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Charkhi Dadri News: दिव्यांगता को नहीं आने दिया आड़े, हाैसलों से खेल मैदान में झंडे गाड़े

Mon, 28 Aug 2023 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 28 Aug 2023 11:50 PM IST
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Did not allow disability to come in the way, planted flags in the playground with courage
जिला पैरा एथलीट कोच ज्ञानेंद्र सिंह घनघस।
चरखी दादरी। एक ओर लोग जहां दिव्यांगता को अभिशाप के रूप में देखते हैं तो वहीं दूसरी ओर जिले के तीन खिलाड़ियों ने दिव्यांगता को सफलता के बीच नहीं आने दिया। इन खिलाड़ियों के हौसले इतने बुलंद थे कि दिव्यांगता व बाधाएं भी उन्हें तोड़ नहीं पाई। गांव किष्कंधा निवासी देवेंद्र ने सड़क हादसे में पैर गंवाने के बाद भी अपने बुलंद हौसलों के दम पर खेल मैदान में मुकाम हासिल किया। उन्होंने एशियन गेम्स से लेकर कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी प्रतिभा के दम पर पदक जीतकर जिले का गौरव बढ़ाया है।
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वहीं, गांव बाढड़ा निवासी दयावंती ने बचपन में ही ट्रैक्टर में फंसने पर पैर गंवाना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने खुद को और मजबूत कर खेल मैदान में उतारा। वो अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण पदक व तीन रजत जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 3 स्वर्ण व दो रजत पदक जीत चुकी हैं। वहीं, जिले में पैरा कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे ज्ञानेंद्र सिंह घनघस भी बचपन में पोलिया का शिकार हुए थे, लेकिन उन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों में हुई शॉटपुट व डिस्कस थ्रो में 10 स्वर्ण पदक व दो रजत पदक और राष्ट्रीय स्तर पर 50 स्वर्ण पदक जीते। इस शानदार उपलब्धि के चलते वो भीम अवाॅर्ड से नवाजे जा चुके हैं।
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- खिलाड़ियों की सफलता की कहानी, उन्हीं की जुबानी
जब हौसले हो बुलंद को बाधाओं की क्या औकात : देवेंद्र
जिले के गांव किष्कंधा निवासी 25 वर्षीय देवेंद्र का कहना है कि जब हौसले बुलंद हो तो बाधाओं की क्या औकात कि वो राह रोक सके। उन्होंने बताया कि तीन बार दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ। तीसरी बार 2014 में एक पैर गंवा दिया। इससे पूर्व वॉलीबाल की राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी रहा। दिव्यांग होने के बाद वर्ष 2018 में पैरा एथलेटिक्स से शुरूआत की। राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्वर्ण पदक जीतकर सुनहरे भविष्य की शुरूआत की। दुबई ओपन चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता। गत वर्ष बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में पांचवीं पोजिशन पाई। हाल ही में चीन के होंगजू में 22 से 28 अक्तूबर तक होने वाले एशियन गेम्स में चयनित हुआ हूं।
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- हादसे में एक पैर खोया, इरादे रखे मजबूत : दयावंती
गांव बाढड़ा निवासी दयावंती का हाल ही में चीन में होने वाले पैरा ओलंपिक एशियन गेम्स में चयन हुआ है। अब 22 से 28 अक्तूबर तक चीन के होंगजू में होने वाली डिस्कस थ्रो एवं शॉटपुट में अपनी प्रतिभा दिखाएगी। दयावंती ने बताया कि सात साल की उम्र में खेत में ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक पैर खो दिया। लेकिन हौसलों को कमजोर नहीं होने दिया। लगातार अभ्यास कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों में हुई प्रतियोगिता में शॉटपुट व डिस्कस थ्रो में 2 बार स्वर्ण, 3 बार रजत, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 3 स्वर्ण व दो रजत पदक जीतकर जिले का मान बढ़ाया है। सात भाई-बहनों में सबसे छोटी दयावंती साधारण किसान परिवार से है।


- ज्ञानेंद्र सिंह घनघस को मिला है प्रदेश का बड़ा सम्मान : ज्ञानेंद्र
गांव धनाना निवासी कोच ज्ञानेंद्र सिंह घनघस की सफलता की कहानी भी संघर्षों से भरी है। बचपन में पोलिया की चपेट में आने से पैर गंवाने के बावजूद भी दिव्यांगता को भी आड़े नहीं आने दिया। वर्ष 2007 में पैरा गेम्स में लंबी कूद के साथ शुरूआत करने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद शॉटपुट व डिस्कस थ्रो में 2007 से शुरुआत की। विश्वभर में हुई अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न स्पर्धाओं 10 स्वर्ण, तीन रजत व तीन कांस्य पदक और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 50 से अधिक स्वर्ण पदक जीते हैं। वर्ष 2010 में प्रदेश का सबसे बड़ा खेल सम्मान भीम अवाॅर्ड से नवाजे गए। वर्ष 2019 से जिले में पैरा एथलेटिक्स कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चार वर्ष का कार्यकाल में इनके अनेक शिष्यों ने पैरा एथलेटिक्स खेलों में पदक जीतकर जिले का गौरव बढ़ाया है।
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