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Charkhi Dadri News: बारिश से फसल को नुकसान, 2600 किसानों ने दीं शिकायतें
Fri, 20 Sep 2024 06:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 20 Sep 2024 06:06 AM IST
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खेतों में फसल की सर्वे करते बीमा कंपनी प्रतिनिधि व कृषि विभाग अधिकारी। संवाद
14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास में 25-50 प्रतिशत, 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरा और 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल 25 फीसदी तक नुकसान
- एक खतौनी में 50 किसान हिस्सेदार होने से बीमा कंपनी के लिए गले की फांस बना सर्वे, कृषि विभाग ने मुख्यालय से मांगा मार्गदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। 13 सितंबर को हुई बारिश से खरीफ की फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिले के 2600 किसानों ने बीमा क्लेम के लिए शिकायतें दर्ज करवाई हैं। नुकसान का आकलन करने के लिए बीमा कंपनियों ने मौके पर जाकर सर्वे शुरू कर दिया है। कृषि विभाग व बीमा कंपनी से करीब 15 प्रतिनिधि सर्वे के काम में जुटे हैं।
जिले में 99 हजार एकड़ क्षेत्र में खरीफ सीजन की विभिन्न फसल में 50 प्रतिशत तक नुकसान होने का आकलन है। सबसे ज्यादा नुकसान कपास की फसल में हुआ है। बारिश से 43 गांवों में फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है।
बता दें कि जिले में बारिश से धान, बाजरा व कपास का रकबा प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग से मिली प्रारंभिक रिपोर्ट में कपास का 14 हजार एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कपास में 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का आकलन है। इसी प्रकार, बाजरा का 60 हजार एकड़ क्षेत्र बारिश से प्रभावित हुआ है। बाजरा में 0-25 प्रतिशत के बीच नुकसान होने का अनुमान है। इसी प्रकार, 25 हजार एकड़ में खड़ी धान की फसल में 0-25 प्रतिशत नुकसान होने का अनुमान है।
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- 72 घंटे के अंदर दर्ज करवानी थी शिकायत
दरअसल, किसान को 72 घंटे में नुकसान की शिकायत दर्ज करवानी होती है। अब तक जिला में 2600 शिकायतें विभाग के पास पहुंची हैं। इन शिकायतों के व्यक्तिगत तौर पर निपटान करने के लिए कृषि विभाग व बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों ने खेतों में जाकर सर्वे का काम शुरू कर दिया है।
- एक खतौनी में 50 से ज्यादा किसान हिस्सेदार
सर्वे के दौरान बीमा कंपनी जमीन के पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन डाटा को आधार मान रही है। काफी संख्या में किसानों की खतौनी इकट्ठी है। एक खतौनी में 50 से ज्यादा तक किसान हिस्सेदार हैं।
कंपनी के लिए गले की फांस बना सर्वे, मुख्यालय से मांगा मार्गदर्शन
किसानों ने बिजाई के लिए आपसी स्तर पर जमीन का बंटवारा कर रखा है। एक हिस्सेदार ने अपने खेत में फसल नहीं उगा रखी है जबकि दूसरे ने बिजाई कर रखी है। बीमा कंपनी का नियम है कि ऑनलाइन डाटा में जिस किसान के रिकाॅर्ड में जिस भी नंबर में जितनी जमीन है उसी के अनुरूप मुआवजा मिलेगा। ऐसे में किसान वास्तव में मुआवजा का हकदार होते हुए भी वंचित हो जा रहा है। ऐसे में सर्वे करना विभाग के लिए गले की फांस बन रहा है। अब कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस समस्या का समाधान करवाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। ताकि, इसका विकल्प तलाशा जा सके।
- इन गांवों में फसल को ज्यादा नुकसान
बारिश से गांव मौड़ी, बलकरा, मकड़ाना, मकड़ानी, रासीवास, पांडवान, चिड़िया, मंदोला आदि गांवों में फसल को ज्यादा नुकसान बताया जा रहा है। इन गांवों में मानसून सीजन में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। इन गांवों में फसल खेतों में बिछ गई। जलभराव होने पर इस फसल के गलने यानी नष्ट होने का अंदेशा बना हुआ है।
वर्सन:
काफी संख्या में किसानों की खतौनी इकट्ठी है। एक खतौनी में 50 से ज्यादा तक किसान हिस्सेदार हैं। उधर, किसानों ने बिजाई के लिए आपसी स्तर पर जमीन का बंटवारा कर रखा है। बीमा कंपनी का नियम है कि ऑनलाइन डाटा में जिस किसान के रिकाॅर्ड में जिस भी नंबर में जितनी जमीन है, उसी के अनुरूप मुआवजा मिलेगा। विभाग ने हेड ऑफिस मार्गदर्शन पत्र लिखा है।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
