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मानसून नहीं रहा मेहरबान, किसानों पर सिंचाई के लिए बढ़ेगा चार करोड़ का आर्थिक बोझ
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चरखी दादरी। इस बार मानसून कमजोर रहने पर रबी सीजन की फसलों की बिजाई के लिए किसानों को मोटा खर्च झेलना पड़ेगा। किसानों को सिंचाई करके गेहूं, जौ व सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। इससे जिले के किसानों पर लागत खर्च के रूप में अतिरिक्त करीब चार करोड़ का बोझ पड़ेगा। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। इस बार जिले का बिजाई का रकबा भी घटने के आसार बन गए हैं। इस बार अब तक 281 एमएम बारिश हुई जबकि सामान्य बारिश 500 एमएम तक होनी चाहिए। सरसों की बिजाई का आंकड़ा इस बार 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रहने का अनुमान है।
जिले में रबी की फसलों के रूप में अधिकतर किसान गेहूं, सरसों व जौ की ज्यादा मात्रा में बिजाई करते हैं। मानसून की औसत बारिश होने पर अक्टूबर माह के अंत तक खेतों में नमी यानी आल बनी रहती थी लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से जमीन में नमी नहीं है। इस वजह से किसानों के पास सिंचाई करके ही बिजाई करने का विकल्प बचा है अन्यथा काफी एरिया बिना बिजाई के भी रहने के आसार बने हुए हैं। जिला का बाढड़ा एरिया रेतीला है। इस एरिया में बिजली या सोलर चालित ट्यूबवेल से सिंचाई की जाती है।
चरखी दादरी ब्लॉक के एरिया में नहरें भी गुजरती हैं लेकिन नहरों पर सरकारी मोगों की संख्या कम होने की वजह से सिंचाई की व्यवस्था नहीं बन पाती इस वजह से किसान नहरी पानी की चोरी करने को विवश हो जाते हैं। किसान नहरों पर इंजन लगाकर पानी का उठान करते हैं तो भी प्रति एकड़ कम से कम 15 लीटर डीजल की खपत होती है। इससे प्रति एकड़ खर्च बढ़ेगा। बाढड़ा एरिया में तो जमीनी पानी 500 फीट नीचे तक चला गया है।
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अक्तूबर में सरसों की तो नवंबर में होगी गेहूं की बिजाई
श्राद्ध के बाद आमतौर पर किसान सरसों की बिजाई शुरू कर देते हैं लेकिन तापमान अधिक बने रहने की वजह से किसान सरसों की बिजाई आजकल देरी से करने लगे हैं क्योंकि ज्यादा तापमान में फसल में रोग का प्रकोप बढ़ जाता है और पौधे सूखने लग जाते हैं। वैसे ही जमीन में सोखा बना हुआ है। गेहूं की बिजाई का समय नवंबर प्रथम सप्ताह में शुरू हो जाता है जो 25 नवंबर तक अगेती बिजाई की जा सकती है जिन किसानों ने धान की रोपाई कर रखी है उनमें धान कटने के बाद गेहूं की पछेती बिजाई हो जाएगी
किसान बोले: इस बार करनी पड़ेगी सिंचाई
किसान चंद्र सिंह, रण सिंह, सुरेंद्र, शमशेर, मांगेराम व राममेहर का कहना है कि इस बार तो रबी की फसलों की बिजाई करने से पहले सिंचाई करनी पड़ेगी तब जाकर सरसों, जौ व गेहूं आदि की बिजाई हो सकेगी। किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए प्रति एकड़ 15 लीटर डीजल की खपत हो जाती है।
इस बार बिजाई रकबा घटने की उम्मीद
जिले में हर साल औसतन 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं और करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बिजाई होती आ रही है। इस बार मानसून की बारिश कम होने की वजह से बिजाई का यह रकबा घटने के आसार हैं क्योंकि बरानी एरिया में सिंचाई के साधन भी किसानों के पास नहीं हैं। बरानी एरिया तो पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर है। इस प्रकार आने वाले रबी सीजन में किसानों पर लागत खर्च के रूप में करीब चार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कई लाख लीटर डीजल की भी खपत होगी।
