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Charkhi Dadri News: रबी के बाद अब खरीफ सीजन में भी डीएपी की किल्लत
Thu, 22 May 2025 10:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 22 May 2025 10:11 PM IST
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विशेष खबर
फोटो-29
चरखी दादरी शहर स्थित जमींदारा सोसायटी कार्यालय। संवाद
- जिले के लिए जरूरत है 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी की, अब तक डीएपी के 1600 तो एनपीके के 500 बैग ही हो पाए वितरित
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। खरीफ सीजन की फसल के लिए डीएपी की मांग बनी हुई है। विभाग ने 10 हजार मीट्रिक टन खाद की मांग कर रखी है। अब तक 1600 बैग ही आए हैं। किसान लगातार खाद वितरण केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन, उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
खरीफ सीजन में कपास, ज्वार व मक्की (मक्का) के अलावा सब्जी की फसल की बिजाई की जाती है। कपास की बिजाई का अंतिम समय चल रहा है। किसान कपास की पछेती बिजाई 31 मई तक कर सकते हैं। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। दादरी में खाद की रैक लगने के लिए जगह की कमी बताई जा रही है।
जिले में डीएपी खाद की किल्लत गत रबी सीजन के दौरान भी थी। दिनभर किसानों की पैक्स सोसायटी कार्यालयों के बाहर लाइन लगी रहती थी। अब खरीफ सीजन में भी बैग पहुंचते ही किसान खाद के लिए लाइन में लग जा रहे हैं। चार दिन पहले पुरानी अनाज मंडी में जमींदारा सोसायटी कार्यालय में 1600 बैग डीएपी के आए थे, जो दोपहर तक बिक गए। इसी प्रकार, 500 बैग एनपीके खाद के बांटे गए हैं। इस बार एनपीके की भी किल्लत बनी हुई है।
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- 22 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई का अनुमान
जिले में इस बार करीब 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बिजाई होने का अनुमान है। वहीं, चरखी दादरी में डीएपी एवं यूरिया खाद का जिलास्तर का भंडारण केंद्र अब तक नहीं बन सका है। इस समय पुराने जिला मुख्यालय भिवानी में दादरी जिले के हिस्से की खाद पहुंच रही है। इससे पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाती है।
- हिसार से दादरी पहुंचती है खेप
हिसार में डीएपी खाद की बिक्री के लिए आईपीएल केंद्र बना रखा है। हिसार से खाद भिवानी जिला मुख्यालय पहुंचती है। बाद में भिवानी से दादरी के हिस्से की खाद जारी होती है। डीएपी खाद का दादरी जिले में गोदाम नहीं होने की वजह से भिवानी जिला मुख्यालय से आपूर्ति करनी पड़ती है। दादरी में खाद की रैक लगने के लिए जगह की कमी बताई जा रही है।
- नैनाे डीएपी की भी जरूरत
पिछले साल किसानों की इफको केंद्रों व पैक्स सोसायटी के कार्यालयों में लंबी कतारें लगी रहीं। पिछले साल एक किसान को आधार कार्ड पर 50 किलोग्राम वजन के तीन बैग दिए जा रहे थे। हालांकि, सरकार नैनो यूरिया व नैनो डीएपी भी बाजार में उपलब्ध करवा रही है। उसकी भी इस समय कमी बनी हुई है।
वर्सन
10 हजार एमटी डीएपी की मांग भेज रखी है। अब तक डीएपी व एनपीके के 2100 बैग बांटे गए हैं। जल्द ही और खाद पहुंचने की उम्मीद है। खाद की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
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फोटो-29
चरखी दादरी शहर स्थित जमींदारा सोसायटी कार्यालय। संवाद
- जिले के लिए जरूरत है 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी की, अब तक डीएपी के 1600 तो एनपीके के 500 बैग ही हो पाए वितरित
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। खरीफ सीजन की फसल के लिए डीएपी की मांग बनी हुई है। विभाग ने 10 हजार मीट्रिक टन खाद की मांग कर रखी है। अब तक 1600 बैग ही आए हैं। किसान लगातार खाद वितरण केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन, उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
खरीफ सीजन में कपास, ज्वार व मक्की (मक्का) के अलावा सब्जी की फसल की बिजाई की जाती है। कपास की बिजाई का अंतिम समय चल रहा है। किसान कपास की पछेती बिजाई 31 मई तक कर सकते हैं। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। दादरी में खाद की रैक लगने के लिए जगह की कमी बताई जा रही है।
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जिले में डीएपी खाद की किल्लत गत रबी सीजन के दौरान भी थी। दिनभर किसानों की पैक्स सोसायटी कार्यालयों के बाहर लाइन लगी रहती थी। अब खरीफ सीजन में भी बैग पहुंचते ही किसान खाद के लिए लाइन में लग जा रहे हैं। चार दिन पहले पुरानी अनाज मंडी में जमींदारा सोसायटी कार्यालय में 1600 बैग डीएपी के आए थे, जो दोपहर तक बिक गए। इसी प्रकार, 500 बैग एनपीके खाद के बांटे गए हैं। इस बार एनपीके की भी किल्लत बनी हुई है।
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- 22 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई का अनुमान
जिले में इस बार करीब 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बिजाई होने का अनुमान है। वहीं, चरखी दादरी में डीएपी एवं यूरिया खाद का जिलास्तर का भंडारण केंद्र अब तक नहीं बन सका है। इस समय पुराने जिला मुख्यालय भिवानी में दादरी जिले के हिस्से की खाद पहुंच रही है। इससे पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाती है।
- हिसार से दादरी पहुंचती है खेप
हिसार में डीएपी खाद की बिक्री के लिए आईपीएल केंद्र बना रखा है। हिसार से खाद भिवानी जिला मुख्यालय पहुंचती है। बाद में भिवानी से दादरी के हिस्से की खाद जारी होती है। डीएपी खाद का दादरी जिले में गोदाम नहीं होने की वजह से भिवानी जिला मुख्यालय से आपूर्ति करनी पड़ती है। दादरी में खाद की रैक लगने के लिए जगह की कमी बताई जा रही है।
- नैनाे डीएपी की भी जरूरत
पिछले साल किसानों की इफको केंद्रों व पैक्स सोसायटी के कार्यालयों में लंबी कतारें लगी रहीं। पिछले साल एक किसान को आधार कार्ड पर 50 किलोग्राम वजन के तीन बैग दिए जा रहे थे। हालांकि, सरकार नैनो यूरिया व नैनो डीएपी भी बाजार में उपलब्ध करवा रही है। उसकी भी इस समय कमी बनी हुई है।
वर्सन
10 हजार एमटी डीएपी की मांग भेज रखी है। अब तक डीएपी व एनपीके के 2100 बैग बांटे गए हैं। जल्द ही और खाद पहुंचने की उम्मीद है। खाद की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग