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Charkhi Dadri News: लाखों के मिनी ट्रैक्टर बने शोपीस, गलियों में अब भी कचरे का अंबार

Mon, 27 Jul 2026 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 27 Jul 2026 11:48 PM IST
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Mini-tractors worth lakhs have become showpieces; heaps of garbage still litter the streets
नगर परिषद परिसर में खड़े दोनों मिनी ट्रैक्टर।  - फोटो : 1
चरखी दादरी। शहर की तंग गलियों और संकरे मोहल्लों से कचरा उठान और जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से नगर परिषद को मिले संसाधन प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ गए हैं।
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हालात यह हैं कि करीब एक साल पहले सांसद कोटे से खरीदे गए लाखों रुपये की कीमत के दो मिनी ट्रैक्टर आज तक इस्तेमाल ही नहीं किए गए हैं।
उपयोग न होने से वाहन नगर परिषद कार्यालय परिसर में खड़े-खड़े सफेद हाथी साबित हो रहे हैं और इनमें लगे उपकरण जंग लगने से खराब हो रहे हैं।

शहर के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां संकरी गलियां होने से बड़े ट्रैक्टर, जेसीबी या कचरा उठाने वाली बड़ी गाड़ियां आसानी से नहीं पहुंच पाती हैं। इस कारण स्थानीय लोगों को लंबे समय से कचरा उठान और बारिश के दिनों में जल निकासी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता था।
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नागरिकों की इस परेशानी को देखते हुए तत्कालीन सांसद धर्मबीर सिंह ने अपने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना कोटे से विशेष तौर पर मिनी ट्रैक्टर उपलब्ध करवाने की पहल की थी।
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इन छोटे वाहनों का मुख्य उद्देश्य यही था कि इन्हें आसानी से तंग गलियों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में ले जाकर नियमित रूप से कचरा उठाया जा सके जिससे जल निकासी के वक्त पानी की निकासी में मदद मिल सके।
इसके लिए लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च करके दो आधुनिक मिनी ट्रैक्टर खरीदे गए थे और बड़े तामझाम के साथ इन्हें नगर परिषद को सौंपा गया था।


धूल फांक रहे हैं लाखों के वाहन
सांसद कोटे से वाहन मिलने के बाद शहरवासियों को उम्मीद जगी थी कि अब तंग गलियों की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
नगर परिषद की सुस्त कार्यप्रणाली और अधिकारियों की लापरवाही के चलते ये दोनों मिनी ट्रैक्टर पिछले लंबे समय से एक ही स्थान पर खड़े-खाड़े धूल फांक रहे हैं। देखरेख के अभाव में इन वाहनों के उपकरणों पर जंग लगना शुरू हो गया है।
खुले आसमान के नीचे खड़े रहने और इस्तेमाल में न आने के कारण इन कीमती वाहनों के टायर और इंजन भी धीरे-धीरे खराब होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
जनता का पैसा बर्बाद, जिम्मेदार कौन?

जनप्रतिनिधियों की ओर से जनता की सुविधा के लिए भेजी गई सहायता का इस तरह से उपयोग न होना और उनका बर्बाद होना सरकारी धन के दुरुपयोग को साफ-साफ दिखा रहा है। तंग गलियों में रहने वाले लोग आज भी कचरे के ढेर और जलभराव की समस्याओं से जूझ रहे हैं जबकि समाधान के लिए आए साधन नगर परिषद परिसर में खड़े-खाड़े कबाड़ में बदलते जा रहे हैं। अब शहरवासी पूछ रहे हैं इसका जिम्मेदार कौन है।
संचालन की उठी मांग
जिला व्यापार मंडल के प्रधान सुरेश पांडवानिया, उपप्रधान संदीप फोगाट, राजेश जांगड़ा, राजेश मित्तल आदि ने जिला प्रशासन और नगर परिषद के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए।

लोगों ने जल्द ही इन मिनी ट्रैक्टरों को दुरुस्त कर शहर की तंग गलियों में कचरा उठान और पानी निकासी के लिए उपयोग में लाने की मांग की है।

वर्सन:
सांसद कोटे से मिले मिनी ट्रैक्टरों की ट्रॉलियों के लिए हमने निविदाएं आवंटित की गई है। निविदाएं खुलने के बाद हमे मिनी ट्रॉलियां मिल जाएगी। इसके बाद दोनों ट्रैक्टरों को फील्ड में उतार दिया जाएगा।-राजेश कुमार, सीएसआई, नगर परिषद।
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