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प्राकृतिक खेती से मिट्टी में जैविक कार्बन की बढ़ती है मात्रा : स्वामी सच्चिदानंद
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चरखी दादरी। प्राकृतिक कृषि प्रेरणा अभियान के तहत सर्वहित साधना न्यास एवं आर्यवीर दल के सदस्यों ने स्वामी सच्चिदानंद के नेतृत्व में गांव लाड में किसानों के साथ वार्ता की। स्वामी सच्चिदानंद ने किसानों से अपील है कि वे समाज कल्याण के लिए प्राकृतिक खेती करें। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध के अनुसार, प्राकृतिक खेती से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है।
इसके अलावा, प्राकृतिक खेती की विधियों से विभिन्न प्रकार की फसलों में होने वाली बीमारियों को भी रोका जा सकता है। प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लाभदायक और टिकाऊ विकल्प है। वर्तमान समय में प्राकृतिक कृषि की सख्त जरूरत है। देशभर में प्राकृतिक खेती अपनाने का अभियान चल रहा है। प्राकृतिक ही एकमात्र खेती पद्धति है, जिससे जमीन उपजाऊ और नर्म बनती है।
इससे बारिश का पानी जमीन में ज्यादा जाता है। प्राकृतिक खेती से कृषि खर्च की बचत होती है और आय बढ़ती है। सर्वहित साधना न्यास सदस्यों ने प्राकृतिक कृषक राजकुमार शास्त्री की ओर से तैयार की गई प्राकृतिक बंशी गेहूं की फसल का निरीक्षण किया। उनकी ओर से तैयार की गई 4 से 5 प्रकार की किस्म के तरबूज की फसल का भी निरीक्षण किया।
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राजकुमार शास्त्री ने बताया कि उन्होंने 2010 में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी और धीरे- धीरे गाय के गोबर से तैयार खाद से खेत की हालत को सुधारा गया है। इस अवसर पर प्राकृतिक कृषि शोधार्थी सुमंत्र आर्य, नरेश पहलवान, मित्रसेन आर्य, बिशन सिंह आदि की उपस्थिति रही।
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इसके अलावा, प्राकृतिक खेती की विधियों से विभिन्न प्रकार की फसलों में होने वाली बीमारियों को भी रोका जा सकता है। प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लाभदायक और टिकाऊ विकल्प है। वर्तमान समय में प्राकृतिक कृषि की सख्त जरूरत है। देशभर में प्राकृतिक खेती अपनाने का अभियान चल रहा है। प्राकृतिक ही एकमात्र खेती पद्धति है, जिससे जमीन उपजाऊ और नर्म बनती है।
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इससे बारिश का पानी जमीन में ज्यादा जाता है। प्राकृतिक खेती से कृषि खर्च की बचत होती है और आय बढ़ती है। सर्वहित साधना न्यास सदस्यों ने प्राकृतिक कृषक राजकुमार शास्त्री की ओर से तैयार की गई प्राकृतिक बंशी गेहूं की फसल का निरीक्षण किया। उनकी ओर से तैयार की गई 4 से 5 प्रकार की किस्म के तरबूज की फसल का भी निरीक्षण किया।
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राजकुमार शास्त्री ने बताया कि उन्होंने 2010 में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी और धीरे- धीरे गाय के गोबर से तैयार खाद से खेत की हालत को सुधारा गया है। इस अवसर पर प्राकृतिक कृषि शोधार्थी सुमंत्र आर्य, नरेश पहलवान, मित्रसेन आर्य, बिशन सिंह आदि की उपस्थिति रही।