहुंच पाए। दो दिन जेल में बंद रहा। अब मुझे बहुत खुशी है कि मैं उस समय भगवान के लिए इस कार्य में शामिल रहा। अब भगवान की मर्जी से ही जा पाऊंगा।


-जगदीश जुनेजा, कारसेवक




स्वाभिमान के लिए पहुंचा था अयोध्या
अयोध्या भगवान में आस्था के साथ ही हिंदुत्व के स्वाभिमान के लिए गया था। अगर वह मकबरा नहीं हटता तो हिंदू समाज को दासता की वह निशानी हमेशा सताती। उसके टूटने से ही आज देश का स्वाभिमान ऊंचा उठा है। मुझे खुशी है कि उस समाज की उस विषमता को मैंने अपने हाथों से तोड़ा। अब 9 फरवरी को राम मंदिर में जाऊंगा।
-वरुण मित्तल, कारसेवक


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed