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मिशन एडमिशन: एपीजे कन्या महाविद्यालय में दो साल से रिक्त रह रहीं सीटें
Mon, 29 May 2023 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 29 May 2023 11:57 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। एपीजे सरस्वती कन्या महाविद्यालय में पिछले दो साल से सभी कोर्सों की सीटें रिक्त रह रहीं हैं। महाविद्यालय में चार कोर्सों की 600 सीटें हैं जिनमें 25 से 30 प्रतिशत तक सीटें खाली रह जाती हैं। वहीं, तीन वर्ष पहले की बात करे तो महाविद्यालय में छात्राओं को एडमिशन नहीं मिलता था। महाविद्यालय प्रबंधन समिति का मानना है कि जिले में महाविद्यालय की संख्या पहले की तुलना में बढ़ गई है जिससे विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ सकती हैं।
एपीजे कन्या महाविद्यालय में कला संकाय की 400, बीकॉम की 80, बीकॉम वोकेशनल की 40 और बीएससी नॉन मेडिकल की 80 सीटें हैं। इन सीटों पर लगभग दोगुने आवेदन आते हैं लेकिन आवेदन में विकल्प ज्यादा भरवाने की वजह से विद्यार्थी दूसरे महाविद्यालयों में एडमिशन ले लेते हैं। यहां विद्यार्थी सबसे अधिक कला संकाय में और उसके बाद नॉन मेडिकल संकाय में दिलचस्पी दिखाते हैं। बावजूद इसके दोनों संकाय की सीटें दो वर्षों से पूरी नहीं भर रही। इसके अलावा बीकॉम वोकेशनल 40 सीटों में से मात्र 15 से 20 एडमिशन हो पाते हैं। इसी प्रकार कॉमर्स संकाय की 80 सीटों में मुश्किल से 50 सीटें भर पाती हैं।
ये हैं दाखिला संख्या घटने के मुख्य कारण
- छात्राएं गलत फॉर्म भर देती है, कन्या महाविद्यालय के बजाय दूसरे महाविद्यालय का नाम पहले डाल देती हैं।
- महाविद्यालयों की संख्या बढ़ गई है जिससे विद्यार्थियों की संख्या बंट गई है।
- विकल्प अधिक होने से विद्यार्थियों में एडमिशन के लिए अफरा-तफरी बनी रहती है।
- मेधावी एवं सक्षम परिवारों परिवारों से संबंध रखने वाली छात्राओं का रुख दिल्ली विश्वविद्यालय तथा जवाहर लाल विश्वविद्यालय या फिर अन्य विश्वविद्यालय की ओर हो गया है।
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एडमिशन के लिए तैयारियां शुरू
राजकीय महाविद्यालयों में यूजी कक्षा में एडमिशन के लिए शेड्यूल जारी हो चुका है। शेड्यूल के अनुसार 29 से 31 मई तक महाविद्यालयों को अपना डाटा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। महाविद्यालयों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। महाविद्यालयों में अलग-अलग कमेटियां बनाई जाएंगी। फॉर्म जांच और तकनीकी कार्यों के लिए अलग-अलग कमेटी बनेंगी। एडमिशन के लिए अलग-अलग संकायों की अलग-अलग कमेटियां बनेंगी। जनता महाविद्यालय में एनएसएस कैडेट्स की ओर से हेल्प डेस्क भी लगाई जाएंगी।
वर्जन:
महाविद्यालय में पिछले दो सालों से सभी कोर्सों में सीटें खाली रह जाती हैं। पहले छात्राएं एडमिशन के लिए सिफारिशें लगाती थी लेकिन अब कई कारणों के चलते सीटें खाली रह जाती हैं। इस बार उम्मीद है कि सीटें पहले की तुलना में बढ़ेंगी।
- स्नेहलता, प्राचार्य, एपीजे कन्या महाविद्यालय
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चरखी दादरी। एपीजे सरस्वती कन्या महाविद्यालय में पिछले दो साल से सभी कोर्सों की सीटें रिक्त रह रहीं हैं। महाविद्यालय में चार कोर्सों की 600 सीटें हैं जिनमें 25 से 30 प्रतिशत तक सीटें खाली रह जाती हैं। वहीं, तीन वर्ष पहले की बात करे तो महाविद्यालय में छात्राओं को एडमिशन नहीं मिलता था। महाविद्यालय प्रबंधन समिति का मानना है कि जिले में महाविद्यालय की संख्या पहले की तुलना में बढ़ गई है जिससे विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ सकती हैं।
एपीजे कन्या महाविद्यालय में कला संकाय की 400, बीकॉम की 80, बीकॉम वोकेशनल की 40 और बीएससी नॉन मेडिकल की 80 सीटें हैं। इन सीटों पर लगभग दोगुने आवेदन आते हैं लेकिन आवेदन में विकल्प ज्यादा भरवाने की वजह से विद्यार्थी दूसरे महाविद्यालयों में एडमिशन ले लेते हैं। यहां विद्यार्थी सबसे अधिक कला संकाय में और उसके बाद नॉन मेडिकल संकाय में दिलचस्पी दिखाते हैं। बावजूद इसके दोनों संकाय की सीटें दो वर्षों से पूरी नहीं भर रही। इसके अलावा बीकॉम वोकेशनल 40 सीटों में से मात्र 15 से 20 एडमिशन हो पाते हैं। इसी प्रकार कॉमर्स संकाय की 80 सीटों में मुश्किल से 50 सीटें भर पाती हैं।
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ये हैं दाखिला संख्या घटने के मुख्य कारण
- छात्राएं गलत फॉर्म भर देती है, कन्या महाविद्यालय के बजाय दूसरे महाविद्यालय का नाम पहले डाल देती हैं।
- महाविद्यालयों की संख्या बढ़ गई है जिससे विद्यार्थियों की संख्या बंट गई है।
- विकल्प अधिक होने से विद्यार्थियों में एडमिशन के लिए अफरा-तफरी बनी रहती है।
- मेधावी एवं सक्षम परिवारों परिवारों से संबंध रखने वाली छात्राओं का रुख दिल्ली विश्वविद्यालय तथा जवाहर लाल विश्वविद्यालय या फिर अन्य विश्वविद्यालय की ओर हो गया है।
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एडमिशन के लिए तैयारियां शुरू
राजकीय महाविद्यालयों में यूजी कक्षा में एडमिशन के लिए शेड्यूल जारी हो चुका है। शेड्यूल के अनुसार 29 से 31 मई तक महाविद्यालयों को अपना डाटा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। महाविद्यालयों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। महाविद्यालयों में अलग-अलग कमेटियां बनाई जाएंगी। फॉर्म जांच और तकनीकी कार्यों के लिए अलग-अलग कमेटी बनेंगी। एडमिशन के लिए अलग-अलग संकायों की अलग-अलग कमेटियां बनेंगी। जनता महाविद्यालय में एनएसएस कैडेट्स की ओर से हेल्प डेस्क भी लगाई जाएंगी।
वर्जन:
महाविद्यालय में पिछले दो सालों से सभी कोर्सों में सीटें खाली रह जाती हैं। पहले छात्राएं एडमिशन के लिए सिफारिशें लगाती थी लेकिन अब कई कारणों के चलते सीटें खाली रह जाती हैं। इस बार उम्मीद है कि सीटें पहले की तुलना में बढ़ेंगी।
- स्नेहलता, प्राचार्य, एपीजे कन्या महाविद्यालय