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कोरोना से पढ़ाई की क्षति की भरपाई के लिए तैयार विद्यार्थी-शिक्षक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 12:06 AM IST
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Student-teachers ready to compensate for the loss of studies from Corona
शहीद दलबीर सिंह मॉडल संस्कृति स्कूल में कक्षा में पढ़ाई करते विद्यार्थी। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। कोरोना की तीनों लहरों में पढ़ाई की हुई क्षति की भरपाई के लिए विद्यार्थी और शिक्षक अब तैयार हैं। तीसरी लहर का प्रकोप बिल्कुल कम हो चुका है और शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाई भी अब पटरी पर लौटने लगी है। ऑफलाइन पढ़ाई में जहां उपस्थित 45 से 50 फीसदी रहती थी, तो वहीं ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने से 95 प्रतिशत विद्यार्थी कक्षा में उपस्थित हो रहे हैं। इस साल एकमात्र बदलाव यह आया है कि सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का रुझान फिर से निजी स्कूलों की ओर हो गया है।
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ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने से कक्षा में उपस्थित होने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। स्कूल खुलने के बाद पिछले साल के मुकाबले इस साल उपस्थिति दर अधिक है। इतना ही नहीं शिक्षक और विद्यार्थी लॉकडाउन के दौरान बार-बार स्कूल बंद होने से हुए नुकसान से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं। हालांकि बच्चों में सीखने की जिज्ञासा बढ़ाना भी शिक्षकों के लिए चुनौती से कम नहीं है और इस पहलू को देखते हुए शिक्षक भी अब आधुनिक शिक्षा पद्धति का सहारा ले रहे हैं, ताकि संबंधित विषय से क्लासरूम में उपस्थित विद्यार्थी को आसानी से जोड़ा जा सके।
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दूसरी ओर शिक्षक विद्यार्थियों को कोरोना काल से पहले के समय की तरह ही अनुशासित करने की मशक्कत में भी जुटे हैं। पिछले तीन साल में राजकीय स्कूलों के कुछ क्लासरूम स्मार्ट हैं और अब डिजिटल बोर्ड से विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाई जा रही है। संवाददाता से बातचीत में कुछ निजी स्कूल संचालकों व शिक्षकों ने बताया कि कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाएं लगने पर प्राइवेट स्कूलों में छात्र संख्या घट गई थी जो अब फिर से बढ़ गई है।
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ऑनलाइन पढ़ाई से ऑफलाइन बेहतर
ऑनलाइन पढ़ाई में काफी बच्चे क्लास बंक करते थे, लेकिन अब ऑफलाइन पढ़ाई में ऐसा नहीं होगा और प्रत्येक विद्यार्थी पर क्लासरूम में पूरी नजर रखी जा सकेगी। ऑनलाइन के मुकाबले ऑफलाइन पढ़ाई बेहतर है।
- प्रमेंद्र चितौड़िया, प्राचार्य, आर्य स्कूल झोझूकलां
कोरोना के पिछले तीन सालों के दौरान राजकीय स्कूल के क्लासरूम स्मार्ट हो गए हैं। अब विद्यार्थियों को डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाई करवाई जा रही है। स्कूल खुलने के बाद कक्षाएं लगने से छात्र संख्या ऑनलाइन पढ़ाई के मुकाबले ज्यादा है। - योगेश, प्राचार्य, सरस्वती बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अटेला कलां
ऑनलाइन पढ़ाई के मुकाबले मुझे क्लासरूम में पढ़ाई करना अच्छा लगता है। क्लासरूम में ध्यान भंग नहीं होता जबकि ऑनलाइन पढ़ाई में कई बार ध्यान भटकता था। मैंने ऑनलाइन कक्षाएं भी नियमित अटेंड की और अब स्कूल भी लगातार आ रहा हूं। - राज, छात्र, 12वीं कक्षा

ऑनलाइन पढ़ाई में टॉपिक सही से क्लीयर नहीं हो पाता था और बार-बार पूछने से क्लास बाधित होती थी। अब ऑफलाइन पढ़ाई होने से सभी टॉपिक अच्छे से समझ आ रहे हैं और क्लासरूम में ध्यान भी इधर-उधर नहीं जाता। - सागर, छात्र, 12वीं कक्षा
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