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बढ़ी हुई बिजली की दरों को वापस ले सरकार : कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर
Thu, 03 Apr 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 03 Apr 2025 11:12 PM IST
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फोटो 04 रघबीर
संवाद न्यूज एजेंंसी
चरखी दादरी। बिजली दरों में की गई बेतहाशा वृद्धि की पूर्व विधायक कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर ने कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इसे जनविरोधी करार दिया है।
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के पूर्व चेयरमैन कर्नल रघबीर सिंह ने कहा कि पहले से ही महंगाई की मार से पीड़ित प्रदेश की जनता के लिए यह वृद्धि असहनीय है। सरकार दावा करती रही है कि दोनों बिजली निगम मुनाफे में चल रहे हैं। अब एकाएक निगमों को हजारों करोड़ घाटे में बता कर बिजली के रेट बढ़ा दिए गए। निगमों का करोड़ों रुपये बिजली बिल राशि सरकारी संस्थानों की तरफ से बकाया पड़ी है। सरकार पहले उस बिजली बिल बकाया राशि का भुगतान करती तो निगमों को बिजली दरों को बढ़ाने की नौबत ही नहीं आती।
उन्होंने कहा कि बिजली निगमों को घाटे में बता कर बिजली के रेट बढ़ाने के पीछे सरकार की मंशा प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को ठगने की साजिश है। निजीकरण के चलते बिजली इतनी महंगी हो जाएगी कि जन साधारण उपभोक्ता महंगी बिजली कंपनियों से खरीद ही नहीं पाएंगे।
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बिजली की दरों में की गई वृद्धि आम उपभोक्ता की जेब पर डाका डालने के समान है। इस वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए। अन्यथा, कांग्रेस पार्टी इस वृद्धि के विरोध में और बिजली निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगी।
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संवाद न्यूज एजेंंसी
चरखी दादरी। बिजली दरों में की गई बेतहाशा वृद्धि की पूर्व विधायक कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर ने कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इसे जनविरोधी करार दिया है।
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के पूर्व चेयरमैन कर्नल रघबीर सिंह ने कहा कि पहले से ही महंगाई की मार से पीड़ित प्रदेश की जनता के लिए यह वृद्धि असहनीय है। सरकार दावा करती रही है कि दोनों बिजली निगम मुनाफे में चल रहे हैं। अब एकाएक निगमों को हजारों करोड़ घाटे में बता कर बिजली के रेट बढ़ा दिए गए। निगमों का करोड़ों रुपये बिजली बिल राशि सरकारी संस्थानों की तरफ से बकाया पड़ी है। सरकार पहले उस बिजली बिल बकाया राशि का भुगतान करती तो निगमों को बिजली दरों को बढ़ाने की नौबत ही नहीं आती।
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उन्होंने कहा कि बिजली निगमों को घाटे में बता कर बिजली के रेट बढ़ाने के पीछे सरकार की मंशा प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को ठगने की साजिश है। निजीकरण के चलते बिजली इतनी महंगी हो जाएगी कि जन साधारण उपभोक्ता महंगी बिजली कंपनियों से खरीद ही नहीं पाएंगे।
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बिजली की दरों में की गई वृद्धि आम उपभोक्ता की जेब पर डाका डालने के समान है। इस वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए। अन्यथा, कांग्रेस पार्टी इस वृद्धि के विरोध में और बिजली निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगी।