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नमन : श्रीओम की जिले में 119वीं और महराणा में छठीं शहादत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 Apr 2022 10:39 PM IST
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Salute: 119th martyrdom of Shriom in the district and 6th martyrdom in Maharana
हनी सोनी
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चरखी दादरी। महराणा निवासी सूबेदार श्रीओम की शहादत ने महराणा के ग्रामीणों के साथ दादरी जिला वासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। उनकी जिले में 119वीं और महराणा से छठीं शहादत है। जांबाज श्रीओम की अंतिम क्रिया शनिवार दोपहर बाद की जाएगी और इसमें लोगों का सैलाब उमड़ेगा। शुक्रवार को ही शहीद के घर लोगों का आना-जाना शुरू हो गया है। उनकी शहादत की खबर सबसे पहले उनके बेटे योगेश को पता चली।
श्रीओम महज 18 वर्ष की उम्र में ही सेना में भर्ती हो गए थे। उनकी तैनाती श्रीनगर, सिक्कम, मेरठ और जम्मू-कश्मीर में रही है। वे गत फरवरी माह में अपनी भतीजी के शादी समारोह में शरीक होने के लिए एक माह की छुट्टी लेकर आए थे और गत 20 मार्च को ही वापस लौटे थे। उनके चाचा विजय ने बताया कि मई में श्रीओम को दोबारा छुट्टी आना था। श्रीओम की चचेरी बहन की मई में शादी थी और उनकी छुट्टी सेंशन हो चुकी थी।
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सर्वोच्च बलिदानी श्रीओम का रुझान बचपन से ही कुश्ती की तरफ था। उनका सेना में चयन भी खेल कौशल के आधार पर हुआ था। करीब 24 साल उन्होंने सेना में अपनी सेवाएं दीं। श्रीओम के अलावा उनके छोटे भाई रविंद्र भी सेना में है जबकि उनके चाचा विष्णु भी सेना से रिटायर्ड हैं। अब परिजनों समेत महराणा के ग्रामीणों और जिलावासियों को पार्थिव देह गांव पहुंचने का इंतजार है। शहीद के चाचा विष्णु ने बताया कि शनिवार दोपहर तक पार्थिव देह घर पहुंचने की उम्मीद है।
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- पिछले छुट्टी में किया था बेटी का रिश्ता तय, इस बार करनी थी शादी
शहीद के चाचा विजय ने बताया कि गत फरवरी में श्रीओम अपनी भतीजी की शादी समारोह में भाग लेने घर आए थे और उसी दौरान अपनी 19 वर्षीय बेटी जयंती का रिश्ता तय कर गए थे। इस बार मई में उन्हें चचेरी बहन की शादी में छुट्टी लेकर आना था और उसी दौरान बेटी की शादी की तारीख तय कर शादी भी करके जानी थी। इस बार भी श्रीओम को एक माह की छुट्टी आना था।
- दोपहर को पूरे परिवार से की थी बात, रात को मिली शहादत की खबर
शहीद के बेटे 17 वर्षीय योगेश ने बताया कि वीरवार दोपहर ढाई बजे उसकी अपने पापा से फोन पर बात हुई थी। उस दौरान उसकी बहन और मां ने भी बात की थी। देर शाम परिवार खाना खाकर सो गया था और रात साढ़े दस बजे फोन के जरिये उन्हें शहादत की सूचना मिली।
- चाचा बोले : एक लंगोटी में आठ कुश्तियां कर लेता था श्रीओम
शहीद के चाचा एवं सेना से रिटायर्ड विष्णु ने बताया कि श्रीओम अपने समय का अच्छा पहलवान रहा है। इसी की बदौलत उसका सेना में चयन हुआ था। विष्णु ने बताया कि श्रीओम एक ही लंगोटी में आठ कुश्तियां लड़ लेता था और बिरोहड़ में आयोजित दंगल में खुद उन्होंने श्रीओम की ये आठों कुश्तियां देखी थीं।
- महराणा में अब तक ये दे चुके शहादत
महराणा निवासी जगदीश सिंह और दीवान सिंह ने 1962 की लड़ाई में शहादत दी थी। उसके बाद 1996 की लड़ाई में अनुप सिंह शहीद हुए। 1999 के कारगिल युद्ध में कुलदीप सिंह शहीद हुए जबकि 2000 में सुमन अली ने शहादत दी। 2022 में श्रीओम ने महराणा से छठी शहादत दी है।

- नौ माह के अंदर जिले से दूसरी शहादत
गत अगस्त माह में मध्य-प्रदेश में माओवादियों से हुई मुठभेड़ में मौड़ी निवासी वेदप्रकाश शहीद हुए थे। 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद उनकी टीम पेट्रोलिंग पर गई थी और उसी दौरान खराब मौसम में घात लगाए बैठे माओवादियों ने उनके पर फायरिंग कर दी थी। उस दौरान एक गोली वेदप्रकाश की गर्दन में लगी थी और इससे वो शहीद हो गए थे। अब नौ माह बाद जिले निवासी एक और जांबाज ने शहादत दी है।
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