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कोरोना अलर्ट : बिना बाल रोग विशेषज्ञ कैसे होगी तीसरी लहर से लड़ाई, डेढ़ लाख बच्चों पर खतरा

Wed, 26 May 2021 01:31 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 26 May 2021 01:31 AM IST
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Corona Alert: How will the pediatrician fight the third wave, one and a half million children are at risk
चरखी दादरी। कोरोना की तीसरी लहर का असर बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिला स्वास्थ्य विभाग के पास तीसरी लहर पर काबू पाने के लिए फिलहाल पर्याप्त संसाधन नहीं है। जिला अस्पताल में ईएनटी से लेकर बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) तक के सभी पद खाली हैं। मौजूदा हालातों को देखें तो कम से कम दो बाल रोग विशेषज्ञ जिले में तैनात होने चाहिए। संसाधनों की कमी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि डिमांड भेजी जा चुकी है और जल्द ही पर्याप्त संसाधन जुटा लिए जाएंगे।
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जिला के कोविड नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ आईएएस डी सुरेश लगातार तीसरी लहर के मद्देनजर व्यापक तैयारियां करने के आदेश अधिकारियों को दे रहे हैं, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग जिले में बाल रोग विशेषज्ञ समेत ईएनटी और अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं कर रहे है। पिछले करीब तीन साल से सिविल अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष को ताला जड़ा हुआ है। जिला स्वास्थ्य विभाग के पास चालू हाल में न तो अल्ट्रासाउंड मशीन है और न ही अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट है। इसके चलते जिले की सरकारी अल्ट्रासाउंड सेवा प्राइवेट केंद्रों पर निर्भर है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए सिविल अस्पताल से प्राइवेट केंद्रों पर भेजा जा रहा है। हालांकि अल्ट्रासाउंड का खर्च विभाग वहन करेगा, लेकिन आने-जाने में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दादरी जिले में कोरोना की दूसरी लहर का असर अब काफी कम हो चुका है। प्रतिदिन 100 से ऊपर चल रही संक्रमण दर अब 40 से नीचे आ गई है, लेकिन अब तीसरी लहर आने का आशंका जताई जा रही है। इस लहर की चपेट में सबसे अधिक बच्चों के आने की संभावना है। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि जिला स्वास्थ्य विभाग के पास तीसरी लहर के मद्देनजर संसाधनों की अभी भारी कमी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार संसाधनों की कमी को दूर करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और जल्द बच्चों के वेंटिलेटर समेत नेबोलाइजर और अन्य संसाधनों की खरीद का कार्य पूरा हो जाएगा।
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- डेढ़ लाख हैं जिले में बच्चे, विशेषज्ञ एक भी नहीं
जिले में 18 वर्ष से कम आयु के दो लाख लोग हैं। इनमें बच्चों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। इन बच्चों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। लोगों को शहर के प्राइवेट अस्पतालों में जाकर जेब ढीली कर बच्चों का उपचार करवाना पड़ रहा है। एक प्राइवेट अस्पताल की दैनिक ओपीडी 50 से पार है।
- कोविड में बाल-शिशु नर्सरी को बनाया आईसीयू
कोविडकाल में जिला स्वास्थ्य विभाग ने बाल-शिशु नर्सरी को आईसीयू के तौर पर उपयोग में लिया है। वेंटिलेटर बेड की व्यवस्था भी यहां की गई है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को वेंटिलेटर पर भी रखा जा रहा है। हाल ही में सरकार ने जिले में दो फिजिशियन तैनात किए हैं जो वेंटिलेटर ऑपरेट कर रहे हैं। उनकी तैनाती से जिला स्वास्थ्य विभाग की सुविधाओं में कुछ विस्तार भी हुआ है।
- संसाधनों की उपलब्धता के लिए सूची तैयार कर रहा विभाग
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुुसार कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर संसाधनों की कमी को दूर करने पर विभाग का फोकस है। गत दिनों आयोजित बैठक में डीसी ने स्वास्थ्य विभाग को बच्चों के वेंटिलेटर और नेबोलाइलर समेत अन्य आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए थे। डीसी ने विभाग को निर्देश दिए थे कि जो संसाधन नहीं हैं, उनकी सूची तैयार की जाए ताकि कमी को जल्द से जल्द पूरा कर सकें। इसके बाद विभाग इस कार्य में जुटा हुआ है।

पीडिट्रिशियन समेत अन्य विशेषज्ञों की तैनाती की मांग हमने हेड ऑफिस भेज दी है। संसाधनों की कमी को हम जल्द दूर कर लेंगे। कोरोना का असर पर जिले में कम हो रहा है। हमने तीसरी लहर को देखते हुए दो पीडिट्रिशियन जिले में तैनात करने की मांग की है।
डॉक्टर सुदर्शन पंवार, सीएमओ, चरखी दादरी
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