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6 बीएलएस एंबुलेंस को एसीएलएस में अपग्रेड करेगा स्वास्थ्य विभाग, रोडवेज ने भी दीं दो बसें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jan 2022 11:21 PM IST
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Health department will upgrade 6 BLS ambulances to ACLS, roadways also gave two buses
चरखी दादरी।
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कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग अपने प्रबंधों को और पुख्ता करने में जुट गया है। इसी कड़ी में छह बीएलएस एंबुलेंस (बेसिक लाइफ सपोर्ट ) को एसीएलएस (एडवांस कार्डियो लाइफ सपोर्ट ) एंबुलेंस में अपग्रेड किया जाएगा। यह काम एक सप्ताह के अंदर पूरा हो जाएगा और इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के पास वेंटिलेटर सुविधायुक्त आठ एंबुलेंस हो जाएंगी। इस समय विभाग के बेड़े में 21 एंबुलेंस हैं। दूसरी ओर रोडवेज विभाग की तरफ से भी स्वास्थ्य विभाग को दस चालक दिए गए हैं और इनके अलावा दो मिनी बसें देने की भी योजना है।
गत 28 दिसंबर के बाद से जिले में कोरोना के केस लगातार सामने आ रहे हैं। इसके मद्देनजर विभाग सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर इंतजाम को पुख्ता करने में जुटा है और हाल ही में ऑक्सीजन सिलिंडर समेत इन स्वास्थ्य केंद्रों पर बेड की संख्या बढ़ाई गई है। संसाधनों को ओर बेहतर करने की दिशा में अब स्वास्थ्य विभाग ने एक और कदम बढ़ाया है। इस बार विभाग ने एंबुलेंस को अपग्रेड करने पर ध्यान दिया है।
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जिला स्वास्थ्य विभाग के बेड़े की बात करें तो इस समय दो एसीएलएस एंबुलेंस हैं। ये एंबुलेंस रेडक्रॉस से मिली हुई हैं और जिन्हें हाल ही में ऑन रोड लाने की अनुमति मिली है। इन एंबुलेंस में कार्डियो समेत वेंटिलेटर, ईसीजी मशीन, ऑटोमेटिक इलेक्ट्रिक डी-फेबरीलेटर समेत अन्य सुविधाएं हैं। दूसरी ओर विभाग के बेड़े में जो 12 बीएलएस एंबुलेंस हैं उनमें वेंटिलेटर सुविधा नहीं है। अब स्वास्थ्य विभाग ने छह बीएलएस को एसीएलएस में अपग्रेड करनी की योजना तैयार की है और इसके लिए मुख्यालय से आवश्यक सामान भी भेजा चुका है। एंबुलेंस प्रभारी उमेश सांगवान ने बताया कि करीब एक सप्ताह में इंजीनियर आकर छह बीएलएस एंबुलेंस में वेंटिलेटर सुविधा शुरू कर देगा और इसके बाद वेंटिलेटर सुविधा से युक्त एंबुलेंस की संख्या आठ हो जाएगी।
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- विभाग के पास हैं 15 ईएमटी और 31 चालक -
स्वास्थ्य विभाग के पास 21 एंबुलेंस हैं और इन्हें चलाने के लिए 31 चालक हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास 15 ईएमटी भी हैं जो रेफर किए गए मरीज की पीजीआई पहुंचने तक निगरानी के साथ आवश्यक उपचार देते हैं। एंबुलेंस की संख्या के मुताबिक विभाग के पास ईएमटी और चालकों की कमी भी है। चालकों की कमी को दूर करने के लिए रोडवेज से 10 चालक भेजे गए हैं। ये चालक स्वास्थ्य विभाग के वाहनों का संचालन करने के साथ टीम को एक से दूसरे स्थान पर छोड़ने और सामान लाने ले जाने का काम करेंगे।
- विभाग ने की पांच बसों की डिमांड, परिवहन विभाग ने दो बसों की भरी हामीं -
स्वास्थ्य विभाग ने संसाधनों की संख्या बढ़ाने के लिए चालकों के अलावा परिवहन विभाग से पांच बसों की भी मांग की थी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अनुसार दस चालक तो उन्हें मिल गए हैं, लेकिन पांच बसों की डिमांड करने पर फिलहाल दो बसें देने की हामीं परिवहन विभाग की तरफ से भरी गई है। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारी ने जरूरत पड़ने पर और बसें मुहैया करवाने का आश्वासन भी दिया है।
- विभाग के पास हैं चार प्रकार की एंबुलेंस -
स्वास्थ्य विभाग के पास इस समय चार प्रकार की एंबुलेंस हैं जिनमें एसीएलएस, बीएलएस, पीटीएस और एमएमवी शामिल हैं। इनका स्थिति अनुसार प्रयोग किया जाता है।
- जानिए....किस एंबुलेंस में क्या-क्या हैं सुविधा
1- एसीएसएल: यह एंबुलेंस आधुनिक सभी प्रकार की सुविधा से लैस है। इसमें हार्ट बीट रुकने पर ऑटोमेटिक इलेक्ट्रोनिक शॉक देने, वेंटिलेटर, ईसीजी मॉनीटर, डबल ऑक्सीजन सिलिंडर की सुविधा है। फिलहाल ऐसी दो एंबुलेंस हैं।
2- बीएलएस: बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में वेंटिलेटर को छोड़कर अन्य सुविधाएं एसीएलएस की तर्ज पर होती हैं। विभाग के बेड़े में इस समय 12 बीएलएस शामिल हैं। इनमें से छह एंबुलेंस को अपग्रेड किया जाएगा जबकि छह ऐसे ही रखी जाएंगी।
3- पीटीएस: पेसेंट ट्रांसपोर्ट एंबुलेंस में केवल स्ट्रेचर की सुविधा होती है। यह एंबुलेंस ज्यादतर डिलिवरी केस में महिला को घर से अस्पताल और फिर अस्पताल से घर छोड़ने में प्रयोग की जाती है। जिला स्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल ऐसी छह एंबुलेंस हैं।
4- एमएमयू: मेडिकल मोबाइल यूनिट स्वास्थ्य विभाग के पास एक है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए लेकर जाती है। इसमें विभिन्न प्रकार के टेस्ट की सुविधा है। हाल ही में एक एमएयू स्वास्थ्य विभाग को मिली है।

वर्जन::
छह बीएलएस एंबुलेंस को हम एसीएलएस में अपग्रेड करवा रहे हैं। इसके तहत इन एंबुलेंस में भी वेंटिलेटर सुविधा हो जाएगी। रोडवेज ने हमें दस चालक दिए हैं जबकि दो बसें भी देने की हामीं भरी है।
- डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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