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मंथली न देने पर दलाल बताते थे गाड़ियों की लोकेशन, आरटीए स्टाफ चालान कर बनाता था दबाव

Thu, 01 Aug 2019 12:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2019 12:21 AM IST
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Overloding Problem
ओवरलोड वाहनों से वसूली मामले की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में शामिल किए गए ट्रांसपोर्टर्स के बयानों ने भी भ्रष्टाचार के इस मामले में कई अहम राज खोले हैं। चार्जशीट में करीब दस ट्रांसपोर्टर्स के बयान हैं। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि ओवरलोडिंग मंथली का खेल पिछले लंबे समय से खेला जा रहा है। अगर कोई ट्रांसपोर्टर मंथली देने से मना करता था, उसे टारगेट बना लिया जाता था। मंथली देने से मना करने वाले ट्रांसपोर्टर्स की गाड़ियों पर आरटीए स्टाफ दलालों की मदद से निगरानी रखता था। माल लोड कर गाड़ी चलते ही दलाल उसका पीछा करना शुरू कर देते थे और लोकेशन आरटीए स्टाफ को भेजी जाती थी। इसके बाद आरटीए सहायक सचिव मनीष मदान व आरटीए सचिव द्वारका प्रसाद गाड़ी को रुकवा लेते थे। मंथली देने की हामी भरने पर गाड़ी छोड़ दी जाती थी। अगर कोई ट्रांसपोर्टर मंथली पहुंचाने के लिए तैयार नहीं होते तो उनकी गाड़ी का हजारों रुपये का चालान कर दिया जाता था। इसके बाद लगातार गाड़ी को निशाना बनाकर चालान किए जाते थे और ट्रांसपोर्टर मंथली देने के लिए मजबूर हो जाता था।
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दलालों के नाम उजागर किए थे: ओवरलोडिंग मंथली मामले में गिरफ्तार दलाल रविंद्र और सुरेंद्र ने कई दलालों के नाम भी एसआईटी के सामने उजागर किए थे। ये दलाल प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय थे।
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सिस्टम में आ जाओ वरना यूं ही चालान करेंगे
ट्रांसपोर्टर बिलावल निवासी जितेंद्र, मारोत निवासी सोमबीर, अटेला निवासी धर्मेंद्र, अटेला नया निवासी प्रदीप व जींद के सफीरपुर निवासी सोमबीर आदि ने बताया कि आरटीए स्टाफ चालान करते समय एक ही बात कहता था कि सिस्टम में आ जाओ वरना यूं ही गाड़ियों के चालान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बाड़े में गाड़ी खड़ी करने के बाद दलाल सेटिंग के लिए पहुंच जाते थे।
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चालकों से मारपीट करने पर ट्रांसपोर्टर्स ने मंथली पहुंचानी कर दी थी बंद
ट्रांसपोर्टर्स ने अपने बयानों में ये भी बताया है कि आरटीए स्टाफ ने दलालों और दलालों ने अपने कुछ लोगों को भी गाड़ियों की रेकी के काम में लगा रखा था। ट्रांसपोर्टर्स ने बताया कि आरटीए स्टाफ ने उनकी गाड़ियों पर तैनात चालकों से मारपीट भी की और इसके बाद उन्होंने मंथली पहुंचानी बंद कर दी थी।
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