फोटो- 02
खेतों में फसल का सर्वे करते बीमा कंपनी के प्रतिनिधि व कृषि विभाग के अधिकारी। संवाद
फोटो 03
बारिश से बिछी फसल। संवाद
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- एक खतौनी में 50 किसान हिस्सेदार होने से बीमा कंपनी के लिए गले की फांस बना सर्वे, कृषि विभाग ने मुख्यालय से मांगा मार्गदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। 13 सितंबर को हुई बारिश से खरीफ की फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिले के 2600 किसानों ने बीमा क्लेम के लिए शिकायतें दर्ज करवाई हैं। नुकसान का आकलन करने के लिए बीमा कंपनियों ने मौके पर जाकर सर्वे शुरू कर दिया है। कृषि विभाग व बीमा कंपनी से करीब 15 प्रतिनिधि सर्वे के काम में जुटे हैं।
जिले में 99 हजार एकड़ क्षेत्र में खरीफ सीजन की विभिन्न फसल में 50 प्रतिशत तक नुकसान होने का आकलन है। सबसे ज्यादा नुकसान कपास की फसल में हुआ है। बारिश से 43 गांवों में फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है।
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बता दें कि जिले में बारिश से धान, बाजरा व कपास का रकबा प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग से मिली प्रारंभिक रिपोर्ट में कपास का 14 हजार एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कपास में 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का आकलन है। इसी प्रकार, बाजरा का 60 हजार एकड़ क्षेत्र बारिश से प्रभावित हुआ है। बाजरा में 0-25 प्रतिशत के बीच नुकसान होने का अनुमान है। इसी प्रकार, 25 हजार एकड़ में खड़ी धान की फसल में 0-25 प्रतिशत नुकसान होने का अनुमान है।
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- 72 घंटे के अंदर दर्ज करवानी थी शिकायत
दरअसल, किसान को 72 घंटे में नुकसान की शिकायत दर्ज करवानी होती है। अब तक जिला में 2600 शिकायतें विभाग के पास पहुंची हैं। इन शिकायतों के व्यक्तिगत तौर पर निपटान करने के लिए कृषि विभाग व बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों ने खेतों में जाकर सर्वे का काम शुरू कर दिया है।
- एक खतौनी में 50 से ज्यादा किसान हिस्सेदार
सर्वे के दौरान बीमा कंपनी जमीन के पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन डाटा को आधार मान रही है। काफी संख्या में किसानों की खतौनी इकट्ठी है। एक खतौनी में 50 से ज्यादा तक किसान हिस्सेदार हैं।
कंपनी के लिए गले की फांस बना सर्वे, मुख्यालय से मांगा मार्गदर्शन
किसानों ने बिजाई के लिए आपसी स्तर पर जमीन का बंटवारा कर रखा है। एक हिस्सेदार ने अपने खेत में फसल नहीं उगा रखी है जबकि दूसरे ने बिजाई कर रखी है। बीमा कंपनी का नियम है कि ऑनलाइन डाटा में जिस किसान के रिकाॅर्ड में जिस भी नंबर में जितनी जमीन है उसी के अनुरूप मुआवजा मिलेगा। ऐसे में किसान वास्तव में मुआवजा का हकदार होते हुए भी वंचित हो जा रहा है। ऐसे में सर्वे करना विभाग के लिए गले की फांस बन रहा है। अब कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस समस्या का समाधान करवाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। ताकि, इसका विकल्प तलाशा जा सके।
- इन गांवों में फसल को ज्यादा नुकसान
बारिश से गांव मौड़ी, बलकरा, मकड़ाना, मकड़ानी, रासीवास, पांडवान, चिड़िया, मंदोला आदि गांवों में फसल को ज्यादा नुकसान बताया जा रहा है। इन गांवों में मानसून सीजन में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। इन गांवों में फसल खेतों में बिछ गई। जलभराव होने पर इस फसल के गलने यानी नष्ट होने का अंदेशा बना हुआ है।
वर्सन:
काफी संख्या में किसानों की खतौनी इकट्ठी है। एक खतौनी में 50 से ज्यादा तक किसान हिस्सेदार हैं। उधर, किसानों ने बिजाई के लिए आपसी स्तर पर जमीन का बंटवारा कर रखा है। बीमा कंपनी का नियम है कि ऑनलाइन डाटा में जिस किसान के रिकाॅर्ड में जिस भी नंबर में जितनी जमीन है, उसी के अनुरूप मुआवजा मिलेगा। विभाग ने हेड ऑफिस मार्गदर्शन पत्र लिखा है।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
फोटो- 02
खेतों में फसल का सर्वे करते बीमा कंपनी के प्रतिनिधि व कृषि विभाग के अधिकारी। संवाद
फोटो 03
बारिश से बिछी फसल। संवाद