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विकास योजनाओं के लिए जगह नहीं पर नगर परिषद की 8 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण
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नारनौल-दिल्ली मुख्यमार्ग किनारे नगर परिषद की जमीन पर बनाई गईं झुग्गियां।
- फोटो : CharkhiDadri
नगर परिषद का दफ्तर शहर में ही म्यूनिसिपल मार्केट से संचालित किया जा रहा है जबकि परिषद की आठ एकड़ जमीन के हिस्से में अतिक्रमण है। इसके अलावा शहरी विकास के लिए आवश्यक तमाम योजनाएं जगह के अभाव में फाइलों में अटकी पड़ी हैं।
मालूम हो कि 45 साल पहले नगर परिषद ने आठ एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी लेकिन मौजूदा समय में इस जमीन के कुछे हिस्से पर कबाड़ मार्केट चल रही है, जबकि दूसरे हिस्से पर 200 से अधिक परिवारों ने झुग्गियां डालकर अतिक्रमण किया हुआ है। जिले में डिजिटल लाइब्रेरी, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, स्थायी रैन बसेरा, कम्यूनिटी सेंटर आदि बनने प्रस्तावित हैं, लेकिन जगहों का चयन नहीं हो पा रहा है। एक ओर जहां आठ एकड़ जमीन को जिला प्रशासन सदुपयोग में ले सकता है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद भी कई प्रोजेक्टों को परवान चढ़ा सकती है। नप सूत्रों के अनुसार इस जमीन पर पिछले लंबे समय कब्जे किए हुए हैं। यहां 200 से अधिक झुग्गियों में 1500 से ज्यादा लोग रहे हैं। दूसरी ओर नप अधिकारियों का कहना है कि नप की जमीन से कब्जे हटाने की प्रक्रिया जल्द से जल्द अमल में लाई जाएगी।
बिजली मीटर नहीं, झुग्गियों में चल रहे टीवी
इस जमीन पर झुग्गियां बनाकर रहने वाले लोग निगम की फ्री बिजली भी बरत रहे हैं। यहां ज्यादातर झुग्गियों में डिश टीवी की छतरी लगी हुई हैं। ऐसे में यहां टीवी और फ्रिज जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। किसी झुग्गी में बिजली मीटर नहीं है और ये लोग कब्जे के साथ निगम को भी चूना लगा रहे हैं। इस तरफ बिजली निगम का भी ध्यान नहीं है।
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इन प्रोजेक्ट को परवान चढ़ाने के लिए जमीन की दरकार
प्रोजेक्ट:-एक-
नप कार्यालय : नगर परिषद का मौजूदा कार्यालय म्यूनिसिपल मार्केट की दुकानों में चल रहा है। महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप ही नया कार्यालय बनाया जाना प्रस्तावित है। करीब दो साल पहले इसकी रूपरेखा तैयार कर प्रपोजल सरकार के पास भेजा गया था। इसे मंजूरी मिलते ही महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप वाली जमीन पर निर्माण प्रक्रिया शुरू करवाई जानी है।
प्रोजेक्ट:-2:
एमआरएफ सेंटर : नगर परिषद अधिकारियों की एमआरएफ सेंटर बनाने की योजना है, ताकि शहर से निकलने वाले कचरे में से ज्यादातर को शहर में ही निस्तारित कर दिया जाएगा। एमआरएफ सेंटर बनने के बाद महज 20 प्रतिशत कचरा ही डंपिंग यार्ड तक पहुंचेगा और बाकी कचरा एमआरएफ सेंटर पर ही निस्तारित हो जाएगा।
प्रोजेक्ट:-3-
रैन बसेरा : कड़कड़ाती ठंड में लोगों सड़कों पर रात बितानी पड़ रही है। जिले में अब तक स्थायी रैन बसेरा नहीं है। रोज गार्डन में अस्थायी व्यवस्था की गई है, लेकिन यहां चुनिंदा लोगों के रहने की ही व्यवस्था है। महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप खाली पड़ी जमीन पर स्थायी रैन बसेरा बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन ने भी रैन बसेरा के लिए स्थायी जगह तलाशने के निर्देश दिए हुए है।
प्रोजेक्ट:-4-
अनाथ आश्रम और वृद्धाश्रम : जिला प्रशासन या नगर परिषद की ओर से अब तक जिला मुख्यालय पर वृद्धाश्रम या अनाथ आश्रम की व्यवस्था नहीं की गई है। एकमात्र वृद्धा और अनाथ आश्रम इस समय दिल्ली बाईपास पर सामाजिक संस्था चला रही है। नगर परिषद की इस जमीन पर वृद्धाश्रम और अनाथ आश्रम जैसे प्रोजेक्ट भी परवान चढ़ाए जा सकते हैं।
प्रोजेक्ट:-5
कम्यूनिटी सेंटर : मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार शहर में कम्यूनिटी सेंटर भी बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए भी करीब डेढ़ से दो एकड़ जमीन चाहिए। सीएम ने इसके लिए पांच करोड़ की ग्रांट स्वीकृत की है। महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप खाली जमीन पर कम्यूनिटी सेंटर बनाकर नगर परिषद शहरवासियों को सौगात दे सकती है। शहर में एक भी कम्यूनिटी सेंटर नहीं है।
वर्जन::
अगर नगर परिषद की जमीन पर कब्जे किए गए हैं, तो हम मौका देखेंगे। अगर कब्जे पाए गए तो उन्हें जल्द से जल्द हटवा दिया जाएगा।
प्रशांत पाराशर, सचिव, नगर परिषद
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मालूम हो कि 45 साल पहले नगर परिषद ने आठ एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी लेकिन मौजूदा समय में इस जमीन के कुछे हिस्से पर कबाड़ मार्केट चल रही है, जबकि दूसरे हिस्से पर 200 से अधिक परिवारों ने झुग्गियां डालकर अतिक्रमण किया हुआ है। जिले में डिजिटल लाइब्रेरी, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, स्थायी रैन बसेरा, कम्यूनिटी सेंटर आदि बनने प्रस्तावित हैं, लेकिन जगहों का चयन नहीं हो पा रहा है। एक ओर जहां आठ एकड़ जमीन को जिला प्रशासन सदुपयोग में ले सकता है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद भी कई प्रोजेक्टों को परवान चढ़ा सकती है। नप सूत्रों के अनुसार इस जमीन पर पिछले लंबे समय कब्जे किए हुए हैं। यहां 200 से अधिक झुग्गियों में 1500 से ज्यादा लोग रहे हैं। दूसरी ओर नप अधिकारियों का कहना है कि नप की जमीन से कब्जे हटाने की प्रक्रिया जल्द से जल्द अमल में लाई जाएगी।
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बिजली मीटर नहीं, झुग्गियों में चल रहे टीवी
इस जमीन पर झुग्गियां बनाकर रहने वाले लोग निगम की फ्री बिजली भी बरत रहे हैं। यहां ज्यादातर झुग्गियों में डिश टीवी की छतरी लगी हुई हैं। ऐसे में यहां टीवी और फ्रिज जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। किसी झुग्गी में बिजली मीटर नहीं है और ये लोग कब्जे के साथ निगम को भी चूना लगा रहे हैं। इस तरफ बिजली निगम का भी ध्यान नहीं है।
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इन प्रोजेक्ट को परवान चढ़ाने के लिए जमीन की दरकार
प्रोजेक्ट:-एक-
नप कार्यालय : नगर परिषद का मौजूदा कार्यालय म्यूनिसिपल मार्केट की दुकानों में चल रहा है। महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप ही नया कार्यालय बनाया जाना प्रस्तावित है। करीब दो साल पहले इसकी रूपरेखा तैयार कर प्रपोजल सरकार के पास भेजा गया था। इसे मंजूरी मिलते ही महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप वाली जमीन पर निर्माण प्रक्रिया शुरू करवाई जानी है।
प्रोजेक्ट:-2:
एमआरएफ सेंटर : नगर परिषद अधिकारियों की एमआरएफ सेंटर बनाने की योजना है, ताकि शहर से निकलने वाले कचरे में से ज्यादातर को शहर में ही निस्तारित कर दिया जाएगा। एमआरएफ सेंटर बनने के बाद महज 20 प्रतिशत कचरा ही डंपिंग यार्ड तक पहुंचेगा और बाकी कचरा एमआरएफ सेंटर पर ही निस्तारित हो जाएगा।
प्रोजेक्ट:-3-
रैन बसेरा : कड़कड़ाती ठंड में लोगों सड़कों पर रात बितानी पड़ रही है। जिले में अब तक स्थायी रैन बसेरा नहीं है। रोज गार्डन में अस्थायी व्यवस्था की गई है, लेकिन यहां चुनिंदा लोगों के रहने की ही व्यवस्था है। महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप खाली पड़ी जमीन पर स्थायी रैन बसेरा बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन ने भी रैन बसेरा के लिए स्थायी जगह तलाशने के निर्देश दिए हुए है।
प्रोजेक्ट:-4-
अनाथ आश्रम और वृद्धाश्रम : जिला प्रशासन या नगर परिषद की ओर से अब तक जिला मुख्यालय पर वृद्धाश्रम या अनाथ आश्रम की व्यवस्था नहीं की गई है। एकमात्र वृद्धा और अनाथ आश्रम इस समय दिल्ली बाईपास पर सामाजिक संस्था चला रही है। नगर परिषद की इस जमीन पर वृद्धाश्रम और अनाथ आश्रम जैसे प्रोजेक्ट भी परवान चढ़ाए जा सकते हैं।
प्रोजेक्ट:-5
कम्यूनिटी सेंटर : मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार शहर में कम्यूनिटी सेंटर भी बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए भी करीब डेढ़ से दो एकड़ जमीन चाहिए। सीएम ने इसके लिए पांच करोड़ की ग्रांट स्वीकृत की है। महेंद्रगढ़ चुंगी के समीप खाली जमीन पर कम्यूनिटी सेंटर बनाकर नगर परिषद शहरवासियों को सौगात दे सकती है। शहर में एक भी कम्यूनिटी सेंटर नहीं है।
वर्जन::
अगर नगर परिषद की जमीन पर कब्जे किए गए हैं, तो हम मौका देखेंगे। अगर कब्जे पाए गए तो उन्हें जल्द से जल्द हटवा दिया जाएगा।
प्रशांत पाराशर, सचिव, नगर परिषद