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Charkhi Dadri News: लागत कम होने से गेहूं के बजाय सरसों की खेती ज्यादा पसंद कर रहे हैं किसान
Mon, 04 Nov 2024 03:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 04 Nov 2024 03:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। गेहूं के बजाय जिले के किसान सरसों की खेती ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसका कारण सरसों में लागत खर्च कम होना भी है। वहीं, लावारिस पशु भी गेहूं की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। इसके चलते भी किसान सरसों की बिजाई करते हैं।
किसान गेहूं की अगेती बिजाई 25 नवंबर तक कर सकते हैं। उसके बाद पछेती बिजाई 25 दिसंबर तक की जा सकेगी। जिले में हर साल करीब 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई हो जाती है। सरसों की बिजाई हर साल 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हो जाती है।
इस समय किसान गेहूं की बिजाई के लिए खेत की तैयारियों में जुटे हैं। खेतों की जुताई की जा रही है। गेहूं की बिजाई के लिए किसान डीएपी की खरीद कर रहे हैं। जिले के तकरीबन सभी भागों में गेहूं की खेती संभव है। रेतीली, दोमट व चिकनी मिट्टी में भी गेहूं की खेती होती है।
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हालांकि, जिले में गेहूं की बिजाई का आंकड़ा ज्यादा नहीं रहता है। किसान गेहूं के बजाय सरसों की बिजाई को ज्यादा महत्व देते हैं। सरसों का सरकारी रेट ज्यादा होने व इस पर लागत खर्च कम आने की वजह से किसान सरसों की खेती ज्यादा पसंद करते हैं। सरसों की फसल में सिंचाई की भी कम ही जरूरत होती है।ग
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चरखी दादरी। गेहूं के बजाय जिले के किसान सरसों की खेती ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसका कारण सरसों में लागत खर्च कम होना भी है। वहीं, लावारिस पशु भी गेहूं की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। इसके चलते भी किसान सरसों की बिजाई करते हैं।
किसान गेहूं की अगेती बिजाई 25 नवंबर तक कर सकते हैं। उसके बाद पछेती बिजाई 25 दिसंबर तक की जा सकेगी। जिले में हर साल करीब 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई हो जाती है। सरसों की बिजाई हर साल 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हो जाती है।
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इस समय किसान गेहूं की बिजाई के लिए खेत की तैयारियों में जुटे हैं। खेतों की जुताई की जा रही है। गेहूं की बिजाई के लिए किसान डीएपी की खरीद कर रहे हैं। जिले के तकरीबन सभी भागों में गेहूं की खेती संभव है। रेतीली, दोमट व चिकनी मिट्टी में भी गेहूं की खेती होती है।
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हालांकि, जिले में गेहूं की बिजाई का आंकड़ा ज्यादा नहीं रहता है। किसान गेहूं के बजाय सरसों की बिजाई को ज्यादा महत्व देते हैं। सरसों का सरकारी रेट ज्यादा होने व इस पर लागत खर्च कम आने की वजह से किसान सरसों की खेती ज्यादा पसंद करते हैं। सरसों की फसल में सिंचाई की भी कम ही जरूरत होती है।ग