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Charkhi Dadri News: बाढड़ा का ऐतिहासिक किला अस्तित्व की लड़ाई में, जीर्णोद्धार की मांग

Tue, 06 Oct 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 06 Oct 2026 01:47 AM IST
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Historic fort of Badhra fighting for survival; demand for restoration.
खंडहर बना बाढड़ा का किला। 
बाढड़ा। कभी ''काले पानी'' के नाम से मशहूर बाढड़ा का पुराना किला आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। इसकी अधिकतर दीवारें टूट चुकी हैं और मुख्य द्वार भी खस्ताहाल है। किले के अंदर अधिकांश कमरे जमींदोज हो गए हैं। अवैध कटाई के कारण हरियाली भी खत्म हो चुकी है, सिर्फ घास-फूस बचा है।
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जींद रियासत के अंतिम राजा ने चोरी रोकने के लिए इसे बाढड़ा गांव के सबसे ऊंचे टीले पर बनवाया था। यह किला सैनिकों की बटालियन के लिए था। कुछ समय बाद इसे अस्थायी जेलखाने में बदल दिया गया। जींद रियासत से जुड़े आठ जिलों के कैदियों को यहां यातनाएं दी जाती थीं। ''काले पानी'' के नाम से यह किला इतना कुख्यात था कि दोषी इसके नाम से कांपते थे। छोटी कोठरियां आज भी घोर यातनाओं की गवाह हैं।
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बुजुर्गों के अनुसार, किले में कैदियों को नाममात्र का खाना मिलता था। उन्हें खाने में नमक दिया जाता था और पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई कैदियों को छोटी कोठरियों में बंद कर दिया जाता था। वे वहां आराम से बैठ भी नहीं पाते थे। कुछ दिनों में वे दम तोड़ देते या विकलांग हो जाते थे। ग्रामीणों की मान्यता है कि इस ऐतिहासिक स्थल पर उनका कभी अहित नहीं हुआ।
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उपेक्षा का दौर और वर्तमान हालात
''काले पानी'' की पहचान हटने के बाद किले में पुलिस थाने का कामकाज शुरू हुआ। इसे नए राज्य में मान्यता मिली और यह पुलिस स्टेशन 1998 तक प्रयोग हुआ। उसके बाद इसे नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। थाने के हटने के बाद से ही किले की उपेक्षा शुरू हो गई। लगभग चार एकड़ में बने इस किले की वर्तमान हालत बहुत दयनीय है।

सामाजिक संगठनों की जीर्णोद्धार की मांग
क्षेत्र के सामाजिक संगठन इस किले को स्मारक स्थल बनाने की मांग कर रहे हैं। श्योराण खाप 25 के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह बेरला ने यह बात कही। केंद्रीय सहकारी बैंक भिवानी के अध्यक्ष सुधीर चांदवास भी इस मांग में शामिल हैं। पंचायत समिति अध्यक्ष आनंद फौजी और बाढड़ा के सरपंच राजेश श्योराण ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक धरोहर है और प्रदेश सरकार को इसके जीर्णोद्धार पर ध्यान देना चाहिए। सरकारी तंत्र इसे पर्यटन स्थल का रूप दे सकता है।
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