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Charkhi Dadri News: जल संचयन के लिए जमीन में एक मीटर गहराई तक ही बनाएं सोख्ता गड्ढा
Mon, 16 Jun 2025 10:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 16 Jun 2025 10:16 PM IST
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फोटो 29
काकड़ौली सरदारा गांव में बनाया गया भूमिगत जलकुंड। संवाद
मानसून सीजन में जिलावासी खाली प्लाॅट, खेत, बाग और गांव की शामलात जमीन में बना सकते हैं सोख्ता गड्ढे, जल संचयन में मिलेगी मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मानसून सीजन नजदीक है। जिले का भूमिगत जलस्तर काफी नीचे है। ऐसे में सिंचाई विभाग की जल संचयन शाखा की आम लोगों के लिए सलाह है कि भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए एक मीटर गहरा सोख्ता गड्ढा बनाएं।
विशेषज्ञों की मानें तो एक मीटर की गहराई तक केमिकल रिएक्शन नहीं होता है। पानी जमीन के स्रोतों में चला जाता है। सही तरीके से रिचार्ज हो जाता है। सोख्ता गड्ढा आम आदमी खाली प्लाॅट, खेत, बाग व गांव की सामलात जमीन में बना सकता है।
मौसम विभाग इस बार समय से एक सप्ताह पहले मानसून आगमन की भविष्यवाणी कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह में मानसून की बारिश होने की संभावना है। इसके लिए पहले से ही तैयारियां करने की जरूरत है। वहीं, दूसरी ओर से जिले के विभिन्न भागों में जल संचयन के लिए पहले से बने सोख्ता गड्ढों की मानसून सीजन से पहले सफाई करवाने की भी जरूरत है। अधिकतर सोख््ता गड्ढे मिट्टी आदि से अट गए हैं। दो साल पहले से गड्ढे बनाए गए थे।
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- पहले से बने हैं 500 सोख्ता गड्ढे
जल संचयन के लिए सरकार की ओर से दो साल पहले सार्वजनिक स्थानों के अलावा गांवों में सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया गया था। ताकि, बारिश के पानी का संचयन हो सके और पानी जमीन में जाने से पानी रिचार्ज हो सके। जिले में करीब 500 सोख्ता गड्ढे पहले से बना रखे हैं। ये गांव की बाहरी सीमा में बना रखे हैं। ताकि, गलियों का पानी इन गड्ढों में एकत्रित होकर जमीन में चला जाए और भूमिगत जल ऊपर आ जाए।
- स्कूल परिसरों में कर रखे हैं बोरिंग
वैसे भी जल संचयन के लिए विभाग ने स्कूल परिसरों में बोरिंग भी कर रखे हैं। ताकि, आसपास का पानी एकत्रित होकर जमीन में चला जाए। 42 राजकीय स्कूलों में यह बोरिंग कर रखे हैं। इसी प्रकार, सरकारी भवनों की छतों के पानी का संचयन करने के लिए भी प्रशासन ने व्यवस्था कर रखी है। सरकारी भवनों की छतों से प्रचुर मात्रा में पानी एकत्रित हो जाता है। और सीवर लाइनों में चला जाता है जिसका फायदा नहीं पहुंच पाता है।
- 50 गांवों में लगे हैं जल संकेतक बोर्ड
जल संचयन के लिए समय-समय पर भू-जल शाखा की ओर से भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गांवों में जलस्तर के आंकड़े भी दर्शा रखे हैं। करीब 50 गांवों में जल संकेतक बोर्ड भी लगा रखे हैं। ताकि, लोगों को उस गांव के जलस्तर का पता चल सके। अब मानसून सीजन में 15 दिन शेष है। ऐसे में सभी सोख्ता गड्ढों की सफाई करने की जरूरत है। इनकी सफाई होने से पानी प्रवाह में रुकावट नहीं आएगी और पानी का सही प्रकार से संचयन हो सकेगा।
वर्सन
मानसून की बारिश के पानी के संचयन के लिए सभी प्रकार की तैयारियां कर रखी हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। काफी संख्या में जल संचयन के लिए कुंड व गड्ढे बना रखे हैं। लोगों को गड्ढे बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-खुर्शीद अहमद, जल संचयन एवं सूचना विशेषज्ञ
