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प्रकृति पर ही निर्भर है मानव जीवन का अस्तित्व : बीके वसुधा
Tue, 23 Apr 2024 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 23 Apr 2024 12:14 AM IST
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कादमा सेवा केंद्र पर पेंटिंग दिखाते बच्चे व मौजूद संस्था सदस्य।
कादमा। पर्यावरण व अध्यात्म का गहरा संबंध है। सवेरे जागते ही धरती मां को नमन करना भारतीय संस्कृति है। संपूर्ण मानव का अस्तित्व भी केवल प्रकृति पर निर्भर है। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा में पृथ्वी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी वसुधा ने व्यक्त किए।
बीके वसुधा ने बताया कि पृथ्वी दिवस पर सेवाकेंद्र में पौधरोपण, कविता, पेंटिंग व भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पेंटिंग में नव्या कुमारी ने प्रथम, शिवम ने द्वितीय और रश्मि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कविता में निधि, विधि, केशव, जतिन ने बाजी मारी। भाषण स्पर्धा में आरती, जया, प्रोमिला ने प्रथम तीन स्थानों पर कब्जा किया।
ब्रह्माकुमारी वसुधा ने कहा कि धरती मां बिना किसी स्वार्थ के हमारा पालन पोषण करती है। इसी कारण उन्हें माता का दर्जा दिया गया है। वसुधा ने बच्चों से अपने जन्मदिन और विशेष स्मृति दिवसों पर पौधरोपण करने के लिए प्रेरित किया और अनैतिक कर्म से होने वाले पृथ्वी को होने वाले नुकसानों से बचाव का आह्वान किया। ब्रह्माकुमारी नीलम ने कहा कि पृथ्वी हमारी माता है। मनुष्य के अनैतिकता व अपने स्वार्थ पूर्ति के कारण आज सभी जीवों को संकट में डाल दिया है। आज जल व वायु प्रदूषण के साथ बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग से धरती मां की रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है।
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झोझूकलां सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी ज्योति ने पृथ्वी दिवस के इस वर्ष की थीम वृक्ष बनाम प्लास्टिक है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को प्लास्टिक की दुनिया कह सकते हैं। एक ओर जहां प्लास्टिक ने जीवन को सुगम बनाया, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के लिए खतरनाक व जानलेवा साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि आज धरती पर मानव अस्तित्व को बचाने के लिए प्लास्टिक प्रदूषण निवारण के लिए कठोर कदम उठाने बहुत जरूरी है।
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बीके वसुधा ने बताया कि पृथ्वी दिवस पर सेवाकेंद्र में पौधरोपण, कविता, पेंटिंग व भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पेंटिंग में नव्या कुमारी ने प्रथम, शिवम ने द्वितीय और रश्मि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कविता में निधि, विधि, केशव, जतिन ने बाजी मारी। भाषण स्पर्धा में आरती, जया, प्रोमिला ने प्रथम तीन स्थानों पर कब्जा किया।
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ब्रह्माकुमारी वसुधा ने कहा कि धरती मां बिना किसी स्वार्थ के हमारा पालन पोषण करती है। इसी कारण उन्हें माता का दर्जा दिया गया है। वसुधा ने बच्चों से अपने जन्मदिन और विशेष स्मृति दिवसों पर पौधरोपण करने के लिए प्रेरित किया और अनैतिक कर्म से होने वाले पृथ्वी को होने वाले नुकसानों से बचाव का आह्वान किया। ब्रह्माकुमारी नीलम ने कहा कि पृथ्वी हमारी माता है। मनुष्य के अनैतिकता व अपने स्वार्थ पूर्ति के कारण आज सभी जीवों को संकट में डाल दिया है। आज जल व वायु प्रदूषण के साथ बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग से धरती मां की रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है।
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झोझूकलां सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी ज्योति ने पृथ्वी दिवस के इस वर्ष की थीम वृक्ष बनाम प्लास्टिक है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को प्लास्टिक की दुनिया कह सकते हैं। एक ओर जहां प्लास्टिक ने जीवन को सुगम बनाया, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के लिए खतरनाक व जानलेवा साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि आज धरती पर मानव अस्तित्व को बचाने के लिए प्लास्टिक प्रदूषण निवारण के लिए कठोर कदम उठाने बहुत जरूरी है।