{"_id":"65c2767ec19b07253c04e5ac","slug":"school-heads-taught-to-identify-disabled-students-charkhidadri-news-c-126-1-shsr1012-113170-2024-02-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: स्कूल मुखियाओं को सिखाया दिव्यांग विद्यार्थियों की पहचान करना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: स्कूल मुखियाओं को सिखाया दिव्यांग विद्यार्थियों की पहचान करना
Tue, 06 Feb 2024 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 06 Feb 2024 11:42 PM IST
विज्ञापन
चरखी दादरी में समग्र शिक्षा की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद राजकीय स्कूलों के मुख
चरखी दादरी। समग्र शिक्षा की ओर से स्कूल मुखियाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें उन्हें दिव्यांग विद्यार्थियों की पहचान करना सिखाया गया। कार्यक्रम के प्रभारी एपीसी बलवान सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में 100 प्राचार्य, मुख्याध्यापक एवं मौलिक विद्यालय मुख्याध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया है।
इस दौरान डॉ. नेहा ने बताया कि बच्चों में हड्डी, आंखों, सुनने से संबंधित ही केवल दिव्यांगता नहीं होती। कुल 21 तरह की दिव्यांगता होती हैं इसकी जानकारी हर शिक्षक को होनी चाहिए। दिव्यांगता से जुड़े अधिकारों का ज्ञान होना विद्यार्थियों के लिए बहुत जरूरी है। कुछ ऐसे दिव्यांग होते हैं जिनका न तो शिक्षक को आभास होता है और न ही अभिभावकों को पता होता।
इसलिए स्कूल मुखियाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि शुरू में ही बच्चों में दिव्यांगता की पहचान हो सके। बच्चों के हर क्रियाकलाप और गतिविधियों पर नजर रखनी होगी।
विज्ञापन
इसके लिए दृष्टिहीन, कम दृष्टि, कुष्ठ रोग, श्रवण हानि, लोको मोटर, बौनापन, बौद्धिक दिव्यांगता, मानसिक बीमारी, ऑटिज्म, स्पेक्ट्रम विकार, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल स्थितियां, भाषा की दिव्यांगता, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, बहरापन आदि विभिन्न टॉपिक पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में डॉ. नेहा, विजय कुमार, मनोज कुमार, नरेश कुमार आदि मुख्य प्रशिक्षक रहे।
विज्ञापन
इस दौरान डॉ. नेहा ने बताया कि बच्चों में हड्डी, आंखों, सुनने से संबंधित ही केवल दिव्यांगता नहीं होती। कुल 21 तरह की दिव्यांगता होती हैं इसकी जानकारी हर शिक्षक को होनी चाहिए। दिव्यांगता से जुड़े अधिकारों का ज्ञान होना विद्यार्थियों के लिए बहुत जरूरी है। कुछ ऐसे दिव्यांग होते हैं जिनका न तो शिक्षक को आभास होता है और न ही अभिभावकों को पता होता।
विज्ञापन
इसलिए स्कूल मुखियाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि शुरू में ही बच्चों में दिव्यांगता की पहचान हो सके। बच्चों के हर क्रियाकलाप और गतिविधियों पर नजर रखनी होगी।
विज्ञापन
इसके लिए दृष्टिहीन, कम दृष्टि, कुष्ठ रोग, श्रवण हानि, लोको मोटर, बौनापन, बौद्धिक दिव्यांगता, मानसिक बीमारी, ऑटिज्म, स्पेक्ट्रम विकार, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल स्थितियां, भाषा की दिव्यांगता, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, बहरापन आदि विभिन्न टॉपिक पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में डॉ. नेहा, विजय कुमार, मनोज कुमार, नरेश कुमार आदि मुख्य प्रशिक्षक रहे।