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काकड़ौली सरदारा गांव में बनाया गया भूमिगत जलकुंड। संवाद
मानसून सीजन में जिलावासी खाली प्लाॅट, खेत, बाग और गांव की शामलात जमीन में बना सकते हैं सोख्ता गड्ढे, जल संचयन में मिलेगी मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मानसून सीजन नजदीक है। जिले का भूमिगत जलस्तर काफी नीचे है। ऐसे में सिंचाई विभाग की जल संचयन शाखा की आम लोगों के लिए सलाह है कि भूमिगत जल को रिचार्ज करने के लिए एक मीटर गहरा सोख्ता गड्ढा बनाएं।
विशेषज्ञों की मानें तो एक मीटर की गहराई तक केमिकल रिएक्शन नहीं होता है। पानी जमीन के स्रोतों में चला जाता है। सही तरीके से रिचार्ज हो जाता है। सोख्ता गड्ढा आम आदमी खाली प्लाॅट, खेत, बाग व गांव की सामलात जमीन में बना सकता है।
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मौसम विभाग इस बार समय से एक सप्ताह पहले मानसून आगमन की भविष्यवाणी कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह में मानसून की बारिश होने की संभावना है। इसके लिए पहले से ही तैयारियां करने की जरूरत है। वहीं, दूसरी ओर से जिले के विभिन्न भागों में जल संचयन के लिए पहले से बने सोख्ता गड्ढों की मानसून सीजन से पहले सफाई करवाने की भी जरूरत है। अधिकतर सोख््ता गड्ढे मिट्टी आदि से अट गए हैं। दो साल पहले से गड्ढे बनाए गए थे।
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- पहले से बने हैं 500 सोख्ता गड्ढे
जल संचयन के लिए सरकार की ओर से दो साल पहले सार्वजनिक स्थानों के अलावा गांवों में सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया गया था। ताकि, बारिश के पानी का संचयन हो सके और पानी जमीन में जाने से पानी रिचार्ज हो सके। जिले में करीब 500 सोख्ता गड्ढे पहले से बना रखे हैं। ये गांव की बाहरी सीमा में बना रखे हैं। ताकि, गलियों का पानी इन गड्ढों में एकत्रित होकर जमीन में चला जाए और भूमिगत जल ऊपर आ जाए।
- स्कूल परिसरों में कर रखे हैं बोरिंग
वैसे भी जल संचयन के लिए विभाग ने स्कूल परिसरों में बोरिंग भी कर रखे हैं। ताकि, आसपास का पानी एकत्रित होकर जमीन में चला जाए। 42 राजकीय स्कूलों में यह बोरिंग कर रखे हैं। इसी प्रकार, सरकारी भवनों की छतों के पानी का संचयन करने के लिए भी प्रशासन ने व्यवस्था कर रखी है। सरकारी भवनों की छतों से प्रचुर मात्रा में पानी एकत्रित हो जाता है। और सीवर लाइनों में चला जाता है जिसका फायदा नहीं पहुंच पाता है।
- 50 गांवों में लगे हैं जल संकेतक बोर्ड
जल संचयन के लिए समय-समय पर भू-जल शाखा की ओर से भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गांवों में जलस्तर के आंकड़े भी दर्शा रखे हैं। करीब 50 गांवों में जल संकेतक बोर्ड भी लगा रखे हैं। ताकि, लोगों को उस गांव के जलस्तर का पता चल सके। अब मानसून सीजन में 15 दिन शेष है। ऐसे में सभी सोख्ता गड्ढों की सफाई करने की जरूरत है। इनकी सफाई होने से पानी प्रवाह में रुकावट नहीं आएगी और पानी का सही प्रकार से संचयन हो सकेगा।
वर्सन
मानसून की बारिश के पानी के संचयन के लिए सभी प्रकार की तैयारियां कर रखी हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। काफी संख्या में जल संचयन के लिए कुंड व गड्ढे बना रखे हैं। लोगों को गड्ढे बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-खुर्शीद अहमद, जल संचयन एवं सूचना विशेषज्ञ