किसानों का इस बार लागत खर्च बढ़ेगा। बारिश कम होने से खरीफ की भी फसलों में भी नुकसान हुआ है और अब रबी की फसलों की बिजाई करने में किसान को कठोर मेहनत के साथ आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ेगा।
डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी
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जिले में रबी की फसलों के रूप में अधिकतर किसान गेहूं, सरसों व जौ की ज्यादा मात्रा में बिजाई करते हैं। मानसून की औसत बारिश होने पर अक्टूबर माह के अंत तक खेतों में नमी यानी आल बनी रहती थी लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से जमीन में नमी नहीं है। इस वजह से किसानों के पास सिंचाई करके ही बिजाई करने का विकल्प बचा है अन्यथा काफी एरिया बिना बिजाई के भी रहने के आसार बने हुए हैं। जिला का बाढड़ा एरिया रेतीला है। इस एरिया में बिजली या सोलर चालित ट्यूबवेल से सिंचाई की जाती है।
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चरखी दादरी ब्लॉक के एरिया में नहरें भी गुजरती हैं लेकिन नहरों पर सरकारी मोगों की संख्या कम होने की वजह से सिंचाई की व्यवस्था नहीं बन पाती इस वजह से किसान नहरी पानी की चोरी करने को विवश हो जाते हैं। किसान नहरों पर इंजन लगाकर पानी का उठान करते हैं तो भी प्रति एकड़ कम से कम 15 लीटर डीजल की खपत होती है। इससे प्रति एकड़ खर्च बढ़ेगा। बाढड़ा एरिया में तो जमीनी पानी 500 फीट नीचे तक चला गया है।
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अक्तूबर में सरसों की तो नवंबर में होगी गेहूं की बिजाई
श्राद्ध के बाद आमतौर पर किसान सरसों की बिजाई शुरू कर देते हैं लेकिन तापमान अधिक बने रहने की वजह से किसान सरसों की बिजाई आजकल देरी से करने लगे हैं क्योंकि ज्यादा तापमान में फसल में रोग का प्रकोप बढ़ जाता है और पौधे सूखने लग जाते हैं। वैसे ही जमीन में सोखा बना हुआ है। गेहूं की बिजाई का समय नवंबर प्रथम सप्ताह में शुरू हो जाता है जो 25 नवंबर तक अगेती बिजाई की जा सकती है जिन किसानों ने धान की रोपाई कर रखी है उनमें धान कटने के बाद गेहूं की पछेती बिजाई हो जाएगी
किसान बोले: इस बार करनी पड़ेगी सिंचाई
किसान चंद्र सिंह, रण सिंह, सुरेंद्र, शमशेर, मांगेराम व राममेहर का कहना है कि इस बार तो रबी की फसलों की बिजाई करने से पहले सिंचाई करनी पड़ेगी तब जाकर सरसों, जौ व गेहूं आदि की बिजाई हो सकेगी। किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए प्रति एकड़ 15 लीटर डीजल की खपत हो जाती है।
इस बार बिजाई रकबा घटने की उम्मीद
जिले में हर साल औसतन 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं और करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बिजाई होती आ रही है। इस बार मानसून की बारिश कम होने की वजह से बिजाई का यह रकबा घटने के आसार हैं क्योंकि बरानी एरिया में सिंचाई के साधन भी किसानों के पास नहीं हैं। बरानी एरिया तो पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर है। इस प्रकार आने वाले रबी सीजन में किसानों पर लागत खर्च के रूप में करीब चार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कई लाख लीटर डीजल की भी खपत होगी।
किसानों का इस बार लागत खर्च बढ़ेगा। बारिश कम होने से खरीफ की भी फसलों में भी नुकसान हुआ है और अब रबी की फसलों की बिजाई करने में किसान को कठोर मेहनत के साथ आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ेगा।
डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी