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Charkhi Dadri News: नांधा के छोरे का बुलंद हौसला...नितेश ने लगाया गोल्डन शॉट
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पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश लुहाच। स्रोत: एसोसिएशन
- पेरिस पैरालंपिक में चरखी दादरी के शटलर ने निर्णायक मुकाबले में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को दी शिकस्त
- वर्ष 2009 में रेल हादसे में पैर गंवाने के बाद परिस्थितियों से हार न मानकर थामा बैडमिंटन का रैकेट
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जीवट, जुनून और परिस्थितियों के आगे हार न मानने की जिद से लबरेज नांधा के छोरे नीतेश लुहाच ने सोमवार को पेरिस पैरालंपिक के बैडमिंटन सिंगल्स के मुकाबले में गोल्डन शॉट लगाकर देशभर में खुशियों की लहर दौड़ा दी। वर्ष 2009 में रेल दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद निराश होने के बजाय नितेश ने जीवन को उस बुलंदी तक ले जाने की ठानी, जिसका सपना बचपन से ही देखा था। खेलों में रुचि थी, कुछ बड़ा करने का इरादा था, जिसे टूटने नहीं दिया और बैंडमिंटन का रैकेट थामकर अपनी तकदीर खुद ही लिखने की ठान ली।
मूलरूप से नांधा निवासी नितेश इससे पहले राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 74 पदक जीत चुके हैं, लेकिन पहला पैरालंपिक पदक जीतने के बाद परिजनों की आंखों में अलग ही चमक दिखी। उनका परिवार जयपुर में रहता है जबकि ताऊ गुणपाल व वेदपाल पैतृक गांव में रहते हैं। नितेश 15 वर्ष की उम्र में दिव्यांगता के शिकार हुए थे। उस दौरान वह केंद्रीय विद्यालय की फुटबाल टीम का हिस्सा थे और एक स्पर्धा में शामिल होने विशाखापट्टनम गए थे। लौटते समय ट्रेन से गिरकर हादसे का शिकार हो गए। 2022 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद नितेश को बैडमिंटन कोच नियुक्त किया गया था। वो करनाल के कर्ण स्टेडियम में कोचिंग देते हैं।
वीडियो कॉल कर बोले, मम्मी-पापा हमारा सपना पूरा हो गया
नितेश के पिता बिजेंद्र सिंह ने बताया कि बेटे ने वीडियो कॉल कर कहा, मम्मी-पापा मैंने स्वर्ण पदक जीत लिया है और अपना सपना पूरा हो गया। नितेश ने बहन निशा और अन्य परिजनों से भी बात की।
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इन देशों के खिलाड़ियों को दी मात
जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के महासचिव लोकेश गुप्ता ने बताया कि पैरालंपिक खेल में नितेश का खिताबी मुकाबला ब्रिटेन के डेनियल बेथेल के साथ हुआ और तीन सेट तक चले इस मुकाबले को नितेश ने अपने नाम किया। इससे पहले सेमीफाइनल में जापान के दाईसुके फुजिहारा को 21-12 व 21-16 से और थाईलैंड के मोंगखोन बुनसुन को 21-13 व 21-14 से हराया।
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ताऊ के घर बैठकर परिजनों ने देखा मैच
ताऊ गुणपाल व वेदपाल ने परिजनों के साथ मिलकर नितेश के मैच देखे। भतीजे के स्वर्ण पदक जीतने के बाद घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। वहीं, बाढड़ा में जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने नितेश की जीत पर मिठाई बांटकर खुशी जताई। इस मौके पर राजेंद्र सिंह, डाॅ. धर्मबीर, ऋषि, विनोद, संतराम, हरपाल व बाली शर्मा मौजूद रहे।
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बेटे की बचपन से खेलों में रुचि रही है। वह स्कूल स्तर पर सभी खेलों में भाग लेता था। 2009 में रेल हादसे में पैर गंवाने पर बैडमिंटन में किस्मत आजमाई। पेरिस में राष्ट्रीय गान बजवाकर सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है। इस खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। - बिजेंद्र सिंह लुहाच, नितेश के पिता
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फोटो कैप्शन
फोटो 21: पेरिस में पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश लुहाच। स्रोत: एसोसिएशन
