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मन में संतोष नहीं तो धन-दौलत बेकार : स्वामी भुवन
Mon, 29 Apr 2024 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 29 Apr 2024 03:54 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु।
चरखी दादरी। संत स्वामी रामानंद महाराज और स्वामी मंगलानंद महाराज के आशीर्वाद से रंगीला हनुमान मंदिर स्थित अमर शहीद मदन लाल ढींगड़ा सभागार में सनातन धर्म सभा, संकट मोचन हनुमान मंदिर और महिला मंडल के सहयोग से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन किया गया। इसमें महाराज ने सुबह नौ बजे सुदामा चरित्र एवं श्रीराम कथा का गुणगान किया।
स्वामी भुवन चैतन्य महाराज ने सुदामा के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अपार धन होने के बाद भी अगर मन में संतोष नहीं है तो धन-दौलत बेकार है। भक्त सुदामा गरीब थे, लेकिन मन के संतोषी थे। इसलिए अंत में उसे भगवान की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि मित्रता में गरीबी और अमीरी नहीं देखनी चाहिए। भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा की गरीबी को देखकर रोते हुए अपने राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें उलाहना दिया कि जब गरीबी में रह रहे थे तो अपने मित्र के पास तो आ सकते थे लेकिन सुदामा ने मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा।
उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। इसके बाद रामकथा का गुणगान करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया। रविवार को दोपहर 12 बजे भंडारा लगाया गया। इस मौके पर किरण सतीश वधवा व रंगीला मंदिर की महिला मंडल यजमान बना। कार्यक्रम में अशोक अरोड़ा, पुष्पा नागपाल, सुमन दुआ, राज कुमारी, अमित मुंजाल, विक्की मुंजाल, हंसराज पटवारी, राम दयाल पाहवा, वासुदेव आनंद, नंदलाल ठुकराल आदि मौजूद रहे।
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स्वामी भुवन चैतन्य महाराज ने सुदामा के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अपार धन होने के बाद भी अगर मन में संतोष नहीं है तो धन-दौलत बेकार है। भक्त सुदामा गरीब थे, लेकिन मन के संतोषी थे। इसलिए अंत में उसे भगवान की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि मित्रता में गरीबी और अमीरी नहीं देखनी चाहिए। भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा की गरीबी को देखकर रोते हुए अपने राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें उलाहना दिया कि जब गरीबी में रह रहे थे तो अपने मित्र के पास तो आ सकते थे लेकिन सुदामा ने मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा।
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उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। इसके बाद रामकथा का गुणगान करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया। रविवार को दोपहर 12 बजे भंडारा लगाया गया। इस मौके पर किरण सतीश वधवा व रंगीला मंदिर की महिला मंडल यजमान बना। कार्यक्रम में अशोक अरोड़ा, पुष्पा नागपाल, सुमन दुआ, राज कुमारी, अमित मुंजाल, विक्की मुंजाल, हंसराज पटवारी, राम दयाल पाहवा, वासुदेव आनंद, नंदलाल ठुकराल आदि मौजूद रहे।
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