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Charkhi Dadri News: महिला अधिवक्ताओं को खल रही क्रेच और विश्राम कक्ष की कमी

Thu, 09 Jan 2025 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 09 Jan 2025 11:02 PM IST
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problem of woman advocates
कोर्ट:
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- जिले में हैं करीब 115 महिला अधिवक्ता, चुनाव के बाद मूलभूत सुविधाओं की मांग सिरे चढ़ने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। अधिवक्ताओं के बीच जिला बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर चर्चा जोरों पर है। महिला अधिवक्ता भी अपनी बात खुलकर रख रही हैं। जिले में करीब 115 महिला अधिवक्ता हैं। उन्हें आगामी कार्यकारिणी से काफी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि कोर्ट परिसर में क्रेच और विश्राम कक्ष जैसी मूलभूत सुविधाएं महिला अधिवक्ताओं के लिए होनी चाहिए। इसके अलावा अलग से शौचालय का प्रबंध भी जरूरी है।
28 फरवरी को जिला बार एसोसिएशन का चुनाव करवाया जाएगा। महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि पुरुषों के मुकाबले उनकी संख्या कम है। साथ ही चैंबर भी बहुत कम महिला अधिवक्ताओं को आवंटित है। अधिकतर महिला अधिवक्ता पुरुषों के साथ ही चैंबर साझा किए हुए हैं। क्रेच न होने के कारण महिला अधिवक्ताओं को घर या रिश्तेदारों के पास छोड़े गए छोटे बच्चे की चिंता भी रहती है। अगर कोर्ट परिसर में क्रेच खुल जाए तो महिला अधिवक्ता अपने छोटे बच्चों को संभाल सकती हैं।
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दूसरी ओर महिला अधिवक्ताओं के बैठने के लिए भी अलग से कोई विश्राम कक्ष नहीं है। एसोसिएशन स्थित पुस्तकालय में ही पुरुष व महिला अधिवक्ता बैठते और खाना खाते हैं। इनके अलावा शौचालय का प्रबंध भी नहीं है। महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि अगर एसोसिएशन में महिला अधिवक्ता शामिल होगी तो उनके मुद्दों व समस्याओं पर गौर कर समाधान करवा पाएगी।
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अधिवक्ता बोलीं : मूलभूत सुविधाएं बेहद जरूरी
बार परिसर में क्रेच सुविधा होनी बहुत जरूरी है। महिलाओं की ये समस्याएं महिला ही समझ सकती है। इस बार महिला अधिवक्ता को मौके देने की कोशिश रहेगी, ताकि, उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।
-पूनम मलिक, अधिवक्ता

बार एसोसिएशन में महिलाओं की भागीदारी होनी जरूरी है। इस बार एसोसिएशन में कोई एक महिला पदाधिकारी होनी चाहिए, ताकि, उनकी मांगें काउंसिल तक पहुंचाकर परवान चढ़वा सके।
-रेनू कुमारी, अधिवक्ता

कोर्ट परिसर में महिला व पुरुष अधिवक्ताओं के लिए एक ही स्थान पर शौचालय बनाए गए हैं। इससे महिला अधिवक्ताओं को परेशानी होती है। इस बार प्रधान ऐसा हो जो महिला व पुरुषों के शौचालय दूरी पर बनवा सके।

-नरेश कुमारी, अधिवक्ता

प्रधान पद पर प्रतिनिधि का चुनाव करने के लिए सोच-समझकर वोट करूंगी। प्रतिनिधि की महिलाओं के प्रति सोच और उनकी समस्याओं के समाधान की क्षमता आदि के अनुसार ही चयन करूंगी।
-सुमन देवी, अधिवक्ता

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पूनम मलिक।
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रेनू कुमारी
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नरेश कुमारी
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सुमन कुमारी।
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