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Charkhi Dadri News: तीन माह से बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली, तैनाती का इंतजार हो रहा लंबा
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। परिवर्तनशील मौसम के चलते बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, जबकि सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ ही तैनात नहीं है। विशेषज्ञ का पद करीब तीन माह से खाली है। अभिभावकों को निजी अस्पताल ही बच्चों का उपचार करवाकर जेब ढीली करनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि इस संबंध में डिमांड मुख्यालय भेजी जा चुकी है।
बता दें कि नागरिक अस्पताल में 28 साल बाद मई 2023 में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी। करीब पांच माह तक जिले में बाल रोग विशेषज्ञ ने सेवाएं दीं और तीन माह पहले ही उनका तबादला हो गया। इसके बाद सरकार ने महिला बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में पिछले तीन माह से ये पद खाली है।
शहर में मुख्य पांच निजी अस्पतालों में छोटे बच्चों का उपचार होता है। सूत्रों की मानें तो एक अस्पताल की दैनिक ओपीडी औसतन 40 रहती है और प्रति बच्चा ओपीडी फीस 150 से 170 रुपये निर्धारित है। इस दौरान कम से कम 200 रुपये की दवा भी दी जाती है। इस लिहाज से एक बार उपचार पर करीब 350 रुपये खर्च आता है। इस लिहाज से उपचार के लिए प्रति माह वहां बच्चों के अभिभावकों को करीबन 21 लाख रुपये चुकाने होते हैं।
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- 50 से अधिक रहती थी दैनिक ओपीडी
सिविल अस्पताल में जब बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी तब बच्चों की दैनिक ओपीडी करीब 50 रहती थी। अब विशेषज्ञ न होने के चलते आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता बच्चे के मुफ्त उपचार के लिए रोहतक पीजीआई और भिवानी की भागदौड़ करने को विवश हैं।
वर्जन
बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग हेड ऑफिस भेज चुके हैं। विशेषज्ञ की तैनाती मुख्यालय की ओर से ही की जानी है। तैनाती होते ही सिविल अस्पताल में बच्चों के उपचार की बेहतर सुविधा मिलने लगेगी। जल्द ही विशेषज्ञ की तैनाती होने की उम्मीद है। -डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। परिवर्तनशील मौसम के चलते बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, जबकि सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ ही तैनात नहीं है। विशेषज्ञ का पद करीब तीन माह से खाली है। अभिभावकों को निजी अस्पताल ही बच्चों का उपचार करवाकर जेब ढीली करनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि इस संबंध में डिमांड मुख्यालय भेजी जा चुकी है।
बता दें कि नागरिक अस्पताल में 28 साल बाद मई 2023 में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी। करीब पांच माह तक जिले में बाल रोग विशेषज्ञ ने सेवाएं दीं और तीन माह पहले ही उनका तबादला हो गया। इसके बाद सरकार ने महिला बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में पिछले तीन माह से ये पद खाली है।
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शहर में मुख्य पांच निजी अस्पतालों में छोटे बच्चों का उपचार होता है। सूत्रों की मानें तो एक अस्पताल की दैनिक ओपीडी औसतन 40 रहती है और प्रति बच्चा ओपीडी फीस 150 से 170 रुपये निर्धारित है। इस दौरान कम से कम 200 रुपये की दवा भी दी जाती है। इस लिहाज से एक बार उपचार पर करीब 350 रुपये खर्च आता है। इस लिहाज से उपचार के लिए प्रति माह वहां बच्चों के अभिभावकों को करीबन 21 लाख रुपये चुकाने होते हैं।
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- 50 से अधिक रहती थी दैनिक ओपीडी
सिविल अस्पताल में जब बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी तब बच्चों की दैनिक ओपीडी करीब 50 रहती थी। अब विशेषज्ञ न होने के चलते आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता बच्चे के मुफ्त उपचार के लिए रोहतक पीजीआई और भिवानी की भागदौड़ करने को विवश हैं।
वर्जन
बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग हेड ऑफिस भेज चुके हैं। विशेषज्ञ की तैनाती मुख्यालय की ओर से ही की जानी है। तैनाती होते ही सिविल अस्पताल में बच्चों के उपचार की बेहतर सुविधा मिलने लगेगी। जल्द ही विशेषज्ञ की तैनाती होने की उम्मीद है। -डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी