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Charkhi Dadri News: जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप, एसीबी ने शुरू की जांच
Fri, 23 May 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 23 May 2025 12:42 AM IST
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फोटो 06 चंपापुरी स्थित जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय। संवाद
- शहर निवासी जितेंद्र जटासरा ने 21 मई को मुख्यमंत्री को भेजी थी शिकायत, उसी दिन एसीबी को मिले जांच करने के निर्देश
- शिकायतकर्ता को भेजा बयान दर्ज कराने का नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। स्वास्थ्य के बाद अब जनस्वास्थ्य विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत पहुंचने पर मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंपी गई है। वहीं, एसीबी के स्थानीय अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को जांच में शामिल होने का नोटिस भी दिया है। वहीं, सूत्रों की मानें तो नोटिस के साथ ही शिकायतकर्ता ने जवाब दे दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र जटासरा की ओर से 21 मई को मुख्यमंत्री कार्यालय में जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एक शिकायत दी गई। इसकी प्रति एसीबी महानिदेशक को भी भेजी गई। एसीबी महानिदेशक ने उसी दिन संज्ञान लेकर स्थानीय अधिकारियों को शिकायत भेजकर जांच के आदेश दिए। खास बात यह है कि 21 मई को बयान दर्ज कराने के लिए शिकायतकर्ता जितेंद्र जटासरा और विभाग के एक अधिकारी को नोटिस जारी कर बुला लिया।
सूत्रों की मानें तो शिकायतकर्ता ने बयान दर्ज कराने के नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि उनकी शिकायत ही बयान समझा जाए। दूसरी ओर जनस्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने एसीबी कार्यालय पहुंचकर बयान दर्ज कराए।
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मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के पास भेजी जाएगी। उनके निर्देशानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जांच पूरी होने पर पता चल सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
कौन-से वे 7 बिंदु, जिनमें भ्रष्टाचार का आरोप
1- विभाग के एक अधिकारी पर अपने चहेते के घर अवैध पेयजल कनेक्शन देने का आरोप लगा। आरोप है कि इसके एवज में 2,000 रुपये लिए गए। उक्त अधिकारी के भ्रष्टाचारी रवैये के कारण विभाग की लाइनों को तोड़कर अवैध कनेक्शन किए जा रहे हैं। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई भी नहीं होने दी जा रही है।
2- एक अधिकारी ने ठेकेदारों से सांठगांठ कर निर्माण सामग्री की फर्जी जांच रिपोर्ट बनवाकर विभाग को लाखों रुपये की चपत लगाई। आज तक इस मामले में शिकायतकर्ता को जांच में शामिल नहीं किया गया। कागज में शिकायत फाइल करवा दी गई। इस मामले की जांच प्रभावित करने वाले पर भी कार्रवाई हो।
3- विभाग के अधिकारी ने ठेकेदार से मिलकर विभाग को करीब 10 से 15 लाख का वित्तीय नुकसान पहुंचाया। इसकी शिकायत पहले भी की गई। इसे शिकायतकर्ता को बुलाए बिना ही फाइल किया गया है। इस मामले की जांच की जाए तो भ्रष्टाचार उजागर होगा।
4- विभाग के दो अधिकारियों पर मिलीभगत कर सीवर-पानी की लाइन अवैध रूप से डालने का आरोप है। इस मामले में 2 लाख रुपये रिश्वत लेने की बात शिकायत में कही गई है। आरोप है कि इस शिकायत को भी फाइल करवा दिया गया है। इसमें भी शिकायतकर्ता को जांच में शामिल नहीं किया।
5- विभाग के अधिकारियों पर एजेंसी से मिलीभगत कर करीब दो करोड़ की मिट्टी बेचने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार एसई जांच करने के लिए दादरी आए और मौके पर गड़बड़ी की हामी भरी। इसके बाद जांच की कोई अपडेट जानकारी नहीं दी गई। इस मामले की सही जांच हो तो सभी अधिकारी फंसेंगे।
6- एक अगस्त 2022 से 20 मई 2025 तक जो कार्य करवाए हैं, उनमें से ज्यादातर धरातल पर हुए ही नहीं हैं। वे कार्य केवल कागज में हुए। इन कामों में अधिकारियों ने करीब 3 करोड़ रुपये का गबन किया।
7- निर्माण सामग्री की टेस्ट रिपोर्ट गलत तैयार कराई गई है। आरोप है कि इस खेल में कई अधिकारी शामिल हैं। नमूने किसी दूसरी जगह से लिए गए। शिकायत में बताई जगह से निर्माण सामग्री के नमूने शिकायतकर्ता की मौजूदगी में लेकर इनकी अन्य किसी लैब से जांच कराने की मांग है।
- यह कहना है शिकायतकर्ता का
शिकायतकर्ता जितेंद्र जटासरा ने बताया कि भ्रष्टाचार के 7 बिंदुओं को शामिल कर मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत भेजी थी। इसकी प्रति प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, एसीबी महानिदेशक समेत जनस्वास्थ्य विभाग के एसीएस को भेजी थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो डीएसपी की ओर से बयान दर्ज कराने का नोटिस भेजा गया। मैंने शिकायत को ही अपने बयान बताया है।
वर्सन
हमारे पास जांच के लिए यह शिकायत आई है। जांच शुरू कर दी गई है। पूरी होने के बाद रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी।
-महेश कुमार, डीएसपी, एंटी करप्शन ब्यूरो
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- शहर निवासी जितेंद्र जटासरा ने 21 मई को मुख्यमंत्री को भेजी थी शिकायत, उसी दिन एसीबी को मिले जांच करने के निर्देश
- शिकायतकर्ता को भेजा बयान दर्ज कराने का नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। स्वास्थ्य के बाद अब जनस्वास्थ्य विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत पहुंचने पर मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंपी गई है। वहीं, एसीबी के स्थानीय अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को जांच में शामिल होने का नोटिस भी दिया है। वहीं, सूत्रों की मानें तो नोटिस के साथ ही शिकायतकर्ता ने जवाब दे दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र जटासरा की ओर से 21 मई को मुख्यमंत्री कार्यालय में जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एक शिकायत दी गई। इसकी प्रति एसीबी महानिदेशक को भी भेजी गई। एसीबी महानिदेशक ने उसी दिन संज्ञान लेकर स्थानीय अधिकारियों को शिकायत भेजकर जांच के आदेश दिए। खास बात यह है कि 21 मई को बयान दर्ज कराने के लिए शिकायतकर्ता जितेंद्र जटासरा और विभाग के एक अधिकारी को नोटिस जारी कर बुला लिया।
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सूत्रों की मानें तो शिकायतकर्ता ने बयान दर्ज कराने के नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि उनकी शिकायत ही बयान समझा जाए। दूसरी ओर जनस्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने एसीबी कार्यालय पहुंचकर बयान दर्ज कराए।
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मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के पास भेजी जाएगी। उनके निर्देशानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जांच पूरी होने पर पता चल सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
कौन-से वे 7 बिंदु, जिनमें भ्रष्टाचार का आरोप
1- विभाग के एक अधिकारी पर अपने चहेते के घर अवैध पेयजल कनेक्शन देने का आरोप लगा। आरोप है कि इसके एवज में 2,000 रुपये लिए गए। उक्त अधिकारी के भ्रष्टाचारी रवैये के कारण विभाग की लाइनों को तोड़कर अवैध कनेक्शन किए जा रहे हैं। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई भी नहीं होने दी जा रही है।
2- एक अधिकारी ने ठेकेदारों से सांठगांठ कर निर्माण सामग्री की फर्जी जांच रिपोर्ट बनवाकर विभाग को लाखों रुपये की चपत लगाई। आज तक इस मामले में शिकायतकर्ता को जांच में शामिल नहीं किया गया। कागज में शिकायत फाइल करवा दी गई। इस मामले की जांच प्रभावित करने वाले पर भी कार्रवाई हो।
3- विभाग के अधिकारी ने ठेकेदार से मिलकर विभाग को करीब 10 से 15 लाख का वित्तीय नुकसान पहुंचाया। इसकी शिकायत पहले भी की गई। इसे शिकायतकर्ता को बुलाए बिना ही फाइल किया गया है। इस मामले की जांच की जाए तो भ्रष्टाचार उजागर होगा।
4- विभाग के दो अधिकारियों पर मिलीभगत कर सीवर-पानी की लाइन अवैध रूप से डालने का आरोप है। इस मामले में 2 लाख रुपये रिश्वत लेने की बात शिकायत में कही गई है। आरोप है कि इस शिकायत को भी फाइल करवा दिया गया है। इसमें भी शिकायतकर्ता को जांच में शामिल नहीं किया।
5- विभाग के अधिकारियों पर एजेंसी से मिलीभगत कर करीब दो करोड़ की मिट्टी बेचने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार एसई जांच करने के लिए दादरी आए और मौके पर गड़बड़ी की हामी भरी। इसके बाद जांच की कोई अपडेट जानकारी नहीं दी गई। इस मामले की सही जांच हो तो सभी अधिकारी फंसेंगे।
6- एक अगस्त 2022 से 20 मई 2025 तक जो कार्य करवाए हैं, उनमें से ज्यादातर धरातल पर हुए ही नहीं हैं। वे कार्य केवल कागज में हुए। इन कामों में अधिकारियों ने करीब 3 करोड़ रुपये का गबन किया।
7- निर्माण सामग्री की टेस्ट रिपोर्ट गलत तैयार कराई गई है। आरोप है कि इस खेल में कई अधिकारी शामिल हैं। नमूने किसी दूसरी जगह से लिए गए। शिकायत में बताई जगह से निर्माण सामग्री के नमूने शिकायतकर्ता की मौजूदगी में लेकर इनकी अन्य किसी लैब से जांच कराने की मांग है।
- यह कहना है शिकायतकर्ता का
शिकायतकर्ता जितेंद्र जटासरा ने बताया कि भ्रष्टाचार के 7 बिंदुओं को शामिल कर मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत भेजी थी। इसकी प्रति प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, एसीबी महानिदेशक समेत जनस्वास्थ्य विभाग के एसीएस को भेजी थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो डीएसपी की ओर से बयान दर्ज कराने का नोटिस भेजा गया। मैंने शिकायत को ही अपने बयान बताया है।
वर्सन
हमारे पास जांच के लिए यह शिकायत आई है। जांच शुरू कर दी गई है। पूरी होने के बाद रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी।
-महेश कुमार, डीएसपी, एंटी करप्शन ब्यूरो