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Charkhi Dadri News: पशु चिकित्सक की तैनाती न होने से पशुपालक परेशान
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गांव जीतपुरा पशु चिकित्सालय भवन।
बाढड़ा। गांव जीतपुरा का पशु चिकित्सालय पिछले काफी समय से जर्जर हालात में है। कर्मचारियों को गांव की चौपाल में बैठक कर कार्य करना पड़ रहा है। पशुपालक प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। वहीं, पशुपालकों ने प्रशासन से समस्या पर संज्ञान लेकर समाधान करवाने की मांग की है।
ग्रामीण राजेंद्र, बिजेंद्र, रामफल, कुलदीप, संजय आदि ने बताया कि जर्जर भवन को सुधारने के लिए कई बार विभाग व नेताओं को अवगत करवा चुके हैं अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है जिसके कारण पशुपालकों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के बीमार होने पर चिकित्सा सुविधाएं न मिल पाने के कारण निजी चिकित्सकों से उपचार करवाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पशु चिकित्सालय को लेकर कई दफा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के सामने आवाज उठा चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इसे लेकर कई बार विभाग व अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पशुओं को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने की बात की जा रही है जबकि धरातल पर कुछ नहीं है। ग्रामीणों ने सरकार से पशु चिकित्सालय भवन निर्माण कर चिकित्सक सेवा बहाल करने की मांग की है। वहीं, इस संबंध में जब पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. जसवंत जून से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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ग्रामीण राजेंद्र, बिजेंद्र, रामफल, कुलदीप, संजय आदि ने बताया कि जर्जर भवन को सुधारने के लिए कई बार विभाग व नेताओं को अवगत करवा चुके हैं अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है जिसके कारण पशुपालकों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के बीमार होने पर चिकित्सा सुविधाएं न मिल पाने के कारण निजी चिकित्सकों से उपचार करवाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि पशु चिकित्सालय को लेकर कई दफा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के सामने आवाज उठा चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इसे लेकर कई बार विभाग व अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पशुओं को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने की बात की जा रही है जबकि धरातल पर कुछ नहीं है। ग्रामीणों ने सरकार से पशु चिकित्सालय भवन निर्माण कर चिकित्सक सेवा बहाल करने की मांग की है। वहीं, इस संबंध में जब पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. जसवंत जून से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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