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पहल: एक साल में 500 लोग मरणोपरांत नेत्रदान के लिए आगे आए

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Nov 2022 11:33 PM IST
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Initiative: 500 people came forward for eye donation posthumously in a year
चरखी दादरी। नेत्रदान जैसी सराहनीय पहल किसी की आंखों को उजियारा दे सकती है। यह बात जिले के लोग अच्छी तरह से समझते हैं। यही कारण है कि पिछले एक साल में करीब 500 लोग मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए आगे आए हैं। इनमें 40 से 60 साल के लोगों की संख्या अधिक है। इन सभी ने नेत्रदान फार्म भरकर स्वास्थ्य विभाग को सौंपे हैं और मरणोपरांत अपनी आंखें दान करने की इच्छा जाहिर की है।
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दरअसल, लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग गत एक साल से प्रयासरत है। इसके लिए समय-समय पर अलग-अलग गांवों में कैंप लगाए जाते हैं। इन कैंप में लोगों को नेत्रदान के फायदे बताए जाते हैं और जो लोग इसके लिए तैयार हो जाते हैं, उनके विभाग की ओर से फार्म भरवाए जाते हैं। पिछले एक साल की बात करें तो विभाग करीब 50 कैंप आयोजित कर चुका है और इन कैंप पांच सौ लोग नेत्रदान के लिए आगे आए हैं, जो सराहनीय पहल है।
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इतना ही नहीं जिले के दो लोग ऐसे भी हैं जिनकी आंखों को नेत्रदान के जरिये रोशन मिली है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग नेत्र जांच ब्लॉक के अधिकारियों ने की है। उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए उक्त दोनों लोगों का नाम तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन ये जरूर बताया कि दोनों की आंखों को रोहतक पीजीआई के जरिये रोशनी मिली है। इनका कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया है।
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- 100 महिलाओं ने भी भरे फार्म
सिविल अस्पताल के नेत्र जांच ब्लॉक स्टाफ की मानें तो गत एक साल में 100 महिलाएं भी नेत्रदान के लिए आगे आई हैं। इनके अलावा 400 पुरुषों ने मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए फार्म भरकर विभाग को सौंपा है। विभाग के पास जो 500 फार्म जमा हुए हैं, उनमें से अधिकतर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों ने भरे हैं।
- यहां लगाए गए कैंप
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न जगह कैंप लगाए गए हैं। ये कैंप गांवों की चौपाल, वृद्धाश्रम और पंचायत घर में लगाए गए हैं। इसके अलावा कुछ शिक्षण संस्थानों में भी कैंप लगाकर विद्यार्थियों और युवाओं को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया है।
- एक व्यक्ति दो लोगों के जीवन में कर सकता है उजियारा
नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को आंख की रोशनी का लाभ होता है। एक नेत्रहीन व्यक्ति को एक आंख दी जाती है। नेत्र प्रत्यारोपण प्रतीक्षा सूची के क्रमानुसार ही की जाती है। आंखों को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता। नेत्रदान करने से पहले अंगदाता के परिवार की अनुमति ली जाती है।

नेत्रदान के प्रति अब लोगों को नजरिया बदल रहा है। दादरी जिले ने भी इसमें मिसाल पेश की है। पिछले एक साल में करीब 500 लोग मरणोपरांत नेत्रदान की इच्छा जाहिर कर फार्म भरकर टीम के पास जमा करवा चुके हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
-डॉ. कृष्ण कुमार, सीएमओ, चरखी दादरी
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