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Charkhi Dadri News: नेत्रदान है महादान...जिले के लोग इस बात से अब नहीं अनजान
Wed, 13 Aug 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 13 Aug 2025 01:06 AM IST
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फोटो 16 दादरी नागरिक अस्पताल में नेत्र जांच कराती बुजुर्ग महिला। संवाद
अंगदान दिवस विशेष
फोटो 16
दादरी नागरिक अस्पताल में नेत्र जांच कराती बुजुर्ग महिला। संवाद
फोटो 17
आई सर्जन डॉ. वरुण मित्तल। संवाद
- हर साल दादरी जिले में 200 से अधिक लोग मरणोपरांत नेत्रदान करने का भरते हैं फार्म, इस साल दो मृत लोगों की आंखों ने 4 के जीवन में किया उजियारा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। नेत्रदान जैसी सराहनीय पहल किसी की आंखों को उजियारा दे सकती है। यह बात जिले के लोग अच्छी तरह से समझते हैं। यही कारण है कि पिछले एक साल में करीब 200 लोग मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए आगे आए हैं। इनमें 40 से 60 साल के लोगों की संख्या अधिक है। इन सभी ने नेत्रदान फार्म भरकर स्वास्थ्य विभाग को सौंपकर मरणोपरांत अपनी आंखें दान करने की इच्छा जाहिर की है। वहीं, इस साल नेत्रदान के जरिये चार लोगों की आंखों को रोशनी मिली है।
दरअसल, लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है। इसके लिए समय-समय पर अलग-अलग गांवों में कैंप लगाए जाते हैं। इन कैंप में लोगों को नेत्रदान के फायदे बताए जाते हैं। जो लोग इसके लिए तैयार हो जाते हैं, उनके विभाग की ओर से फार्म भरवाए जाते हैं। पिछले एक साल की बात करें तो विभाग करीब 40 कैंप आयोजित कर चुका है। इन कैंपों में 200 लोग नेत्रदान के लिए आगे आए हैं, जो सराहनीय पहल है।
इतना ही नहीं, पिछले पांच सालों में जिले के पांच लोगों ने मरने के बाद 10 लोगों की आंखों को रोशनी दी है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग नेत्र जांच ब्लॉक के अधिकारियों ने की है। उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए उक्त दोनों लोगों का नाम तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन ये जरूर बताया कि सभी की आंखों को रोहतक पीजीआई के जरिये रोशनी मिली है। वहां कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया है।
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- 50 महिलाओं ने भी भरे फार्म
नागरिक अस्पताल के नेत्र जांच ब्लॉक स्टाफ की मानें तो गत एक साल में 50 महिलाएं भी नेत्रदान के लिए आगे आई हैं। इनके अलावा, 150 पुरुषों ने मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए फार्म भरकर विभाग को सौंपा है। विभाग के पास जो फार्म जमा हुए हैं, उनमें से अधिकतर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों ने भरे हैं।
- यहां लगाए गए कैंप
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न जगहों पर कैंप लगाए गए हैं। ये कैंप गांवों की चौपाल, वृद्धाश्रम और पंचायत घर में लगाए गए हैं। इसके अलावा, कुछ शिक्षण संस्थानों में भी कैंप लगाकर विद्यार्थियों और युवाओं को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया है। काउंसलर योगेश लोगों को इस बारे में जागरूक करते हैं।
- एक व्यक्ति दो लोगों के जीवन में कर सकता है उजियारा
नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को आंख की रोशनी का लाभ होता है। एक नेत्रहीन व्यक्ति को एक आंख दी जाती है। नेत्र प्रत्यारोपण प्रतीक्षा सूची के क्रमानुसार ही की जाती है। आंखों को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता। नेत्रदान करने से पहले अंगदाता के परिवार की अनुमति ली जाती है। वहीं, मृत्यु के 6 घंटे के अंदर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना होता है।
वर्सन
नेत्रदान के प्रति अब लोगों का नजरिया बदल रहा है। दादरी जिले ने भी इसमें मिसाल पेश की है। इस साल अब तक मरणोपरांत दो लोगों के नेत्रदान से चार व्यक्तियों की आंखों को रोशनी मिली है।