फोटो 22: नितेश के स्वर्ण जीतने पर हीरा इंडोर स्टेडियम में खुशी जताते बैडमिंटन खिलाड़ी। स्रोत: एसोसिएशन
फोटो 29: वीडियो कॉल के जरिये परिजनों से बात करते नितेश लुहाच। स्रोत: परिजन
फोटो 28: नांधा गांव में नितेश का मैच देखते परिजन। संवाद
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- वर्ष 2009 में रेल हादसे में पैर गंवाने के बाद परिस्थितियों से हार न मानकर थामा बैडमिंटन का रैकेट
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जीवट, जुनून और परिस्थितियों के आगे हार न मानने की जिद से लबरेज नांधा के छोरे नीतेश लुहाच ने सोमवार को पेरिस पैरालंपिक के बैडमिंटन सिंगल्स के मुकाबले में गोल्डन शॉट लगाकर देशभर में खुशियों की लहर दौड़ा दी। वर्ष 2009 में रेल दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद निराश होने के बजाय नितेश ने जीवन को उस बुलंदी तक ले जाने की ठानी, जिसका सपना बचपन से ही देखा था। खेलों में रुचि थी, कुछ बड़ा करने का इरादा था, जिसे टूटने नहीं दिया और बैंडमिंटन का रैकेट थामकर अपनी तकदीर खुद ही लिखने की ठान ली।
मूलरूप से नांधा निवासी नितेश इससे पहले राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 74 पदक जीत चुके हैं, लेकिन पहला पैरालंपिक पदक जीतने के बाद परिजनों की आंखों में अलग ही चमक दिखी। उनका परिवार जयपुर में रहता है जबकि ताऊ गुणपाल व वेदपाल पैतृक गांव में रहते हैं। नितेश 15 वर्ष की उम्र में दिव्यांगता के शिकार हुए थे। उस दौरान वह केंद्रीय विद्यालय की फुटबाल टीम का हिस्सा थे और एक स्पर्धा में शामिल होने विशाखापट्टनम गए थे। लौटते समय ट्रेन से गिरकर हादसे का शिकार हो गए। 2022 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद नितेश को बैडमिंटन कोच नियुक्त किया गया था। वो करनाल के कर्ण स्टेडियम में कोचिंग देते हैं।
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वीडियो कॉल कर बोले, मम्मी-पापा हमारा सपना पूरा हो गया
नितेश के पिता बिजेंद्र सिंह ने बताया कि बेटे ने वीडियो कॉल कर कहा, मम्मी-पापा मैंने स्वर्ण पदक जीत लिया है और अपना सपना पूरा हो गया। नितेश ने बहन निशा और अन्य परिजनों से भी बात की।
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इन देशों के खिलाड़ियों को दी मात
जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के महासचिव लोकेश गुप्ता ने बताया कि पैरालंपिक खेल में नितेश का खिताबी मुकाबला ब्रिटेन के डेनियल बेथेल के साथ हुआ और तीन सेट तक चले इस मुकाबले को नितेश ने अपने नाम किया। इससे पहले सेमीफाइनल में जापान के दाईसुके फुजिहारा को 21-12 व 21-16 से और थाईलैंड के मोंगखोन बुनसुन को 21-13 व 21-14 से हराया।
ताऊ के घर बैठकर परिजनों ने देखा मैच
ताऊ गुणपाल व वेदपाल ने परिजनों के साथ मिलकर नितेश के मैच देखे। भतीजे के स्वर्ण पदक जीतने के बाद घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। वहीं, बाढड़ा में जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने नितेश की जीत पर मिठाई बांटकर खुशी जताई। इस मौके पर राजेंद्र सिंह, डाॅ. धर्मबीर, ऋषि, विनोद, संतराम, हरपाल व बाली शर्मा मौजूद रहे।
बेटे की बचपन से खेलों में रुचि रही है। वह स्कूल स्तर पर सभी खेलों में भाग लेता था। 2009 में रेल हादसे में पैर गंवाने पर बैडमिंटन में किस्मत आजमाई। पेरिस में राष्ट्रीय गान बजवाकर सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है। इस खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। - बिजेंद्र सिंह लुहाच, नितेश के पिता
फोटो कैप्शन
फोटो 21: पेरिस में पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश लुहाच। स्रोत: एसोसिएशन
फोटो 22: नितेश के स्वर्ण जीतने पर हीरा इंडोर स्टेडियम में खुशी जताते बैडमिंटन खिलाड़ी। स्रोत: एसोसिएशन
फोटो 29: वीडियो कॉल के जरिये परिजनों से बात करते नितेश लुहाच। स्रोत: परिजन
फोटो 28: नांधा गांव में नितेश का मैच देखते परिजन। संवाद