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Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Lord Ram name appears in names of only 5 out of 167 villages in Dadri

Dadri: पांच ऐसे गांव जिनके नाम में राम; हर गांव के नाम रखने का अपना अलग इतिहास, पढ़ें रिपोर्ट

Fri, 19 Jan 2024 06:46 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, दादरी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, दादरी (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 19 Jan 2024 06:46 PM IST
सार

रामनगर, रामबास, रामलवास, जगरामबास और रामपुरा दादरी जिले के ऐसे गांव हैं, जिनसे राम शब्द जुड़ा है। प्रत्येक गांव के नाम रखने का अपना अलग इतिहास है। पढ़ें किस गांव का कैसे पड़ा नाम...

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Lord Ram name appears in names of only 5 out of 167 villages in Dadri
Ram - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दादरी में 167 गांव और 165 ग्राम पंचायतें हैं। 167 में से 2.99 फीसदी यानि पांच गांव ऐसे हैं, जिनके नाम में राम आता है। इन गांवों में भी 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले रामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का लाइव प्रसारण दिखाने और श्रद्धाभाव से कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारियां चल रहीं हैं। प्रत्येक गांव के नाम रखने का अपना अलग इतिहास है। रामनगर, रामबास, रामलवास, जगरामबास और रामपुरा दादरी जिले के ऐसे गांव हैं, जिनसे राम शब्द जुड़ा है। कार्यक्रम उन्हीं मंदिर में आयोजित किया जाएगा, जिनमें राम से जुड़ी कोई मूर्ति या हनुमानजी विराजमान हैं।

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बता दें कि गांव जगरामबास की आबादी लगभग 2900 है। रामबास की आबादी करीब तीन हजार है। रामलवास की आबादी चार हजार है और मतदाताओं की संख्या 1733 है। गांव रामपुरा की आबादी 4500 है और रामनगर की आबादी 2000 है।
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जानिये...किस गांव का कैसे पड़ा नाम
1- जगराम ने बसाया था जगरामबास गांव
सरपंच प्रतिनिधि देवेंद्र कुमार ने बताया कि कई साल पहले जगराम नामक एक व्यक्ति ने यहां आकर शरण ली थी। बाद में जैसे-जैसे आबादी बढ़ी तो गांव का नाम तय किया गया। सबसे पहले जगराम का निवास होने कारण उसके नाम पर ही गांव का नाम जगरामबास रखा गया। गांव में दो मंदिर हैं। इनमें से बाबा गोपालदास के मंदिर में कार्यक्रम होगा। 22 जनवरी को मंदिर में अयोध्या का लाइव प्रसारण दिखाया जाएगा। इसके बाद शाम को पूरे गांव के घरों में दीपक जलाएं जाएंगे और मंदिर में भजन संध्या की जाएगी।
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2- अनाथ चैनाराम के नाम पर बसा गांव रामबास
रामबास गांव के सरपंच सुधीर शर्मा ने बताया कि करीब 250 साल पहले भूरावास से एक महाराज कृपानाथ ने इस स्थान पर आकर अपनी तपस्या आरंभ की थी। उसके बाद एक अनाथ व्यक्ति चैनराम भी यहां महाराज के पास रहने लगे। बाद में जब गांव बसा तो उस समय गांव का नाम चैना हटाकर रामबास किया गया। उन्होंने बताया कि 22 जनवरी को आयोजन गांव के बाबा कृपानाथ मंदिर में किया जाएगा।

3- 450 साल पहले रमलू ने रखी थी रामलवास गांव की नींव
रामलवास के सरपंच प्रतिनिधि विनोद कुमार ने बताया कि आज से लगभग 450 साल पहले रमलू नामक एक व्यक्ति ने रामलवास गांव को बसाया था, तब से उसी के नाम से ही गांव का नाम चला आ रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में पांच मंदिर हैं। 22 जनवरी को गांव के बालाजी मंदिर में सुबह हवन होगा। बाद में अयोध्या प्रसारण, इसके बाद शाम को भजन, आरती व गांव में दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मंदिर को रंग- बिरंगी लड़ियों से सजाया जा रहा है।

4-भगवान राम में आस्था के कारण गांव का नाम पड़ा रामनगर
रामनगर के सरपंच प्रतिनिधि सतपाल सांगवान ने बताया कि गांव का नाम बुजुर्गों ने भगवान राम में आस्था के होने के कारण रखा था। उनका मानना था कि राम राज्य में सब सुखी रहते हैं। उन्होंने बताया कि गांव के शिव मंदिर में 22 जनवरी को भजन व भंडारे का आयोजन किया जाएगा। साथ ही पूरे गांव में दीप जलाए जाएंगे।


5- रामपुरा में करवाई जा रही सफाई
गांव रामपुरा के सरपंच प्रतिनिधि पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि गांव में चार मंदिर हैं। इनमें से बालाजी मंदिर में कार्यक्रम किया जाएगा। फिलहाल गांव के सभी मंदिरों की सफाई की जा रही है। गांव के नाम में राम का नाम होना सुखद अनुभव है। उन्होंने कहा 21 जनवरी को पूरे गांव में दीपक जलाने के लिए मुनादी करवाई जाएगी।

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