-डॉ. वरुण मित्तल, आई सर्जन, दादरी स्वास्थ्य विभाग
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फोटो 16
दादरी नागरिक अस्पताल में नेत्र जांच कराती बुजुर्ग महिला। संवाद
फोटो 17
आई सर्जन डॉ. वरुण मित्तल। संवाद
- हर साल दादरी जिले में 200 से अधिक लोग मरणोपरांत नेत्रदान करने का भरते हैं फार्म, इस साल दो मृत लोगों की आंखों ने 4 के जीवन में किया उजियारा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। नेत्रदान जैसी सराहनीय पहल किसी की आंखों को उजियारा दे सकती है। यह बात जिले के लोग अच्छी तरह से समझते हैं। यही कारण है कि पिछले एक साल में करीब 200 लोग मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए आगे आए हैं। इनमें 40 से 60 साल के लोगों की संख्या अधिक है। इन सभी ने नेत्रदान फार्म भरकर स्वास्थ्य विभाग को सौंपकर मरणोपरांत अपनी आंखें दान करने की इच्छा जाहिर की है। वहीं, इस साल नेत्रदान के जरिये चार लोगों की आंखों को रोशनी मिली है।
दरअसल, लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है। इसके लिए समय-समय पर अलग-अलग गांवों में कैंप लगाए जाते हैं। इन कैंप में लोगों को नेत्रदान के फायदे बताए जाते हैं। जो लोग इसके लिए तैयार हो जाते हैं, उनके विभाग की ओर से फार्म भरवाए जाते हैं। पिछले एक साल की बात करें तो विभाग करीब 40 कैंप आयोजित कर चुका है। इन कैंपों में 200 लोग नेत्रदान के लिए आगे आए हैं, जो सराहनीय पहल है।
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इतना ही नहीं, पिछले पांच सालों में जिले के पांच लोगों ने मरने के बाद 10 लोगों की आंखों को रोशनी दी है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग नेत्र जांच ब्लॉक के अधिकारियों ने की है। उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए उक्त दोनों लोगों का नाम तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन ये जरूर बताया कि सभी की आंखों को रोहतक पीजीआई के जरिये रोशनी मिली है। वहां कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया है।
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- 50 महिलाओं ने भी भरे फार्म
नागरिक अस्पताल के नेत्र जांच ब्लॉक स्टाफ की मानें तो गत एक साल में 50 महिलाएं भी नेत्रदान के लिए आगे आई हैं। इनके अलावा, 150 पुरुषों ने मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए फार्म भरकर विभाग को सौंपा है। विभाग के पास जो फार्म जमा हुए हैं, उनमें से अधिकतर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों ने भरे हैं।
- यहां लगाए गए कैंप
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न जगहों पर कैंप लगाए गए हैं। ये कैंप गांवों की चौपाल, वृद्धाश्रम और पंचायत घर में लगाए गए हैं। इसके अलावा, कुछ शिक्षण संस्थानों में भी कैंप लगाकर विद्यार्थियों और युवाओं को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया है। काउंसलर योगेश लोगों को इस बारे में जागरूक करते हैं।
- एक व्यक्ति दो लोगों के जीवन में कर सकता है उजियारा
नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को आंख की रोशनी का लाभ होता है। एक नेत्रहीन व्यक्ति को एक आंख दी जाती है। नेत्र प्रत्यारोपण प्रतीक्षा सूची के क्रमानुसार ही की जाती है। आंखों को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता। नेत्रदान करने से पहले अंगदाता के परिवार की अनुमति ली जाती है। वहीं, मृत्यु के 6 घंटे के अंदर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना होता है।
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नेत्रदान के प्रति अब लोगों का नजरिया बदल रहा है। दादरी जिले ने भी इसमें मिसाल पेश की है। इस साल अब तक मरणोपरांत दो लोगों के नेत्रदान से चार व्यक्तियों की आंखों को रोशनी मिली है।
-डॉ. वरुण मित्तल, आई सर्जन, दादरी स्वास्थ्य विभाग