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Charkhi Dadri News: मंडी में बाजरा-कपास की आवक शुरू, सरकारी भाव नहीं मिलने से किसान परेशान
Sat, 19 Sep 2026 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:54 AM IST
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अनाज मंडी में रखी कपास की फसल।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। अनाज मंडी में बाजरा और कपास की नई फसल की आवक शुरू होने के साथ ही किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। सरकारी भाव न मिलने और फसल में निर्धारित सीमा से अधिक नमी होने के कारण किसान अपनी उपज को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं।
मंडी में फिलहाल सबसे अधिक समस्या नमी को लेकर सामने आ रही है। किसान मंडी परिसर में फसल को सुखाने के लिए मजबूर हैं लेकिन इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार खेत से फसल निकालने के बाद जब वे इसे मंडी लेकर पहुंचते हैं तो नमी अधिक होने की बात कहकर खरीद में आनाकानी की जाती है। सरकारी खरीद के लिए 12 प्रतिशत नमी की सीमा निर्धारित होने के कारण किसान फसल को सुखाकर निर्धारित मानक के अनुरूप करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें मंडी में अपनी फसल को कई घंटे तक खुले में फैलाकर रखना पड़ता है।
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खुले में सुखाई फसल को बेसहारा पशुओं से नुकसान
मंडी परिसर में फसल सुखाने के दौरान किसानों के सामने दूसरी बड़ी समस्या बेसहारा पशुओं की है। किसानों का कहना है कि मंडी में फसल की रखवाली के लिए पर्याप्त चौकीदार व्यवस्था नहीं होने के कारण बेसहारा पशु खुले में सुखाई गई फसल तक पहुंच जाते हैं। पशुओं द्वारा फसल खाने और उसे बिखेरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। किसान फसल की रखवाली के लिए खुद ही मंडी में बैठने को मजबूर हैं।
कपास की 250 से अधिक पल्ली पहुंची
अनाज मंडी में कपास की आवक भी लगातार बढ़ रही है। अब तक 250 से अधिक पल्लियों में 10,134 क्विंटल कपास मंडी में पहुंच चुकी हैं। किसानों को उम्मीद थी कि नई फसल की आवक शुरू होते ही सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी और उन्हें निर्धारित भाव मिल सकेगा, लेकिन खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों को लागत निकालना मुश्किल
कई किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी समेत काफी खर्च हो चुका है। ऐसे में उचित भाव नहीं मिलने पर लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों का कहना है कि मंडी में फसल लेकर आने के बाद उसे बेचने में देरी होने से समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। वहीं नमी के कारण फसल को दोबारा सुखाने की जरूरत पड़ रही है। यदि इस दौरान फसल को नुकसान पहुंचता है तो उसकी भरपाई भी किसानों को ही करनी पड़ती है।
सरकारी खरीद शुरू होने की मांग
किसानों ने प्रशासन और संबंधित खरीद एजेंसियों से मांग की है कि मंडी में बाजरा और कपास की सरकारी खरीद जल्द शुरू करवाई जाए। साथ ही नमी की जांच के लिए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो। मंडी में फसल सुखाने के लिए उचित स्थान और बेसहारा पशुओं से बचाव की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की गई है। किसानों का कहना है कि समय पर सरकारी खरीद और निर्धारित भाव मिलने से उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए निजी खरीदारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
वर्जन:
हमारे पास अभी तक बाजरा व कपास की सरकारी खरीद के लिए पत्र जारी नहीं हुआ है। मुख्यालय से पत्र मिलने के बाद बाजरा की सरकारी खरीद शुरू हो सकेगी।-- विद्या सागर, सचिव, मार्केट कमेटी।
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मंडी में फिलहाल सबसे अधिक समस्या नमी को लेकर सामने आ रही है। किसान मंडी परिसर में फसल को सुखाने के लिए मजबूर हैं लेकिन इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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किसानों के अनुसार खेत से फसल निकालने के बाद जब वे इसे मंडी लेकर पहुंचते हैं तो नमी अधिक होने की बात कहकर खरीद में आनाकानी की जाती है। सरकारी खरीद के लिए 12 प्रतिशत नमी की सीमा निर्धारित होने के कारण किसान फसल को सुखाकर निर्धारित मानक के अनुरूप करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें मंडी में अपनी फसल को कई घंटे तक खुले में फैलाकर रखना पड़ता है।
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खुले में सुखाई फसल को बेसहारा पशुओं से नुकसान
मंडी परिसर में फसल सुखाने के दौरान किसानों के सामने दूसरी बड़ी समस्या बेसहारा पशुओं की है। किसानों का कहना है कि मंडी में फसल की रखवाली के लिए पर्याप्त चौकीदार व्यवस्था नहीं होने के कारण बेसहारा पशु खुले में सुखाई गई फसल तक पहुंच जाते हैं। पशुओं द्वारा फसल खाने और उसे बिखेरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। किसान फसल की रखवाली के लिए खुद ही मंडी में बैठने को मजबूर हैं।
कपास की 250 से अधिक पल्ली पहुंची
अनाज मंडी में कपास की आवक भी लगातार बढ़ रही है। अब तक 250 से अधिक पल्लियों में 10,134 क्विंटल कपास मंडी में पहुंच चुकी हैं। किसानों को उम्मीद थी कि नई फसल की आवक शुरू होते ही सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी और उन्हें निर्धारित भाव मिल सकेगा, लेकिन खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों को लागत निकालना मुश्किल
कई किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी समेत काफी खर्च हो चुका है। ऐसे में उचित भाव नहीं मिलने पर लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों का कहना है कि मंडी में फसल लेकर आने के बाद उसे बेचने में देरी होने से समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। वहीं नमी के कारण फसल को दोबारा सुखाने की जरूरत पड़ रही है। यदि इस दौरान फसल को नुकसान पहुंचता है तो उसकी भरपाई भी किसानों को ही करनी पड़ती है।
सरकारी खरीद शुरू होने की मांग
किसानों ने प्रशासन और संबंधित खरीद एजेंसियों से मांग की है कि मंडी में बाजरा और कपास की सरकारी खरीद जल्द शुरू करवाई जाए। साथ ही नमी की जांच के लिए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो। मंडी में फसल सुखाने के लिए उचित स्थान और बेसहारा पशुओं से बचाव की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की गई है। किसानों का कहना है कि समय पर सरकारी खरीद और निर्धारित भाव मिलने से उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए निजी खरीदारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
वर्जन:
हमारे पास अभी तक बाजरा व कपास की सरकारी खरीद के लिए पत्र जारी नहीं हुआ है। मुख्यालय से पत्र मिलने के बाद बाजरा की सरकारी खरीद शुरू हो सकेगी।