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मुख्यमंत्री उड़नदस्ते को दो फाइलें ढूंढने में लगा दो घंटे का समय
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छह माह के अंदर एसडीएम कार्यालय दूसरी बार भ्रष्टाचार के चलते सुर्खियों में आया है। शुक्रवार को चोरी के वाहनों का फर्जी दस्तावेजों के सहारे रजिस्ट्रेशन करने के मामले में जांच के लिए दादरी पहुंचे मुख्यमंत्री उड़नदस्ते को दो फाइलें ढूंढने में दो घंटे से ज्यादा का समय लग गया। ये फाइलें तहसील कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर पर पिछली तरफ बने कमरे में रखी फाइलों के पास से मिलीं। इनकी जांच में भी टीम को काफी समय लग गया और इसके बाद ही देर शाम सिटी थाने में तत्कालीन एसडीएम सतबीर कुंडू और रजिस्ट्रेशन क्लर्क राजकुमारी के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता जांच के लिए शुक्रवार दोपहर 12 :30 बजे दादरी पहुंचा था। उड़नदस्ते में शामिल अधिकारियों ने सीधे ऑफिस में पहुंचकर एसडीएम विरेंद सिंह से मुलाकात की। एसडीएम को सूचना की जानकारी टीम ने दी और उन्हें रिकॉर्ड मुहैया करवाने की बात कही। इसके तुरंत बाद एसडीएम ने एक लिपिक को टीम के साथ रिकॉर्ड की जांच करने भेज दिया। दोपहर करीब ढाई बजे टीम को दोनों वाहनों की फाइलें मिल गईं।
इन फाइलों में लगाए गए दस्तावेजों की टीम ने गहनता से जांच की तो परतें खुलती चली गईं। टीम की जांच में एसडीएम कार्यालय स्टाफ की मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे चोरी के वाहनों का रजिस्ट्रेशन करवाने की सूचना सही साबित हुई और इसके बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ता में शामिल एसआई अनूप सिंह ने सिटी थाने में मामला दर्ज करने के लिए शिकायत दे दी।
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15 सितंबर 2020 को भी उजागर हुआ था मामला
एसडीएम ऑफिस में इससे पहले 15 सितंबर 2020 को भी भ्रष्टाचार से जुड़ा एक मामला उजागर हुआ था। उस समय सरकारी शुल्क से दोगुुने रुपये लेकर डीएल-आरसी बनवाने का मामला पकड़ा गया था। उस समय एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था और उसने एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों के साथ साठ-गांठ होने की बात कबूली थी। इस मामले में एक रजिस्ट्रेशन महिला क्लर्क को गिरफ्तार भी किया गया था।
पुलिस को मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने सौंपी दोनों फाइलें
एसडीएम कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से बरामद दोनों फाइलों की गहनता से जांच करने के बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने सिटी थाना पुलिस को सौंप दिया है। मामले की जांच में ये फाइलें पुलिस के लिए अहम रहेंगी और इनसे कई राज उजागर हो सकते हैं।
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मुख्यमंत्री उड़नदस्ता जांच के लिए शुक्रवार दोपहर 12 :30 बजे दादरी पहुंचा था। उड़नदस्ते में शामिल अधिकारियों ने सीधे ऑफिस में पहुंचकर एसडीएम विरेंद सिंह से मुलाकात की। एसडीएम को सूचना की जानकारी टीम ने दी और उन्हें रिकॉर्ड मुहैया करवाने की बात कही। इसके तुरंत बाद एसडीएम ने एक लिपिक को टीम के साथ रिकॉर्ड की जांच करने भेज दिया। दोपहर करीब ढाई बजे टीम को दोनों वाहनों की फाइलें मिल गईं।
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इन फाइलों में लगाए गए दस्तावेजों की टीम ने गहनता से जांच की तो परतें खुलती चली गईं। टीम की जांच में एसडीएम कार्यालय स्टाफ की मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे चोरी के वाहनों का रजिस्ट्रेशन करवाने की सूचना सही साबित हुई और इसके बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ता में शामिल एसआई अनूप सिंह ने सिटी थाने में मामला दर्ज करने के लिए शिकायत दे दी।
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15 सितंबर 2020 को भी उजागर हुआ था मामला
एसडीएम ऑफिस में इससे पहले 15 सितंबर 2020 को भी भ्रष्टाचार से जुड़ा एक मामला उजागर हुआ था। उस समय सरकारी शुल्क से दोगुुने रुपये लेकर डीएल-आरसी बनवाने का मामला पकड़ा गया था। उस समय एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था और उसने एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों के साथ साठ-गांठ होने की बात कबूली थी। इस मामले में एक रजिस्ट्रेशन महिला क्लर्क को गिरफ्तार भी किया गया था।
पुलिस को मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने सौंपी दोनों फाइलें
एसडीएम कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से बरामद दोनों फाइलों की गहनता से जांच करने के बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने सिटी थाना पुलिस को सौंप दिया है। मामले की जांच में ये फाइलें पुलिस के लिए अहम रहेंगी और इनसे कई राज उजागर हो सकते हैं।