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सुविधा: मातृ-शिशु अस्पताल में शुरू होगी डायलिसिस यूनिट
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चरखी दादरी। जिले में किडनी की बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को राहत देने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग एमसीएच (मातृ-शिशु अस्पताल) में जल्द डायलिसिस यूनिट की सुविधा देने जा रहा है। 15 अगस्त तक डायलिसिस यूनिट वर्किंग में आने की उम्मीद है और इसके लिए विभाग तैयारियों में जुटा है। डायलिसिस यूनिट शुरू करने की मुख्यालय से अनुमति मिल चुकी है और इसके लिए मातृ-शिशु अस्पताल भवन तय किया गया है। इसके अलावा विभाग का प्रयास है कि जल्द ही सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा भी शुरू कर दी जाए।
किडनी मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है। जिले में फिलहाल यह सुविधा न होने पर उन्हें पीजीआई रोहतक जाना पड़ता है या फिर हिसार, दिल्ली आदि बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जहां जाने और इलाज पर छह से आठ हजार रुपये प्रति चक्कर खर्च होता है। सामान्य अस्पताल में डायलिसिस सेंटर बनने के बाद यहां करीब एक हजार रुपये में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। हालांकि रेट सुविधा शुरू करने से पहले ही तय होंगे।
सीएमओ डॉ. कृष्ण सिंह ने बताया कि डायलिसिस यूनिट शुरू होने के बाद एमआरआई और सीटी स्कैन सेंटर की सुविधा मरीजों को मुहैया कराने पर फोकस रहेगा। इसके लिए करीब 4000 स्क्वेयर फुट जगह चिह्नित की गई है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस, सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा।
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- चार साल में पांच हजार मरीज किए जा चुके हैं रेफर
सिविल अस्पताल से डायलिसिस, सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए मरीजों को रेफर किया जा रहा है। 2018 से मरीजों को रेफर किया जा रहा है। अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को रेफर किया जा चुका है। अब प्रतिमाह औसतन 200 मरीज रेफर किए जा रहे हैं।
- इन्हें मिलेगी निशुल्क सुविधा
बीपीएल, एससी श्रेणी, आर्थिक रूप से पिछड़े, स्लम एरिया के मरीजों, सड़क हादसों में घायलों को डायलिसिस की निशुल्क सुविधा मिलेगी। वहीं, सिटी स्कैन और एमआरआई सेंटर बनने के बाद इन श्रेणी को ये सुविधाएं भी निशुल्क मिलेंगी।
- डायलिसिस में लगता है चार घंटे का समय
डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। किडनी रक्त को साफ करने का काम करती है और खराब तत्वों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकालती है, लेकिन कई बार ब्लड यूरिन बढ़ जाता है, जिससे किडनी संबंधित बीमारियां बनती हैं। डायलिसिस से ब्लड यूरिया को नियंत्रित किया जाता है।
वर्जन::
हमारा प्रयास है कि 15 अगस्त तक डायलिसिस यूनिट शुरू कर दी जाए। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा और उन्हें दूसरे जिलों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। हमारी योजना है कि जल्द ही एमआरआई और सीटी स्कैन सेंटर भी शुरू कर दिया जाए।
डॉ. कृष्ण सिंह, सिविल सर्जन, चरखी दादरी
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किडनी मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है। जिले में फिलहाल यह सुविधा न होने पर उन्हें पीजीआई रोहतक जाना पड़ता है या फिर हिसार, दिल्ली आदि बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जहां जाने और इलाज पर छह से आठ हजार रुपये प्रति चक्कर खर्च होता है। सामान्य अस्पताल में डायलिसिस सेंटर बनने के बाद यहां करीब एक हजार रुपये में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। हालांकि रेट सुविधा शुरू करने से पहले ही तय होंगे।
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सीएमओ डॉ. कृष्ण सिंह ने बताया कि डायलिसिस यूनिट शुरू होने के बाद एमआरआई और सीटी स्कैन सेंटर की सुविधा मरीजों को मुहैया कराने पर फोकस रहेगा। इसके लिए करीब 4000 स्क्वेयर फुट जगह चिह्नित की गई है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस, सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा।
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- चार साल में पांच हजार मरीज किए जा चुके हैं रेफर
सिविल अस्पताल से डायलिसिस, सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए मरीजों को रेफर किया जा रहा है। 2018 से मरीजों को रेफर किया जा रहा है। अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को रेफर किया जा चुका है। अब प्रतिमाह औसतन 200 मरीज रेफर किए जा रहे हैं।
- इन्हें मिलेगी निशुल्क सुविधा
बीपीएल, एससी श्रेणी, आर्थिक रूप से पिछड़े, स्लम एरिया के मरीजों, सड़क हादसों में घायलों को डायलिसिस की निशुल्क सुविधा मिलेगी। वहीं, सिटी स्कैन और एमआरआई सेंटर बनने के बाद इन श्रेणी को ये सुविधाएं भी निशुल्क मिलेंगी।
- डायलिसिस में लगता है चार घंटे का समय
डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। किडनी रक्त को साफ करने का काम करती है और खराब तत्वों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकालती है, लेकिन कई बार ब्लड यूरिन बढ़ जाता है, जिससे किडनी संबंधित बीमारियां बनती हैं। डायलिसिस से ब्लड यूरिया को नियंत्रित किया जाता है।
वर्जन::
हमारा प्रयास है कि 15 अगस्त तक डायलिसिस यूनिट शुरू कर दी जाए। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा और उन्हें दूसरे जिलों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। हमारी योजना है कि जल्द ही एमआरआई और सीटी स्कैन सेंटर भी शुरू कर दिया जाए।
डॉ. कृष्ण सिंह, सिविल सर्जन, चरखी दादरी