Dadri: इस्लाम ने भात भरकर निभाया धर्मभाई का फर्ज, मंदिर और गोशाला के लिए भी दिया दान, 14 भाती पहुंचे
दादरी शहर में मुस्लिम समुदाय के इस्लाम ने हिंदू रीति-रिवाज अनुसार रितू का भात भरकर धर्मभाई का फर्ज अदा किया है। लता ने इस्लाम को 22 साल पहले राखी बांधकर धर्मभाई बनाया था और उस दौरान वो एक ही किराये के मकान में रहते थे।
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मूलरूप से उत्तराखंड निवासी और पिछले 30 सालों से दादरी शहर में रह रहे लक्ष्मण की बेटी रितू का भात रविवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भरा। लक्ष्मण का साला मजबूरीवश भात भरने नहीं आ सका तो 22 साल पहले धर्मभाई बनाए गए इस्लाम ने मुस्लिम इंतजामिया कमेटी पदाधिकारियों को साथ लाकर हिंदू रीति-रिवाज अनुसार रितू का भात भरा। दो मजहबों के लोगों के बीच यह भाईचारा चर्चा का विषय बना रहा।
मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को धर्मभाई बनाकर बांधी थी राखी
लक्ष्मण ने बताया कि उसकी बेटी रितू की 23 अप्रैल को शादी हुई। उन्होंने बताया कि भात की रस्म अदा करने उसकी पत्नी लता के घर से कोई नहीं आ सका। उन्होंने बताया कि उसकी पत्नी लता ने 22 साल पहले राखी बांधकर मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति इस्लाम को धर्मभाई बनाया था और उस दौरान वो एक ही किराये के मकान में रहते थे।
मुस्लिम समुदाय के 14 लोग रविवार को पहुंचे भाती बनकर
लक्ष्मण ने बताया कि पिछले 22 सालों से उसकी पत्नी लगातार इस्लाम को हर रक्षाबंधन पर राखी बांधती है और दोनों परिवार एक-दूसरे के पारिवारिक और धार्मिक आयोजनों में शरीक होते हैं। लक्ष्मण ने बताया कि इस्लाम को जब पता चला कि लता के मायके से भात भरने कोई नहीं आ रहा तो उसने स्वयं परिवार समेत भात भरने की पेशकश की। इस पर लक्ष्मण ने इस्लाम का आग्रह स्वीकार कर लिया। रविवार को इस्लाम मुस्लिम समुदाय के 14 लोगों के साथ भाती बनाकर लक्ष्मण और लता के घर पहुंचा और हिंदू रीति-रिवाज अनुसार भात भरने की रस्म अदा की।
दरवाजे पर तिलक लगाकर किया स्वागत, आंगन में लिया भात
भात भरने आए इस्लाम मलिक और उसके साथियों का लता ने दरवाजे पर तिलक लगाकर स्वागत किया। प्रवेश द्वार पर ही भातियों का मुंह मीठा करवाया गया। इसके बाद आंगन में बैठकर भात भरने की रस्म पूरी की गई। भात कार्यक्रम में मोहम्मद इब्राहिम, मोहम्मद इमरान, अख्तर, शाहिन, सुभान अली, हनीफ, इकबाल, नासिर, शौकीन मलिक, शेरखान, सुरेंद्र, सुब्बे, महिंद्र व राजूद्दीन आदि पहुंचे।
मंदिर व गोशाला के लिए दिया 100-100 रुपये दान
भात में इस्लाम ने 15 हजार रुपये, 25 पेंट- शर्ट, 25 लेडीज सूट व अन्य शगुन का सामान और रितू के गहने लेनदेन पूरा किया। भात के दौरान मुस्लिम इंतजामिया कमेटी सदस्यों ने गोशाला व मंदिर में हिंदू रिवाज के अनुसार 100-100 रुपये दान किए।
दोनों परिवार मिलकर मनाते हैं एक-दूसरे के त्योहार : मोहम्मद शरीफ
मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के प्रधान मोहम्मद शरीफ और सचिव अब्बास अंसारी ने बताया कि दोनों परिवार पिछले दो दशकों से सभी त्योहार मिलजुल कर मनाते हैं। उन्होंने बताया कि इस्लाम विभिन्न गांवों में फेरी लगाकर कपड़े बेचने का कार्य करता है। मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू बहन की बेटी में भात भरने की पहल करना एक आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की है।