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एनजीटी निगरानी समिति के चेयरमैन ने क्रशर जोन का किया निरीक्षण
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चरखी दादरी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की निगरानी समिति के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस प्रीतमपाल सिंह ने शुक्रवार को माइनिंग और क्रशर जोन का दौरा किया। इस दौरान जिले के अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे। उन्होंने कहा है कि जिले के पहाड़ों में क्रशर व माइनिंग जोन की वस्तुस्थिति की रिपोर्ट जल्दी ही अधिकरण को सौंपी जाएगी। इस क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभी कुछ और कार्य किए जाने आवश्यक है।
निरीक्षण को लेकर जस्टिस प्रीतमपाल सिंह ने कहा कि एक ओर जहां मशीनरी पर धूल को रोकने के लिए टीन शेड, पौधरोपण व पानी के छिड़काव आदि व्यवस्था देखने को मिली तो वहीं कुछ खामियां भी पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में खनन कार्य रोजगार का प्रमुख जरिया बन चुका है। इसमें माइनिंग व क्रशिंग की अनुमति लेने के लिए ठेकेदारों ने प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार की गाइडलाइन के अनुसार मूलभूत कार्य तो किए गए हैं, फिर भी काफी सुधार किए जाने बाकी है। दादरी जोन में उनकी जांच के मुख्य बिंदु प्रदूषण और वनीकरण है। इस आधार पर वे अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी को देंगे। इसके लिए कुछ और दस्तावेज भी उन्होंने क्रशर संचालकों से मंगवाए हैं।
एनजीटी के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. बाबूराम ने सभी क्रशरों पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक उपकरणों, बिजली कनेक्शन, बिजली बिलों की राशि, उत्पादन, गाड़ियों की लोडिंग, ई-रवाना बिलिंग, मशीनरी आदि की बिंदुवार जांच कर उनकी नोटिंग की। एनजीटी की टीम ने नगराधीश अमित मान के साथ गांव रामलवास, खेड़ी बत्तर, कलियाणा आदि के समीप लगे विभिन्न क्रशरों की जांच-पड़ताल की। इस दौरान बंद रखे गए क्रशरों की मशीनें चलवाकर देखी गईं। आज जोन में पानी का भरपूर छिड़काव टीम को देखने को मिला। इस मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरके भोंसले, वैज्ञानिक अपर्णेश कौशिक, खनन अधिकारी निरंजन लाल आदि उपस्थित रहे।
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निरीक्षण को लेकर जस्टिस प्रीतमपाल सिंह ने कहा कि एक ओर जहां मशीनरी पर धूल को रोकने के लिए टीन शेड, पौधरोपण व पानी के छिड़काव आदि व्यवस्था देखने को मिली तो वहीं कुछ खामियां भी पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में खनन कार्य रोजगार का प्रमुख जरिया बन चुका है। इसमें माइनिंग व क्रशिंग की अनुमति लेने के लिए ठेकेदारों ने प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार की गाइडलाइन के अनुसार मूलभूत कार्य तो किए गए हैं, फिर भी काफी सुधार किए जाने बाकी है। दादरी जोन में उनकी जांच के मुख्य बिंदु प्रदूषण और वनीकरण है। इस आधार पर वे अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी को देंगे। इसके लिए कुछ और दस्तावेज भी उन्होंने क्रशर संचालकों से मंगवाए हैं।
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एनजीटी के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. बाबूराम ने सभी क्रशरों पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक उपकरणों, बिजली कनेक्शन, बिजली बिलों की राशि, उत्पादन, गाड़ियों की लोडिंग, ई-रवाना बिलिंग, मशीनरी आदि की बिंदुवार जांच कर उनकी नोटिंग की। एनजीटी की टीम ने नगराधीश अमित मान के साथ गांव रामलवास, खेड़ी बत्तर, कलियाणा आदि के समीप लगे विभिन्न क्रशरों की जांच-पड़ताल की। इस दौरान बंद रखे गए क्रशरों की मशीनें चलवाकर देखी गईं। आज जोन में पानी का भरपूर छिड़काव टीम को देखने को मिला। इस मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरके भोंसले, वैज्ञानिक अपर्णेश कौशिक, खनन अधिकारी निरंजन लाल आदि उपस्थित रहे।
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