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Charkhi Dadri News: बिजली ट्यूबवेलों का निजीकरण करने के विरोध में भाकियू ने निकाला मार्च
Tue, 23 Jun 2026 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:17 AM IST
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किसान भवन में नारेबाजी करते हुए किसान संगठनों के सदस्य।
बाढड़ा। बिजली ट्यूबवेलों का निजीकरण करने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन ने सोमवार को सरकार के खिलाफ रोष जताया। किसानों ने बीडीपीओ के माध्यम से सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने कहा कि कंपनियों के दबाव में किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। किसानों की मांगों को नहीं माना गया तो बड़े स्तर पर रोष प्रदर्शन किया जाएगा।
किसान भवन में जिला अध्यक्ष हरपाल भांडवा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद किसानों ने रोष मार्च निकालकर बीडीपीओ दीपक शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने बिजली ट्यूबवेलों को प्राइवेट कंपनी को देने के फैसले को वापस लेने की मांग की।
भाकियू अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा ने कहा कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो कंपनियों के अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्यूबवेल के पास भी नहीं आने दिया जाएगा। किसान नेता ने कहा कि सरकार की नीतियां किसानों के हितों के खिलाफ हैं।
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बिजली ट्यूबवेल कंपनियों के हवाले करने का फैसला किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। इसके विरोध में जिले के विभिन्न गांवों के करीब पांच हजार किसानों के हस्ताक्षर करवाकर सरकार के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया है।
किसान यूनियन अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा कि किसान से टकराने वाली सरकार दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाई हैं। इसलिए सरकार को किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। निजीकरण के इस फैसले को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। जरूरत पडऩे पर प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस दौरान भाकियू महासचिव राधेश्याम, राजबीर हंसावास, प्रताप हंसावास, संदीप कारीमोद, अभय सिंह श्योराण, पूर्व सरपंच गिरधारी, पबिता देवी, आनंद वालिया, सतबीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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किसान भवन में जिला अध्यक्ष हरपाल भांडवा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद किसानों ने रोष मार्च निकालकर बीडीपीओ दीपक शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने बिजली ट्यूबवेलों को प्राइवेट कंपनी को देने के फैसले को वापस लेने की मांग की।
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भाकियू अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा ने कहा कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो कंपनियों के अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्यूबवेल के पास भी नहीं आने दिया जाएगा। किसान नेता ने कहा कि सरकार की नीतियां किसानों के हितों के खिलाफ हैं।
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बिजली ट्यूबवेल कंपनियों के हवाले करने का फैसला किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। इसके विरोध में जिले के विभिन्न गांवों के करीब पांच हजार किसानों के हस्ताक्षर करवाकर सरकार के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया है।
किसान यूनियन अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा कि किसान से टकराने वाली सरकार दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाई हैं। इसलिए सरकार को किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। निजीकरण के इस फैसले को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। जरूरत पडऩे पर प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस दौरान भाकियू महासचिव राधेश्याम, राजबीर हंसावास, प्रताप हंसावास, संदीप कारीमोद, अभय सिंह श्योराण, पूर्व सरपंच गिरधारी, पबिता देवी, आनंद वालिया, सतबीर सिंह आदि मौजूद रहे।