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Charkhi Dadri News: दिवाली पर दिल्ली की मिट्टी के दीयों से रोशन होगा ''''दादरी''''
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चरखी दादरी। देशभर में दिवाली पर्व की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। दुकानदार, व्यापारी और कारीगर पर्व पर होने वाली खरीदारी को लेकर तैयारियों में जुटे हैं। वहीं, दादरी जिला की बात करें तो 25 कुंभकार 20 लाख मिट्टी के दीये तैयार कर चुके हैं। इन दीयों को दिल्ली के जहांगीरपुरी की मिट्टी से तैयार किया गया है।
जिले के कुंभकार पिछले 5 माह से दिवाली की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पहले उन्हें मिट्टी और जगह की कमी से जूझना पड़ा तो अब अब लागत के अनुसार भाव न मिलने की आशंका से वो चिंतित हैं। हालांकि इन विकट परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जिले के करीब डेढ़ लाख आशियानों को जगमग करने के लिए दिल्ली की मिट्टी से 20 लाख दीयें तैयार कर दिए हैं।
कुंभकारों का कहना है कि मुश्किल हालातों से पार पाकर उन्होंने दीयें तैयार किए हैं। उन्होंने जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि चाइनीज लड़ी के बजाय दिवाली पर अपने प्रतिष्ठानों को मिट्टी के दीयों से रोशन करें। ऐसे में उनकी मेहनत सफल हो जाएगी और हाथ का हुनर रखने वालों का हौसला भी बढ़ेगा। उनका कहना है कि प्रति ट्रॉली मिट्टी के दाम 5000 से अधिक है। उमेद सिंह प्रजापत ने बताया कि पुश्तैनी काम कम हो रहा है और परिवार के पालन-पोषण के लिए वो इस काम को छोड़ भी नहीं पा रहे हैं। अपने हाथों का हुनर जारी रखने के लिए उन्हें लोगों के सहयोग की जरूरत है।
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कुंभकार बोले-बहुत मेहनत से तैयार होते हैं दीयें, हुनर बचाने में जिलावासी करें मदद
दीयें तैयार होने में लगे दस दिन
दीये बनाने के लिए मिट्टी को दो दिन लगातार धूप में सुखाया जाता है। मिट्टी सूखने के बाद इसे 3 दिन तक लगातार पानी में भिगाेकर रखना पड़ता है। इसके बाद मिट्टी दो बार छानी जाती है। इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही मिट्टी दीये बनने के लिए चाक तक पहुंचती है। लगातार तीन दिन आंच पर पकने के बाद ही दिया बनकर तैयार होता है।
रामकुमार, कुंभकार
पूरा परिवार लगने के बाद एक दिन में बनते हैं 1500 दीयें
पूरा परिवार लगने के बाद ही दिन भर में 1500 दीयें ही बन पाते हैं। आजकल लोग पुरानी परंपरा को भूलकर चाइनीज लड़ी से अपने घरों को रोशन करने लगे हैं जिससे कुंभकारों की दीया बनाने की मेहनत जाया जाती है और उनकी लागत तक पूरी नहीं हो पाती। लोगों का चाहिए कि वो कड़ी मेहनत से तैयार किए गए दीयें खरीदकर हुनर को कायम रखने में मदद करें।
फतेह सिंह, कुंभकार
फोटो: 29
शहर के महेंद्रगढ़ रोड स्थित अपने आवास पर दीये बनाता कुंभकार। संवाद
फोटो: 30
धूप में सूखने के लिए रखे तैयार किए गए दीयें।
फोटो: 31
रामकुमार।
फोटो: 32
फतेह सिंह।
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जिले के कुंभकार पिछले 5 माह से दिवाली की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पहले उन्हें मिट्टी और जगह की कमी से जूझना पड़ा तो अब अब लागत के अनुसार भाव न मिलने की आशंका से वो चिंतित हैं। हालांकि इन विकट परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जिले के करीब डेढ़ लाख आशियानों को जगमग करने के लिए दिल्ली की मिट्टी से 20 लाख दीयें तैयार कर दिए हैं।
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कुंभकारों का कहना है कि मुश्किल हालातों से पार पाकर उन्होंने दीयें तैयार किए हैं। उन्होंने जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि चाइनीज लड़ी के बजाय दिवाली पर अपने प्रतिष्ठानों को मिट्टी के दीयों से रोशन करें। ऐसे में उनकी मेहनत सफल हो जाएगी और हाथ का हुनर रखने वालों का हौसला भी बढ़ेगा। उनका कहना है कि प्रति ट्रॉली मिट्टी के दाम 5000 से अधिक है। उमेद सिंह प्रजापत ने बताया कि पुश्तैनी काम कम हो रहा है और परिवार के पालन-पोषण के लिए वो इस काम को छोड़ भी नहीं पा रहे हैं। अपने हाथों का हुनर जारी रखने के लिए उन्हें लोगों के सहयोग की जरूरत है।
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कुंभकार बोले-बहुत मेहनत से तैयार होते हैं दीयें, हुनर बचाने में जिलावासी करें मदद
दीयें तैयार होने में लगे दस दिन
दीये बनाने के लिए मिट्टी को दो दिन लगातार धूप में सुखाया जाता है। मिट्टी सूखने के बाद इसे 3 दिन तक लगातार पानी में भिगाेकर रखना पड़ता है। इसके बाद मिट्टी दो बार छानी जाती है। इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही मिट्टी दीये बनने के लिए चाक तक पहुंचती है। लगातार तीन दिन आंच पर पकने के बाद ही दिया बनकर तैयार होता है।
रामकुमार, कुंभकार
पूरा परिवार लगने के बाद एक दिन में बनते हैं 1500 दीयें
पूरा परिवार लगने के बाद ही दिन भर में 1500 दीयें ही बन पाते हैं। आजकल लोग पुरानी परंपरा को भूलकर चाइनीज लड़ी से अपने घरों को रोशन करने लगे हैं जिससे कुंभकारों की दीया बनाने की मेहनत जाया जाती है और उनकी लागत तक पूरी नहीं हो पाती। लोगों का चाहिए कि वो कड़ी मेहनत से तैयार किए गए दीयें खरीदकर हुनर को कायम रखने में मदद करें।
फतेह सिंह, कुंभकार
फोटो: 29
शहर के महेंद्रगढ़ रोड स्थित अपने आवास पर दीये बनाता कुंभकार। संवाद
फोटो: 30
धूप में सूखने के लिए रखे तैयार किए गए दीयें।
फोटो: 31
रामकुमार।
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फतेह सिंह।