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Charkhi Dadri News: 27 माह में जल जीवन मिशन योजना पर 55 प्रतिशत काम ही हुआ पूरा
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चंपापुरी स्थित जलघर।
चरखी दादरी। जिले में केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना सवा दो साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इस योजना पर काम धीमी गति से चल रहा है। पिछले 27 माह में योजना पर करीब 55 प्रतिशत काम ही हो पाया है। ऐसे में संबंधित विभाग, प्रशासन और सरकार को योजना के तहत हो रहे काम को गति देने की जरूरत है ताकि जिलावासियों को योजना का जल्द लाभ मिल सके। डेडलाइन की बात करें तो दिसंबर 2022 तक इस योजना को पूरा किया जाना था।
दरअसल, योजना पर काम धीरे चलने के कई कारण हैं। इनके चलते नियमित अंतराल पर काम रुक जाता है। कभी पाइपलाइन समय पर नहीं पहुंचती है तो कभी मानसून सीजन बाधा बन जाता है। योजना अनुसार जिले के सभी 168 गांवों को तीन वर्गों में बांटा गया है। यहां विभाग ने पेयजल आपूर्ति में विस्तार एवं सुधार करने की परियोजना पर काम तो शुरू करवा दिया है, लेकिन इसे अब तक सिरे नहीं चढ़ाया जा सका है।
योजना के तहत जो काम करवाए जाने हैं उनमें नई पाइपलाइन बिछाना, कनेक्शन नियमित करना और नए जलघर बनाना शामिल है। जिले में पेयजल आपूर्ति में चार दशक से सुधार नहीं हो पाया है। इस वजह से खासकर गर्मी के मौसम में पेयजल का संकट बना रहता है।
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- चार दशक पुराने हैं जलघर
कहीं पाइप लाइनों की कमी की वजह से पानी की आपूर्ति संभव नहीं है तो कहीं पेयजल कनेक्शनों की संख्या भी सीमित है। जिले में इस समय 60 से ज्यादा जलघर हैं जो चार दशक पहले के बने हुए हैं। इन चार दशकों में जिले की आबादी भी बढ़ी है। आबादी बढ़ने के लिहाज से पानी की खपत भी बढ़ी है लेकिन आपूर्ति में सुधार नहीं हो सका है।
- अवैध कनेक्शन पर कसा जाना है शिकंजा
विभाग ने तीन वर्गों में इस काम को सिरे चढ़ाए जाने की योजना तैयार की हुई है। इसके लिए विभाग ने तीन कैटेगरी बनाई हैं। प्रथम कैटेगरी के तहत प्रत्येक गांव में पेयजल कनेक्शनों को नियमित किया जाना है। जिले में इस समय करीब 29 हजार से ज्यादा कनेक्शन नियमित हैं। अवैध पेयजल कनेक्शनों की संख्या ज्यादा होने के कारण सरकारी राजस्व में भी घाटा हो रहा है और पानी का समान वितरण भी नहीं हो पा रहा है।
- हर गांव में बिछनी है 3-4 किलोमीटर लंबी लाइन
विभाग की ओर से प्रत्येक गांव में जरूरत के अनुसार नई पाइप लाइन बिछाई जानी हैं ताकि प्रत्येक घर तक पानी पहुंच सके। कई गांवों में पुरानी एवं जर्जर लाइन होने की वजह से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रत्येक गांव में करीब तीन से चार किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाए जाने की योजना है। जिलाभर में 35 बूस्टर भी बनाए जाने हैं। इनका निर्माण भी अभी पूरा नहीं हो सका है।
- तीसरी कैटेगरी में होंगे ये काम
विभाग की तीसरी कैटेगरी के तहत जिन गांवों में नए जलघर की जरूरत है वहां ये बनाए जाने हैं। इन जलघरों में नहरी पानी डाला जाएगा। गांव की आबादी एवं पानी की खपत को देखते हुए जलघर बनाए जाने हैं ताकि पानी की आने वाले चार दशक तक किल्लत न होने पाए। कई गांवों के लिए एक सामूहिक रूप से बूस्टिंग भी बनने हैं। यह बूस्टिंग एवं जलघर जलघरों के आसपास बनाए जाने हैं ताकि नियमित रूप से इनमें पानी डाला जा सके।
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इस योजना पर काम चल रहा है। पेयजल कनेक्शन भी नियमित किए जा रहे हैं। जरूरत के अनुसार पाइप लाइन भी बिछाई जा रही हैं। गत तीन माह तक मानसून सीजन होने की वजह से काम प्रभावित हो गया था। काफी जलघरों के निर्माण व मरम्मत का काम जारी है। - जगदीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
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दरअसल, योजना पर काम धीरे चलने के कई कारण हैं। इनके चलते नियमित अंतराल पर काम रुक जाता है। कभी पाइपलाइन समय पर नहीं पहुंचती है तो कभी मानसून सीजन बाधा बन जाता है। योजना अनुसार जिले के सभी 168 गांवों को तीन वर्गों में बांटा गया है। यहां विभाग ने पेयजल आपूर्ति में विस्तार एवं सुधार करने की परियोजना पर काम तो शुरू करवा दिया है, लेकिन इसे अब तक सिरे नहीं चढ़ाया जा सका है।
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योजना के तहत जो काम करवाए जाने हैं उनमें नई पाइपलाइन बिछाना, कनेक्शन नियमित करना और नए जलघर बनाना शामिल है। जिले में पेयजल आपूर्ति में चार दशक से सुधार नहीं हो पाया है। इस वजह से खासकर गर्मी के मौसम में पेयजल का संकट बना रहता है।
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- चार दशक पुराने हैं जलघर
कहीं पाइप लाइनों की कमी की वजह से पानी की आपूर्ति संभव नहीं है तो कहीं पेयजल कनेक्शनों की संख्या भी सीमित है। जिले में इस समय 60 से ज्यादा जलघर हैं जो चार दशक पहले के बने हुए हैं। इन चार दशकों में जिले की आबादी भी बढ़ी है। आबादी बढ़ने के लिहाज से पानी की खपत भी बढ़ी है लेकिन आपूर्ति में सुधार नहीं हो सका है।
- अवैध कनेक्शन पर कसा जाना है शिकंजा
विभाग ने तीन वर्गों में इस काम को सिरे चढ़ाए जाने की योजना तैयार की हुई है। इसके लिए विभाग ने तीन कैटेगरी बनाई हैं। प्रथम कैटेगरी के तहत प्रत्येक गांव में पेयजल कनेक्शनों को नियमित किया जाना है। जिले में इस समय करीब 29 हजार से ज्यादा कनेक्शन नियमित हैं। अवैध पेयजल कनेक्शनों की संख्या ज्यादा होने के कारण सरकारी राजस्व में भी घाटा हो रहा है और पानी का समान वितरण भी नहीं हो पा रहा है।
- हर गांव में बिछनी है 3-4 किलोमीटर लंबी लाइन
विभाग की ओर से प्रत्येक गांव में जरूरत के अनुसार नई पाइप लाइन बिछाई जानी हैं ताकि प्रत्येक घर तक पानी पहुंच सके। कई गांवों में पुरानी एवं जर्जर लाइन होने की वजह से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रत्येक गांव में करीब तीन से चार किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाए जाने की योजना है। जिलाभर में 35 बूस्टर भी बनाए जाने हैं। इनका निर्माण भी अभी पूरा नहीं हो सका है।
- तीसरी कैटेगरी में होंगे ये काम
विभाग की तीसरी कैटेगरी के तहत जिन गांवों में नए जलघर की जरूरत है वहां ये बनाए जाने हैं। इन जलघरों में नहरी पानी डाला जाएगा। गांव की आबादी एवं पानी की खपत को देखते हुए जलघर बनाए जाने हैं ताकि पानी की आने वाले चार दशक तक किल्लत न होने पाए। कई गांवों के लिए एक सामूहिक रूप से बूस्टिंग भी बनने हैं। यह बूस्टिंग एवं जलघर जलघरों के आसपास बनाए जाने हैं ताकि नियमित रूप से इनमें पानी डाला जा सके।
इस योजना पर काम चल रहा है। पेयजल कनेक्शन भी नियमित किए जा रहे हैं। जरूरत के अनुसार पाइप लाइन भी बिछाई जा रही हैं। गत तीन माह तक मानसून सीजन होने की वजह से काम प्रभावित हो गया था। काफी जलघरों के निर्माण व मरम्मत का काम जारी है। - जगदीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग